हंगामे के बीच लोकसभा में स्पीकर के खिलाफ विपक्ष का अविश्वास प्रस्ताव खारिज

Edited By Updated: 11 Mar, 2026 06:53 PM

opposition s no confidence motion against speaker rejected in lok sabha amid upr

लोकसभा में बुधवार को उस समय जोरदार हंगामा देखने को मिला, जब विपक्ष द्वारा स्पीकर ओम बिरला को पद से हटाने के लिए लाया गया अविश्वास प्रस्ताव सदन में पेश किया गया। तीखी बहस और नारेबाजी के बीच इस प्रस्ताव पर वॉइस वोट कराया गया, जिसमें प्रस्ताव खारिज हो...

नेशनल डेस्क : लोकसभा में बुधवार को उस समय जोरदार हंगामा देखने को मिला, जब विपक्ष द्वारा स्पीकर ओम बिरला को पद से हटाने के लिए लाया गया अविश्वास प्रस्ताव सदन में पेश किया गया। तीखी बहस और नारेबाजी के बीच इस प्रस्ताव पर वॉइस वोट कराया गया, जिसमें प्रस्ताव खारिज हो गया। इसके बाद सदन की कार्यवाही पूरे दिन के लिए स्थगित कर दी गई और अगली बैठक गुरुवार सुबह 11 बजे के लिए तय की गई है।

विपक्ष ने लगाया पक्षपात का आरोप

विपक्षी दलों का कहना था कि स्पीकर सदन में निष्पक्ष माहौल बनाए रखने में विफल रहे हैं। उनका आरोप था कि विपक्षी सांसदों को अपनी बात रखने का पर्याप्त अवसर नहीं दिया जाता और कई बार उन्हें बोलने से रोका जाता है। विपक्ष का दावा था कि संसद में असहमति के लिए जगह कम होती जा रही है, इसलिए यह प्रस्ताव लाना जरूरी हो गया। आरजेडी सांसद अभय कुमार सिन्हा ने बहस के दौरान कहा कि कई विपक्षी सदस्यों को लगता है कि उन्हें चेयर से अपेक्षित सुरक्षा नहीं मिल रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि सदन में ऐसा माहौल बन गया है, जहां विपक्ष की आवाज दबाई जा रही है।

अमित शाह ने किया स्पीकर का बचाव

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने प्रस्ताव का जवाब देते हुए विपक्ष पर तीखा हमला बोला और इस कदम को संसदीय परंपराओं के लिए दुर्भाग्यपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि स्पीकर सदन के निष्पक्ष संरक्षक होते हैं और उनका काम सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों के हितों का संतुलन बनाए रखना होता है। शाह ने कहा कि भारतीय संसदीय इतिहास में लोकसभा स्पीकर को हटाने के लिए बहुत कम बार ऐसे प्रस्ताव लाए गए हैं। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि भाजपा ने लंबे समय तक विपक्ष में रहने के बावजूद कभी स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव नहीं लाया।

‘सदन नियमों से चलेगा, किसी पार्टी की इच्छा से नहीं’

अपने भाषण में शाह ने जोर देकर कहा कि संसद का संचालन स्थापित नियमों और प्रक्रियाओं के अनुसार होना चाहिए, न कि किसी राजनीतिक दल की इच्छा के अनुसार। उन्होंने कहा कि स्पीकर की निष्पक्षता पर सवाल उठाना लोकतांत्रिक संस्थाओं की विश्वसनीयता को कमजोर करता है। शाह ने यह भी कहा कि स्पीकर को यह अधिकार है कि वे सदन की कार्यवाही को नियमों के दायरे में रखें और गैर-संसदीय टिप्पणियों को रिकॉर्ड से हटाएं। उनके मुताबिक संसद कोई ऐसा मंच नहीं है जहां बिना नियमों के कोई भी कुछ भी बोल सके।

विपक्ष ने बहस में उठाए कई मुद्दे

विपक्षी सांसदों ने बहस के दौरान आरोप लगाया कि जब भी विपक्ष के सदस्य बोलने की कोशिश करते हैं, तो उन्हें बार-बार रोका जाता है। झारखंड मुक्ति मोर्चा के सांसद विजय कुमार हंसदक ने कहा कि कई बार ऐसा लगता है कि विपक्ष की आवाज सुनने के बजाय उसे दबाने की कोशिश की जाती है। एनसीपी (एसपी) के सांसद बजरंग मनोहर सोनवणे ने कहा कि विपक्ष को पहले से पता था कि संख्या बल के कारण प्रस्ताव पास होना मुश्किल है, लेकिन उनका उद्देश्य संसद के भीतर लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़े मुद्दों को सामने लाना था।

संसदीय इतिहास में कम ही हुए ऐसे प्रस्ताव

अमित शाह ने बताया कि भारत के संसदीय इतिहास में लोकसभा स्पीकर को हटाने के लिए बहुत कम बार प्रस्ताव लाए गए हैं। उन्होंने कहा कि पिछले 75 वर्षों में संसद ने लोकतंत्र की मजबूत नींव रखी है और इस तरह के प्रस्ताव उस परंपरा को कमजोर कर सकते हैं।

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