Edited By Pardeep,Updated: 12 Mar, 2026 10:58 PM

ईरान, अमेरिका और इजराइल के बीच चल रहे युद्ध का असर अब वैश्विक तेल बाजार पर साफ दिखाई दे रहा है। युद्ध और बढ़ते तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आ गया है।
इंटरनेशनल डेस्कः ईरान, अमेरिका और इजराइल के बीच चल रहे युद्ध का असर अब वैश्विक तेल बाजार पर साफ दिखाई दे रहा है। युद्ध और बढ़ते तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आ गया है। खास तौर पर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के बंद होने से मध्य-पूर्व के देशों से तेल की सप्लाई में रुकावट आ रही है। इसका असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है। हालांकि इस संकट के बीच एक देश को सबसे ज्यादा फायदा मिल रहा है और वह है रूस।
मार्च में टैक्स से दोगुनी कमाई कर सकता है रूस
मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध की वजह से रूस को तेल कारोबार में बड़ा फायदा मिल रहा है। रिपोर्ट के अनुसार रूस मार्च महीने में कच्चे तेल पर लगने वाले टैक्स से दोगुनी कमाई कर सकता है। तेल उत्पादन पर टैक्स लगाकर रूस इस महीने लगभग 7.43 अरब डॉलर की कमाई कर सकता है।
प्रतिबंधों के बाद भी रूस को मिला बड़ा मौका
रूस पहले से ही यूक्रेन के साथ युद्ध को लेकर अमेरिका और कई पश्चिमी देशों के निशाने पर है। इस कारण रूसी तेल और उसकी कंपनियों पर कई तरह के प्रतिबंध लगाए गए थे, जिससे उसकी आय में काफी गिरावट आई थी। लेकिन अब ईरान युद्ध ने रूस के लिए नए अवसर पैदा कर दिए हैं। मिडिल ईस्ट में सप्लाई रुकने से रूस के तेल की मांग तेजी से बढ़ गई है।
होर्मुज स्ट्रेट बंद होने से रूस को फायदा
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद होने की वजह से मिडिल ईस्ट के कई देश अपना तेल निर्यात नहीं कर पा रहे हैं। इसका फायदा उठाते हुए रूस ने तेल उत्पादन बढ़ा दिया है और भारत जैसे देशों को ज्यादा तेल सप्लाई कर रहा है। मांग बढ़ने के कारण रूस का निर्यात भी तेजी से बढ़ा है।
तेल उत्पादन पर टैक्स से भारी आय
समाचार एजेंसी Reuters की रिपोर्ट के मुताबिक रूस कच्चे तेल उत्पादन पर खनिज निष्कर्षण कर (Mineral Extraction Tax) लगाता है। रॉयटर्स के अनुमान के अनुसार अगर तेल की कीमतें इसी स्तर पर बनी रहती हैं तो इस महीने रूस को तेल उत्पादन टैक्स से लगभग 590 अरब रूबल (करीब 7.43 अरब डॉलर) की आय हो सकती है। पिछले महीने रूस को करीब 300 अरब रूबल की कमाई हुई थी। जनवरी में यह आंकड़ा लगभग 314 अरब रूबल था। एक डॉलर की कीमत लगभग 79.3955 रूबल के बराबर बताई गई है।
ब्रेंट क्रूड की कीमत 119 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर
वैश्विक कच्चा तेल बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड की कीमत सोमवार को एक सत्र में 119 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई, जो जून 2022 के बाद सबसे ऊंचा स्तर है। सऊदी अरब समेत कई तेल उत्पादक देशों ने सप्लाई में रुकावट के कारण उत्पादन कम कर दिया है, जिससे कीमतों में तेजी आई है। रूस दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा तेल निर्यातक है और उसके सरकारी बजट की आय का लगभग एक-चौथाई हिस्सा तेल और प्राकृतिक गैस से आता है।
गुरुवार को फिर बढ़ीं तेल कीमतें
गुरुवार को भी कच्चे तेल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी देखने को मिली। इसकी वजह यह है कि ईरान ने मिडिल ईस्ट में तेल और शिपिंग से जुड़ी सुविधाओं पर हमले तेज कर दिए हैं। इससे युद्ध लंबा चलने और सप्लाई और बाधित होने की आशंका बढ़ गई है।
-
Brent Crude के वायदा भाव 6.41 डॉलर (करीब 7%) बढ़कर 98.45 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गए
-
कारोबार के दौरान यह 100 डॉलर प्रति बैरल तक भी गया
-
वहीं West Texas Intermediate (WTI) कच्चा तेल 5.98 डॉलर (करीब 6.85%) बढ़कर 93.23 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर मिडिल ईस्ट में तनाव लंबे समय तक जारी रहता है तो तेल की कीमतें और बढ़ सकती हैं, जिसका असर दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा।