Edited By ,Updated: 25 Jul, 2026 03:31 AM

महाराष्ट्र में राजनीतिक गतिविधियां तेज हैं क्योंकि शिवसेना (यू.बी.टी.) प्रमुख उद्धव ठाकरे और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) अध्यक्ष राज ठाकरे ने 26 जुलाई को एक संयुक्त मार्च निकालने की घोषणा की है, ताकि कॉकरोच जनता पार्टी (सी.जे.पी.) के विरोध...
महाराष्ट्र में राजनीतिक गतिविधियां तेज हैं क्योंकि शिवसेना (यू.बी.टी.) प्रमुख उद्धव ठाकरे और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) अध्यक्ष राज ठाकरे ने 26 जुलाई को एक संयुक्त मार्च निकालने की घोषणा की है, ताकि कॉकरोच जनता पार्टी (सी.जे.पी.) के विरोध मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों पर कथित पुलिस कार्रवाई और नीट पेपर लीक विवाद को लेकर छात्रों और उनके अभिभावकों की चिंताओं को उजागर किया जा सके।
एक संयुक्त संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए, ठाकरे चचेरे भाइयों ने कहा कि मार्च शिवाजी पार्क से शुरू होकर सिद्धिविनायक मंदिर पर समाप्त होगा। उन्होंने बताया कि प्रतिभागी केवल राष्ट्रीय तिरंगा लेकर चलेंगे और छात्रों, अभिभावकों और सभी राजनीतिक विचारधाराओं के नागरिकों से रैली में शामिल होकर अपनी उपस्थिति दर्ज कराने की अपील की है। उद्धव ठाकरे ने आरोप लगाया कि केंद्र ने छात्रों के साथ बातचीत करने से इंकार करके आंदोलन को बढऩे दिया और दिल्ली में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कथित पुलिस कार्रवाई की आलोचना की।
पूरा ‘इंडिया’ छात्रों के साथ : राहुल : विपक्ष का विरोध परीक्षा पेपर लीक को लेकर तेज हो गया है, क्योंकि विपक्ष के नेता राहुल गांधी के नेतृत्व में इंडिया ब्लॉक के सांसदों ने गांधी स्मृति में प्रदर्शन किया और पेपर लीक के कारण आत्महत्या करने वाले छात्रों को श्रद्धांजलि दी। राहुल गांधी को उनकी प्रतिष्ठित सफेद टी-शर्ट में राष्ट्रीय ध्वज और संविधान पकड़े हुए देखा गया जबकि अन्य सांसद विरोध के प्रतीक के रूप में अपने मोबाइल फ्लैश लाइट जलाए और पेपर लीक तथा शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग वाली तख्तियां लिए हुए थे।
यह कहते हुए कि देश के छात्र अकेले नहीं हैं, राहुल ने कहा कि पूरा इंडिया गठबंधन उनके साथ मजबूती से खड़ा है और उनकी मांगों का समर्थन करता है। यह मार्च नीट परीक्षा में कथित अनियमितताओं और छात्र प्रदर्शनकारियों पर पुलिस कार्रवाई को लेकर केंद्र और विपक्षी दलों के बीच चल रहे बड़े राजनीतिक टकराव के बीच आया है, एक ऐसा मुद्दा जिसने चल रहे मानसून सत्र के दौरान बार-बार संसद को बाधित किया है।
डिम्पल एक राजनेता के रूप मेें उभर रही : समाजवादी पार्टी (सपा) की लोकसभा सदस्य और पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव की पत्नी डिंपल यादव का दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी के विरोध प्रदर्शन के दौरान आक्रामकता के साथ-साथ करुणा और साहस का प्रदर्शन यह दर्शाता है कि वह वास्तव में एक राजनेता के रूप में उभर रही हैं। सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो में डिंपल को पुलिस बैरिकेड्स पर चढऩे की कोशिश करते हुए और घायल छात्रों की मदद करते हुए दिखाया गया है, साथ ही संसद तक विरोध मार्च के दौरान पुलिस कार्रवाई के दृश्य भी हैं, जिसमें केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की गई है।
वीडियो में डिम्पल को अपने एक पार्टी समर्थक से सड़क पर पड़े एक घायल युवक के लिए पानी लाने के लिए कहते हुए देखा गया और उन्होंने युवक की शर्ट का एक बटन खोलकर उसकी मदद की ताकि उसे सांस लेने में आसानी हो। 16 जुलाई को, वह समाजवादी पार्टी के प्रतिनिधिमंडल के हिस्से के रूप में जंतर-मंतर पर जलवायु कार्यकत्र्ता सोनम वांगचुक से मिलने के लिए लखनऊ से दिल्ली आईं, जहां उन्होंने प्रदर्शनकारी छात्रों के साथ एकजुटता व्यक्त की थी। जंतर-मंतर पर डिंपल की मुखर उपस्थिति अब यह दर्शाती है कि समाजवादी पार्टी उन्हें एक बड़ी संगठनात्मक भूमिका के लिए तैयार कर रही है।
शरद पवार और सुले ने प्रधानमंत्री से की मुलाकात : नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी (शरद) के भाजपा के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के साथ संबंधों को लेकर बार-बार अटकलों के बीच, पार्टी प्रमुख शरद पवार और उनकी बेटी एवं सांसद सुप्रिया सुले ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की और महाराष्ट्र के कृषि संकट को उजागर करने वाला एक ज्ञापन सौंपा। यह बैठक संसद में परिसीमन विधेयक के लिए दो-तिहाई समर्थन जुटाने के सरकार के प्रयासों की पृष्ठभूमि में हुई है, जिसे केंद्र सरकार मौजूदा मानसून सत्र में फिर से लाने की योजना बना रही है। राकांपा (शरद) के आठ सांसद सरकार की संसद रणनीति के लिए महत्वपूर्ण हैं।
राकांपा ने पहले संकेत दिया था कि यदि सरकार सभी स्तरों पर 50 प्रतिशत सीट वृद्धि का लिखित आश्वासन दे तो वह विधेयक का समर्थन कर सकती है। पवार और सुले दोनों ने पहले जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों के साथ भाग लिया था जहां कॉकरोच जनता पार्टी (सी.जे.पी.) नीट-यूजी पेपर लीक के खिलाफ अपना विरोध जारी रखे हुए है। पार्टी ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग का समर्थन किया है। पवार ने केंद्र से मांगों पर संवेदनशीलता से विचार करने और आवश्यक कार्रवाई करने का आग्रह किया। न तो प्रधानमंत्री कार्यालय और न ही राकांपा (शरद) ने बैठक के दौरान किसी राजनीतिक चर्चा पर आधिकारिक टिप्पणी की। पार्टी ने कहा कि बैठक का प्राथमिक उद्देश्य किसानों को प्रभावित करने वाले मुद्दों को उठाना और चल रहे छात्र विरोध से संबंधित चिंताओं पर चर्चा करना था।-राहिल नोरा चोपड़ा