भारतीय जनता पार्टी का स्थापना दिवस : एक आंदोलन की गाथा, एक राष्ट्र का संकल्प

Edited By Updated: 06 Apr, 2026 04:10 AM

bharatiya janata party foundation day

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) केवल एक राजनीतिक दल नहीं, यह उस विचार की जीवंत अभिव्यक्ति है जो सदियों से इस देश की आत्मा में बसा है-राष्ट्र सर्वोपरि है, अंत्योदय हमारा धर्म है और सांस्कृतिक राष्ट्रवाद हमारी पहचान है। जब 6 अप्रैल, 1980 को भारतीय जनता...

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) केवल एक राजनीतिक दल नहीं, यह उस विचार की जीवंत अभिव्यक्ति है जो सदियों से इस देश की आत्मा में बसा है-राष्ट्र सर्वोपरि है, अंत्योदय हमारा धर्म है और सांस्कृतिक राष्ट्रवाद हमारी पहचान है। जब 6 अप्रैल, 1980 को भारतीय जनता पार्टी की स्थापना हुई, तो यह केवल एक नए राजनीतिक संगठन का जन्म नहीं था, यह उन करोड़ों भारतीयों की आकांक्षाओं का संगठन था, जो चाहते थे कि इस देश की राजनीति में ईमानदारी हो, विचार हो और राष्ट्र के प्रति समर्पण हो। आज जब हम अपना स्थापना दिवस मना रहे हैं, तो यह अवसर केवल उत्सव का नहीं, बल्कि उस यात्रा के स्मरण और उस संकल्प के नवीनीकरण का है, जिसने भाजपा को विश्व का सबसे बड़ा राजनीतिक दल बनाया। भाजपा की वैचारिक जड़ें उस मिट्टी में हैं, जिसे पं. दीनदयाल उपाध्याय ने एकात्म मानव दर्शन के रूप में सींचा। दीनदयाल जी ने यह स्पष्ट किया था कि भारत की राजनीति का केंद्र ङ्क्षबदू वह अंतिम व्यक्ति होना चाहिए, जो समाज की सबसे निचली पायदान पर खड़ा है। अंत्योदय की यह परिकल्पना भाजपा के लिए कोई चुनावी नारा नहीं, बल्कि एक जीवन-दर्शन है।

डा. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने जनसंघ की स्थापना से लेकर कश्मीर के लिए अपने प्राणों की आहुति देने तक, यह सिद्ध किया कि राष्ट्रीयता का अर्थ केवल वोट की राजनीति नहीं, बल्कि मातृभूमि के लिए सर्वस्व न्यौछावर करने की तत्परता है। अटल बिहारी वाजपेयी जी ने इस विचार को जन-जन तक पहुंचाया। उनकी वाणी में कविता थी, उनके कार्य में दृष्टि थी और उनके नेतृत्व में भारत को एक परमाणु शक्ति के रूप में विश्वपटल पर स्थापित करने का साहस था। लाल कृष्ण अडवानी जी ने रथयात्रा निकाली तो सिर्फ मंदिर आंदोलन नहीं जगाया, उन्होंने उस समाज को जगाया, जो दशकों से अपनी ही भूमि पर उपेक्षित था।

1984 में देश में सहानुभूति की लहर में भाजपा को केवल 2 सीटें मिलीं, तो कई लोगों ने इस दल को इतिहास की धूल में दफन समझ लिया था। लेकिन उस पराजय ने भाजपा के कार्यकत्र्ताओं को तोड़ा नहीं, बल्कि और मजबूत किया। बूथ से लेकर राष्ट्र तक संगठन की नींव रखी गई, कार्यकत्र्ताओं ने मेहनत की पराकाष्ठा की और फिर वह दिन आया, 2014, जब नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में भाजपा ने 282 सीटें जीतीं, 3 दशक बाद देश में पूर्ण बहुमत की सरकार बनाई और भारत की राजनीति का कायाकल्प हो गया। 2019 में 303 सीटों के साथ यह सिद्ध हो गया कि यह लहर नहीं, जनता का स्थायी विश्वास है। 2024 में एन.डी.ए. के साथ तीसरी बार सत्ता में आना यह प्रमाण है कि भारत की जनता ने भाजपा को अपनी नियति के साथ जोड़ लिया है। आज भाजपा 15 करोड़ से अधिक सदस्यों के साथ विश्व का सबसे बड़ा राजनीतिक दल है। 

मोदी जी ने एक नई शासन संस्कृति की नींव रखी, न तुष्टीकरण, न परिवारवाद, न भ्रष्टाचार। उनका मंत्र था-सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास। पिछले 12 वर्षों में जो काम हुआ है, वह भारत के इतिहास में स्वर्णाक्षरों में लिखा जाएगा। 500 वर्षों की प्रतीक्षा का अंत हुआ। 22 जनवरी, 2024 को अयोध्या में श्री राम लला की प्राण प्रतिष्ठा हुई और करोड़ों हिंदुओं की आंखें छलक उठीं। एक और काम जो दशकों से लंबित था, माननीय अमित शाह जी की दृढ़ इच्छाशक्ति और माननीय मोदी जी के नेतृत्व में 5 अगस्त, 2019 को संसद में एक ऐतिहासिक निर्णय हुआ। जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न अंग संवैधानिक रूप से भी बना। अलगाववाद की जड़ें काट दी गईं। वह कानून जो पुरुष की तीन बोलियों पर एक मुस्लिम महिला का जीवन बर्बाद कर देता था, मोदी सरकार ने उस ट्रिपल तलाक को समाप्त किया। यही असली महिला सशक्तिकरण है। आयुष्मान भारत ने 50 करोड़ गरीबों को 5 लाख रुपए तक का स्वास्थ्य बीमा दिया। उज्ज्वला योजना से 10 करोड़ माताओं के चूल्हे गैस से जले। जल जीवन मिशन ने भारत के 15 करोड़ घरों में नल से जल पहुंचाया। पी.एम. आवास योजना से करोड़ों परिवारों को पक्की छत मिली। पी.एम. किसान सम्मान निधि से किसानों के खाते में सीधे पैसे पहुंचे। 80 करोड़ भारतीयों को भोजन, यह है अंत्योदय का व्यावहारिक स्वरूप। डिजिटल अर्थव्यवस्था में यू.पी.आई. एक वैश्विक मॉडल बन चुका है। रक्षा निर्यात में भारत नई ऊंचाइयां छू रहा है। चंद्रयान-3 की सफलता ने दुनिया को दिखाया कि नए भारत का सामथ्र्य असीमित है।

पंजाब की बात करें तो हृदय भारी हो जाता है। गुरुओं और शहीदों की यह पवित्र भूमि आज जिस दर्द से गुजर रही है, उसे देखकर हर देशभक्त का सिर झुक जाता है। आम आदमी पार्टी ने पंजाब की जनता से बड़े-बड़े वादे किए थे। दिल्ली मॉडल की बात की थी लेकिन आज पंजाब की सच्चाई क्या है? गैंगस्टर बेखौफ हैं, नशे की लत युवाओं को खोखला कर रही है, उद्योग पलायन कर रहे हैं और कानून-व्यवस्था की ऐसी दुर्दशा है कि अपराधी जेलों से वारदातें अंजाम दे रहे हैं। पंजाब का किसान परेशान है, नौजवान बेरोजगार है। पंजाब की मां अपने बेटे को नशे की गिरफ्त से निकालने के लिए तड़प रही है। यह दर्द भाजपा महसूस करती है, क्योंकि भाजपा के लिए पंजाब केवल एक राज्य नहीं, बल्कि बलिदान की वह धरती है, जिसने देश की रक्षा के लिए सबसे अधिक कुर्बानियां दी हैं।

भाजपा का पंजाब में बढ़ता जनाधार इस बात का प्रमाण है कि वहां की जनता परिवर्तन चाहती है, असली परिवर्तन, जो नशामुक्ति, कानून का राज और रोजगार के अवसर लाए। भाजपा यह प्रतिबद्धता लेकर पंजाब की गली-गली में जा रही है। 370 हटने के बाद जम्मू-कश्मीर का कायापलट हो गया है। जहां कभी पत्थरबाजी होती थी, आज वहां स्कूल और अस्पताल बन रहे हैं। पर्यटन नई ऊंचाइयों पर है। युवाओं को केंद्र सरकार की योजनाओं का सीधा लाभ मिल रहा है। अलगाववाद की आवाजें कमजोर पड़ी हैं और लोकतंत्र की जड़ें गहरी हो रही हैं। पश्चिम बंगाल में आज लोकतंत्र घायल है। भाजपा कार्यकत्र्ताओं पर हमले होते हैं, उनके घर जलाए जाते हैं और सत्तारूढ़ दल के गुंडे संवैधानिक संस्थाओं को चुनौती देते हैं। लेकिन भाजपा का कार्यकत्र्ता डरा नहीं, वह अपने बूते पर गुरुदेव रवींद्रनाथ, नेताजी सुभाष चंद्र बोस और श्यामा प्रसाद मुखर्जी की इस धरती पर सत्य और न्याय की लड़ाई लड़ रहा है। भाजपा बंगाल की जनता के साथ खड़ी है और रहेगी।

केरल में भाजपा अब एक गंभीर राजनीतिक शक्ति के रूप में उभर रही है। वहां की जनता वामपंथी और कांग्रेसी विफलताओं से थक चुकी है। भाजपा की सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की विचारधारा और मोदी सरकार की योजनाओं का लाभ अब केरल के मतदाताओं तक भी पहुंच रहा है। त्रिशूर लोकसभा सीट की जीत इस बदलाव की पहली झलक है। भाजपा और अन्य दलों में जो सबसे बड़ा अंतर है, वह है शासन का दर्शन। कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों ने दशकों तक वोट बैंक की राजनीति की। जाति, धर्म और भाषा के नाम पर समाज को बांटा। अल्पसंख्यकों को सशक्त नहीं किया, उन्हें वोटों की भेड़ बनाकर रखा। मोदी जी का रास्ता अलग है। उनके लिए हर गरीब समान है, चाहे वह ङ्क्षहदू हो, मुसलमान, सिख या ईसाई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने विकसित भारत का जो स्वप्न देखा है, वह किसी एक नेता या एक दल का स्वप्न नहीं, 140 करोड़ भारतीयों का सामूहिक संकल्प है।

अगले दो दशकों में भारत को विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनाना है। रक्षा में आत्मनिर्भरता प्राप्त करनी है। हर गांव में बिजली, पानी और सड़क पहुंचानी है। हर युवा को शिक्षा और रोजगार देना है। यह केवल घोषणा नहीं, यह भाजपा का प्रतिबद्धता पत्र है। आज, स्थापना दिवस पर, हम उन सभी कार्यकत्र्ताओं को नमन करते हैं, जिन्होंने 1984 की पराजय में भी मशाल बुझने नहीं दी। जिन्होंने बंगाल में लाठियां खाईं, जिन्होंने केरल में हमले सहे लेकिन राष्ट्र के प्रति अपनी निष्ठा नहीं छोड़ी। भारतीय जनता पार्टी एक दल नहीं, एक आंदोलन, एक विचार, एक यज्ञ है, जिसमें हर कार्यकत्र्ता एक आहुति है और जिसकी लौ से विकसित भारत का निर्माण होना है।-तरुण चुघ(राष्ट्रीय मंत्री, भारतीय जनता पार्टी) 
 

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