बिजली खोजी नहीं गई, पहले से मौजूद थी

Edited By Updated: 02 Feb, 2023 05:08 AM

electricity was not discovered was already present

यदि बिजली न होती तो कल्पना कीजिए संसार में किसी भी क्षेत्र में विकास संभव नहीं था। बिजली से मानव जीवन ही सुविधाजनक नहीं हुआ बल्कि समाज के विभिन्न क्षेत्रों में क्रांतिकारी उपलब्धियां भी संभव हुईं।

यदि बिजली न होती तो कल्पना कीजिए संसार में किसी भी क्षेत्र में विकास संभव नहीं था। बिजली से मानव जीवन ही सुविधाजनक नहीं हुआ बल्कि समाज के विभिन्न क्षेत्रों में क्रांतिकारी उपलब्धियां भी संभव हुईं। बिजली उपभोक्ताओं तथा नागरिकों को बिजली का महत्व तब ही महसूस होता है जब उनको बिजली के बिना सुविधाजनक जीवन भी एक पल में ही कठिन लगने लगता है। सामान्य बिजली उपभोक्ता बिजली प्रणाली की पैदावार, ट्रांसमिशन तथा वितरण के पेचीदा पड़ावों से बिल्कुल अंजान है। इसका एक कारण यह भी है कि भारत में बिजली की प्रणाली में स्वतंत्रता के बाद बहुत तेजी से प्रसार तथा सुधार हुए हैं। 

दिलचस्प बात यह है कि बिजली मानवीय कोशिशों की उपज नहीं है, यह किसी द्वारा खोजी नहीं गई थी। यह हमेशा मौजूद थी, जैसे हवा, पानी तथा अन्य सभी प्राकृतिक स्रोतों की तरह। जब बारिश पड़ती है तो आसमान में बिजली की चमक दिखाई देती है। स्थिर बिजली के एक रूट के अतिरिक्त कुछ भी नहीं। बिजली के इतिहास बारे जानना तथा बिजली की विश्व को देन का अंदाजा समाज में हुई तरक्की तथा आधुनिक टैक्नोलॉजी में आए क्रांतिकारी बदलावों से लगाया जा सकता है।

दस्तावेजों के अनुसार वैज्ञानिक बैंजामिन फ्रैंकलिन को 1700 के दशक में अपने पतंग प्रयोग से बिजली की खोज करने का श्रेय दिया जाता है, जिसमें उसने एक तूफान के दौरान एक धातु की चाबी के साथ एक पतंग उड़ाई थी। 19वीं शताब्दी के अंत में विक्टोरियन काल के अंत के नजदीक लोगों के घरों में पहली बार बिजली की आपूॢत शुरू हुई थी। विश्व की पहली इलैक्ट्रिक स्ट्रीट लाइटें लंदन में 1878 में स्थापित की गई थीं। संयुक्त राज्य अमरीका पहला देश था जिसने बिजली का व्यापारिक उत्पादन किया था और इसके बाद 1888 में यूनाइटेड किंगडम (ब्रिटेन) और फिर अन्य यूरोपियन देशों ने एलीपावर का इस्तेमाल किया था। 

भारत में लगभग 124 वर्ष पूर्व वर्ष 1899 में किलबर्न एंड कंपनी द्वारा पहली बार व्यापारिक तौर पर बिजली का उत्पादन किया गया था जोकि बाद में कलकत्ता इलैक्ट्रिक सप्लाई कार्पोरेशन लिमिटेड (सी.ई.एस.सी.) के तौर पर जानी जाने लगी। यह एक डी.सी. पावर थी जिसका 31 यूनिट खर्च 1 रुपया था। अब पंजाब स्टेट पावर कार्पोरेशन लिमिटेड, जो पहले पंजाब स्टेट इलैक्ट्रिसिटी बोर्ड था, जोकि 1 फरवरी 1959 को अस्तित्व में आया था, को 31 जनवरी 2023 को 64 वर्ष पूरे हो गए हैं तथा पंजाब स्टेट पावर कार्पोरेशन लिमिटेड 65वें वर्ष में पंजाब को जगमगा रहा है।-मनमोहन सिंह(अधीन सचिव, लोक सम्पर्क पी.एस.पी.सी.एल.)     

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