Edited By ,Updated: 24 Sep, 2026 04:43 AM

पंजाब एक गौरवान्वित सीमावर्ती राज्य है, जो पाकिस्तान के साथ लगभग 550 किलोमीटर की अंतर्राष्ट्रीय सीमा सांझा करता है। इसकी भौगोलिक स्थिति ने इसे हमेशा एक विशेष सुरक्षा जिम्मेदारी दी है। विभाजन के बाद से, सीमा पार से तस्करी एक चुनौती बनी हुई है, और...
पंजाब एक गौरवान्वित सीमावर्ती राज्य है, जो पाकिस्तान के साथ लगभग 550 किलोमीटर की अंतर्राष्ट्रीय सीमा सांझा करता है। इसकी भौगोलिक स्थिति ने इसे हमेशा एक विशेष सुरक्षा जिम्मेदारी दी है। विभाजन के बाद से, सीमा पार से तस्करी एक चुनौती बनी हुई है, और दशकों में इस खतरे का स्वरूप बदला है। जो कभी हथियारों और अन्य प्रतिबंधित वस्तुओं की तस्करी से जुड़ा था, वह धीरे-धीरे नशीले पदार्थों से जुड़ता चला गया। इस समस्या की गंभीरता को दो दशक से भी अधिक समय पहले ही पहचाना जाने लगा था। पंजाब आईपीएस ऑफिसर्स एसोसिएशन के एक सैमिनार से संबंधित 2003 की एक रिपोर्ट में तत्कालीन मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के हवाले से नशीले पदार्थों के सेवन के प्रसार पर चिंता व्यक्त की गई थी।
रिपोर्ट में लुधियाना में हुए एक अध्ययन का भी उल्लेख किया गया था जिसमें सर्वेक्षण में शामिल 67 प्रतिशत लड़कों और 52 प्रतिशत लड़कियों द्वारा नशीली दवाओं का सेवन करने की बात कही गई थी। वही अवधि तरनतारन के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के रूप में मेरे अपने अनुभव का एक महत्वपूर्ण हिस्सा प्रदान करती है। नवंबर 1997 में, एक अपेक्षित खेप के संबंध में खुफिया जानकारी मिलने के बाद, तरनतारन पुलिस ने 83.6 किलोग्राम हैरोइन जब्त की थी। तत्कालीन समाचार पत्र की रिपोर्ट में इसे उस समय जिला पुलिस द्वारा की गई अब तक की सबसे बड़ी हैरोइन जब्ती बताया गया था। रिपोर्ट में मेरे कार्यकाल के दौरान की गई अन्य प्रमुख जब्तियों का भी उल्लेख किया गया था, जिनमें 36 किलोग्राम हैरोइन और नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो के साथ एक संयुक्त अभियान में 55 किलोग्राम हैरोइन और 22 किलोग्राम अफीम शामिल थी।
रिपोर्ट में कहा गया था कि इस बड़ी जब्ती के तुरंत बाद मेरा स्थानांतरण तरनतारन से कर दिया गया था और स्थानांतरण के कारण नहीं बताए गए थे। इसमें यह भी कहा गया था कि प्रमुख मामलों में सजा होने के बावजूद पुलिस टीम को कुछ पुरस्कार नहीं मिले थे। पंजाब सरकार ने अपने वर्तमान ड्रग-विरोधी अभियान के तहत प्रवर्तन के बहुत बड़े आंकड़े दिए हैं। सितंबर 2026 में रिपोर्ट किए गए आंकड़ों के अनुसार, मार्च 2025 से सितंबर 2026 के बीच, एनडीपीएस एक्ट के तहत 61,824 एफआईआर दर्ज की गईं और 81,433 लोगों को गिरफ्तार किया गया, जिसमें रिपोर्ट की गई जब्तियों में 3,918 कि.ग्रा. हैरोइन, 991 किग्रा अफीम, 47 टन पोस्त छिलका 1,416 कि.ग्रा. गांजा और 65 लाख गोलियां एवं कैप्सूल शामिल हैं।
ये आंकड़े कार्रवाई के पैमाने को दर्शाते हैं। लेकिन केवल गिरफ्तारियां ही सफलता का अंतिम पैमाना नहीं हो सकतीं। असली परीक्षा यह है कि क्या मास्टरमाइंड (किंगपिन), फाइनैंसर, सप्लायर, ट्रांसपोर्टर, मनी लॉन्ड्रर और उनके संरक्षकों की पहचान कर उन पर मुकद्दमा चलाया जाता है, क्या उनकी संपत्तियों और अपराध की कमाई को उचित कानूनी प्रक्रिया के माध्यम से जब्त किया जाता है, क्या सजा न्यायिक जांच में टिक पाती है और क्या वास्तव में ड्रग्स की आपूर्ति कम होती है।
भारत सरकार ने अब नशीले पदार्थों के खिलाफ लड़ाई को एक व्यापक राष्ट्रीय ढांचे के भीतर रखा है। ‘ड्रग.फ्री इंडिया 2029’ (नशामुक्त भारत 2029) रोडमैप के तहत, केंद्र ने 272 संवेदनशील जिलों की पहचान की है, जिनमें से 73 को अति-संवेदनशील के रूप में वर्गीकृत किया गया है। पंजाब के छह जिलों, अमृतसर, गुरदासपुर, तरनतारन, फिरोजपुर, फाजिल्का और लुधियाना को अति-संवेदनशील श्रेणी में रखा गया है। राष्ट्रीय योजना में प्रमुख ड्रग नैटवर्कों को ध्वस्त करना, भगौड़ों को भारत वापस लाना, वित्तीय जांच को मजबूत करना, सीमा निगरानी में सुधार करना और नशामुक्तिकरण सुविधाओं का विस्तार करना शामिल है। पंजाब को इस समन्वित दृष्टिकोण की आवश्यकता है। पहला, आपूर्ति शृंखला पर शीर्ष स्तर से हमला किया जाना चाहिए। हर बड़ी जब्ती के बाद वित्तीय जांच होनी चाहिए। पुलिस और केंद्रीय एजैंसियों को स्रोत, ट्रांसपोर्टर, फाइनैंसर, वितरक और लाभार्थियों की पहचान करनी चाहिए। दूसरा, अंतर्राष्ट्रीय सीमा को निरंतर तकनीकी मजबूती मिलनी चाहिए। ड्रोन ने सीमा पार तस्करी का रूप बदल दिया है। बीएसएफ, पंजाब पुलिस, एनसीबी, ईडी और अन्य एजैंसियों के बीच एंटी-ड्रग ड्रोन तकनीक, निगरानी प्रणाली, खुफिया जानकारी साझा करने और समन्वय को मजबूत किया जाना चाहिए।
तीसरा, व्यवस्था को ईमानदार अधिकारियों की रक्षा करनी चाहिए और भ्रष्टाचार के खिलाफ दृढ़ता से कार्य करना चाहिए। यदि कोई पुलिस अधिकारी या लोक सेवक, उचित जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद, ड्रग तस्करों की सहायता करते हुए पाया जाता है, तो पद या प्रभाव की परवाह किए बिना कानून लागू होना चाहिए। चौथा, रोकथाम की शुरूआत स्कूलों, कॉलेजों और गांवों से होनी चाहिए। माता-पिता, शिक्षकों, धार्मिक संस्थाओं, खेल संगठनों और सामुदायिक नेताओं को इस अभियान में भागीदार बनना होगा। पांचवां, नशे की लत को स्वास्थ्य और पारिवारिक संकट के रूप में देखा जाना चाहिए। नशे से मुनाफा कमाने वाले तस्कर और नशे के जाल में फंसे युवा के साथ बिल्कुल एक जैसा व्यवहार नहीं किया जा सकता। भारतीय जनता पार्टी ने अब इस मुद्दे पर स्पष्ट राजनीतिक प्रतिबद्धता जताई है। सितंबर 2026 में, पंजाब भाजपा ने राज्य के सभी 117 विधानसभा क्षेत्रों को कवर करने वाली अपनी राज्यव्यापी ‘नशा मुक्त पंजाब यात्राओं’ की घोषणा की और सरकार बनाने के दो वर्षों के भीतर पंजाब से नशे की समस्या को जड़ से खत्म करने का सार्वजनिक संकल्प लिया है।-इकबाल सिंह लालपुरा पूर्व चेयरमैन, राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग, भारत सरकार