Edited By ,Updated: 21 Jul, 2026 05:10 AM

कनाडा, जो अब तक भारतीय छात्रों के लिए सबसे पसंदीदा गंतव्य रहा है, द्वारा अंतर्राष्ट्रीय छात्रों को जारी किए जाने वाले अध्ययन परमिटों की संख्या में भारी कमी करने के फैसले से भारतीय छात्रों को सबसे ज्यादा नुकसान होता दिख रहा है।
कनाडा, जो अब तक भारतीय छात्रों के लिए सबसे पसंदीदा गंतव्य रहा है, द्वारा अंतर्राष्ट्रीय छात्रों को जारी किए जाने वाले अध्ययन परमिटों की संख्या में भारी कमी करने के फैसले से भारतीय छात्रों को सबसे ज्यादा नुकसान होता दिख रहा है। अप्रैल 2026 के लिए उपलब्ध नवीनतम आंकड़ों से पता चलता है कि भारतीय छात्रों को जारी किए गए नए अध्ययन परमिटों और नवीनीकरणों की संख्या में पिछले अप्रैल की तुलना में 16 प्रतिशत की गिरावट आई है, जो स्वयं अप्रैल 2024 की तुलना में 84 प्रतिशत की उल्लेखनीय गिरावट है। यह एक संकेत है कि उत्तरी अमरीकी देश में भारतीय छात्रों के लिए अवसर और भी कम हो सकते हैं। 2025 तक, विदेशों में अध्ययन कर रहे लगभग 12.54 लाख भारतीय छात्रों में से लगभग 34 प्रतिशत या एक-तिहाई छात्र कनाडा में थे, जो अमरीका, ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया जैसे अन्य प्रमुख गंतव्यों से आगे निकल गया।
कनाडा की 2026-2028 आव्रजन स्तर योजना (आई.एल.पी.) के तहत विदेशी छात्रों के लिए नए परमिट जारी करने की वाॢषक सीमा को 2025-2027 की आई.एल.पी. की तुलना में 50 प्रतिशत तक कम कर दिया गया है, इसलिए आने वाले वर्षों में इस हिस्सेदारी में भारी गिरावट आने की संभावना है। इसका असर सबसे पहले 2025 में देखने को मिला, जब अप्रैल 2025 में भारतीयों को जारी किए गए छात्र परमिटों की संख्या घटकर मात्र 6,895 रह गई, जो अप्रैल 2024 में जारी किए गए 36,510 परमिटों से 81 प्रतिशत कम थी। इस वर्ष यह संख्या और घटकर 5,795 हो गई है, जिनमें से कई नवीनीकरण हो सकते हैं। नए परमिटों और नवीनीकरणों के अलग-अलग आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं। कनाडा न केवल भारतीय छात्रों के लिए सबसे पसंदीदा गंतव्य था, बल्कि देश में अध्ययन करने वाले विदेशी नागरिकों में भारतीयों का हिस्सा सबसे बड़ा था। 2015 में कनाडा में कुल अंतर्राष्ट्रीय छात्रों में भारतीयों की हिस्सेदारी मात्र 14.6 प्रतिशत थी लेकिन 2018 में वे चीनियों को पीछे छोड़ते हुए देश में सबसे बड़ा छात्र आप्रवासन समूह बन गए।
2015 से लगातार वृद्धि के बाद 2022 में 41.2 प्रतिशत के शिखर पर पहुंचने का यह रुझान अब तेजी से उलट रहा है। एक ही वर्ष में, हिस्सेदारी में 12 प्रतिशत अंकों की तीव्र गिरावट आई है, जो 2024 में 36.6 प्रतिशत से घटकर 2025 में 24.6 प्रतिशत हो गई, जो 2016 के बाद से सबसे कम है। कनाडा द्वारा आप्रवासन को स्थायी स्तर पर वापस लाने के प्रयास में, जैसा कि उसके 2026-2028 आई.एल.पी. में कहा गया है, बहुत कम छात्रों को अनुमति देने के फैसले से केवल भारतीय छात्र ही प्रभावित नहीं हो रहे हैं। देश में छात्र परमिट धारकों की संख्या 2015 में लगभग 2.2 लाख से बढ़कर 2023 में 6.8 लाख हो गई थी, जो कि 3 गुणा वृद्धि थी लेकिन 2025 में यह आंकड़ा 44 प्रतिशत घटकर 3.8 लाख रह गया है। हालांकि अन्य देशों के छात्रों पर भी इसका असर पड़ा है लेकिन सबसे ज्यादा प्रभाव भारतीयों पर ही महसूस किया जा रहा है। जहां सभी देशों के छात्रों की कुल संख्या में 44 प्रतिशत की गिरावट आई, वहीं भारतीय छात्रों की संख्या में 66 प्रतिशत की गिरावट आई, जो 2023 में 2.78 लाख से घटकर 2025 में 93,915 रह गई।
इसके अलावा, पिछले साल नवम्बर में प्रकाशित रॉयटर्स की एक रिपोर्ट में कनाडा के आव्रजन विभाग के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा गया था कि अगस्त 2025 में कनाडा में अध्ययन परमिट के लिए भारतीय आवेदनों में से लगभग 74 प्रतिशत आवेदन खारिज कर दिए गए थे, जबकि अगस्त 2023 में यह आंकड़ा लगभग 32 प्रतिशत था। अगस्त 2025 में समग्र अस्वीकृति दर 40 प्रतिशत थी, जबकि चीनी छात्रों के लिए यह मात्र 24 प्रतिशत थी। विदेश में पढ़ाई करने के इच्छुक भारतीय छात्रों के लिए चिंता की बात यह है कि केवल कनाडा ही नहीं, बल्कि अमरीका, ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया जैसे अन्य लोकप्रिय गंतव्य भी अपनी नीतियों को सख्त कर रहे हैं। उदाहरण के लिए, 2023-24 की तुलना में 2024-25 में ब्रिटेन में प्रवेश करने वाले भारतीय छात्रों की संख्या में 13 प्रतिशत की गिरावट आई। इस साल की शुरुआत में, ऑस्ट्रेलिया के गृह मंत्रालय ने भारत से छात्र वीजा आवेदनों के लिए एक चेतावनी जारी की थी, जिसके तहत भारतीय छात्रों को साक्ष्य स्तर 2 से साक्ष्य स्तर 3 या ‘उच्चतम जोखिम’ श्रेणी में रखा गया था।-सांबवी पार्थसारथी