बुजुर्गों के लिए केरलम् की अच्छी पहल

Edited By Updated: 20 Oct, 2026 05:12 AM

kerala s good initiative for the elderly

केरलम्  में बुजुर्गों की संख्या 67 लाख, 68 हजार है। यह वहां की कुल आबादी का  लगभग 19 प्रतिशत बैठती है। बताते हैं कि फिलहाल केरलम् में बुजुर्गों की आबादी तेजी से बढ़ रही है। हर 5 में से 1 व्यक्ति बुजुर्ग यानी कि 60 साल से ऊपर है। 2036 तक इसके 10...

केरलम् में बुजुर्गों की संख्या 67 लाख, 68 हजार है। यह वहां की कुल आबादी का  लगभग 19 प्रतिशत बैठती है। बताते हैं कि फिलहाल केरलम् में बुजुर्गों की आबादी तेजी से बढ़ रही है। हर 5 में से 1 व्यक्ति बुजुर्ग यानी कि 60 साल से ऊपर है। 2036 तक इसके 10 प्रतिशत बढ़ जाने की सम्भावना है। 

2022 में अपने देश की बुजुर्ग आबादी 15.3 करोड़ थी, कुल आबादी का 10.5 प्रतिशत। उन्फा की एक रिपोर्ट  के अनुसार यह आबादी 2047 तक दोगुनी से भी अधिक हो जाएगी। बुजुर्गों की बढ़ती आबादी का कारण चिकित्सा सुविधाओं का विकास,  इन सुविधाओं तक समय रहते पहुंच और बढ़ी हुई जागरूकता भी है। लेकिन यह भी सच है कि इन दिनों की महंगी चिकित्सा कराने के लिए पैसा बहुतों के पास नहीं है। वे पूरी तरह से सरकारी संसाधनों पर ही निर्भर हैं। आयुष्मान कार्ड जैसी सुविधाओं ने 70 साल से ऊपर के  बुजुर्गों को राहत दी है लेकिन बहुत से अस्पताल कोई न कोई बहाना बनाकर इन कार्ड्स को लेने से मना कर देते हैं।

आंकड़े बताते हैं कि बड़ी संख्या में बुजुर्गों की आबादी गांवों में रहती है। यहां उनके लिए चिकित्सा सुविधाएं अपर्याप्त होती हैं। इतनी जागरूकता भी नहीं होती। उम्र के साथ, चाहे ग्रामीण बुजुर्ग हैं या शहरी, इन्हें तरह-तरह की गम्भीर बीमारियों का सामना भी  करना पड़ता है। परिवारों के दूर चले जाने, बिखरने, जीवनसाथी के न रहने ने इन्हें अकेला किया है। अकेलापन एक गम्भीर समस्या है। इसे संयुक्त राष्ट्र दुनिया की सबसे बड़ी महामारी कह चुका है। 
इसके अलावा बड़ी संख्या में बुजुर्गों के पास कोई आॢथक संसाधन या नियमित आय भी नहीं है, जिससे कि वे रोजमर्रा के अपने जरूरी खर्चे पूरे कर सकें।  बहुतों को बच्चों और परिवार का सहारा भी नहीं। पास में न कोई जमीन-जायदाद है, न पैंशन तो क्या करें, कैसे जीवन चलाएं? ऐसे में यदि बीमार पड़ जाएं, तो इलाज कैसे हो? 

यूं वृद्धों के लिए सरकार की तरफ  से नैशनल प्रोग्राम फॉर हैल्थ केयर आफ एल्डर्ली, अटलवायो अभ्युदय योजना, आयुष्मान कार्ड आदि हैं।  टोल फ्री हैल्पलाइन-एल्डरलाइन भी है। जरूरतमंद वृद्धों के लिए वृद्धाश्रम चलाने हेतु धनराशि देना, चिकित्सीय सहायता के लिए मोबाइल वैन्स, फिजियोथैरेपी, व्हील चेयर, छड़ी आदि देना, जिन बुजुर्गों की कोई आय नहीं है, उनके लिए 1500 रुपए तक की व्यवस्था कराने आदि की भी योजनाएं हैं। लेकिन बहुत से बुजुर्गों को इनके बारे में मालूम नहीं होता। भारत सरकार का बुजुर्गों के लिए, मैंटीनैंस एंड वैल्फेयर आफ पेरैंट्स एंड सीनियर सिटीजन एक्ट भी है। यदि बुजुर्ग माता-पिता खुद भरण-पोषण में समर्थ नहीं हैं तो वे राज्य सरकारों द्वारा बनाए ट्रिब्यूनल्स में अपने बच्चों से मासिक मुआवजे के लिए आवेदन कर सकते हैं। यदि माता-पिता ने अपने  उत्तराधिकारियों के नाम अपनी सम्पत्ति कर दी है लेकिन वे बुजुर्गों की देखभाल नहीं करते, तो ट्रिब्यूनल इस वसीयत को खारिज भी कर सकता है। यदि कोई व्यक्ति, जिसका जिम्मा किसी बुजुर्ग की देखभाल का है और वह जिम्मेदारी नहीं निभा रहा, तो उसे 3 माह की सजा और जुर्माना लगाया जा सकता है।

हाल ही में केरलम् की सरकार ने ‘केरलम् सीनियर सिटीजन बिल 2026’ पास किया है। इस बिल की मुख्य बातें हैं : बुजुर्ग अपने घरों और कम्युनिटी में ही रह सकें। वहां वे आत्मनिर्भर और सुरक्षित हों। घर के सदस्य या बुजुर्गों के उत्तराधिकारी उनकी देखभाल करें। उन्हें किसी वृद्धाश्रम आदि में भेजना अंतिम विकल्प हो। बुजुर्गों के लिए जितनी भी संस्थाएं काम करती हैं, जैसे कि रिटायरमैंट होम्स, वृद्धाश्रम, घरों में उन्हें तरह-तरह की सुविधाएं प्रदान करने वाली संस्थाओं को अनिवार्य रूप से स्टेट सीनियर सिटीजन प्रोटैक्शन यूनिट में रजिस्टर कराना होगा, जिससे कि उनका बैकग्राऊंड चैक किया जा सके। पुलिस वैरीफिकेशन भी अनिवार्य होगा। वृद्धों की देखभाल करने वालों को केरलम् गैरीएट्रिक सॢटफिकेट लेना भी जरूरी होगा। इसमें बुजुर्गों की देखभाल ठीक तरह से कैसे की जाए, इसकी ट्रेनिंग दी जाएगी। हर 3 साल में रिफ्रैशर कोर्स करना जरूरी होगा। यह बिल बुजुर्गों की देखभाल करने वालों के अधिकारों  की रक्षा भी करता है। उनका वेतन कितना हो, काम के घंटे कितने हों, वे सुरक्षित रह सकें, इसकी व्यवस्था भी इसके अंतर्गत की गई है। 

इस बिल के अनुसार यदि बुजुर्गों के साथ क्रूरता की जाती है, उनकी जमीन-जायदाद हड़प ली जाती है, उनका परित्याग कर दिया जाता है, यदि ये बातें साबित होंगी, तो इसके लिए 50,000 रुपए का जुर्माना और 3 साल तक की कैद की सजा होगी। यदि वृद्धों के लिए  कोई ऐसा सैंटर चल रहा है, जो सरकार के साथ रजिस्टर्ड नहीं तो 1 साल की जेल या 25,000 रुपए का जुर्माना अथवा दोनों लग सकते हैं।  यदि किसी बुजुर्ग के साथ अपराध हुआ है, तो 10,000 रुपए का जुर्माना लगेगा। इन दिनों बुजुर्गों के प्रति साइबर फ्रॉड और डिजिटल अपराध बढ़ते जा रहे हैं। इसके लिए पुलिस के विशेष साइबर सैल्स बनाए जाएंगे, जो उन्हें तेज गति से न्याय  देंगे। बुजुर्ग आसानी से अपनी वसीयत और जीवन के अंतिम दिनों में उनकी देखभाल कैसे की जाए, इसे बता सकेंगे। गरीब बुजुर्गों की मदद के लिए सरकार, कार्पोरेट सोशल रिस्पांसिबिलिटी, दान आदि से एक विशेष फंड भी बनाया जाएगा।  केरलम् की यह पहल अच्छी है।-क्षमा शर्मा
 

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