Edited By Anu Malhotra,Updated: 21 Oct, 2026 08:16 AM
कैंसर का नाम सुनते ही मन में एक अनजाना डर बैठ जाता है। अक्सर लोग शरीर में किसी भी सामान्य गांठ को कैंसर मानकर तनाव में आ जाते हैं। लेकिन क्या कैंसर का मतलब सिर्फ गांठ ही है? जवाब है- नहीं। गांठ के अलावा भी शरीर कई ऐसे सूक्ष्म संकेत देता है, जिन्हें...
नई दिल्ली: कैंसर का नाम सुनते ही मन में एक अनजाना डर बैठ जाता है। अक्सर लोग शरीर में किसी भी सामान्य गांठ को कैंसर मानकर तनाव में आ जाते हैं। लेकिन क्या कैंसर का मतलब सिर्फ गांठ ही है? जवाब है- नहीं। गांठ के अलावा भी शरीर कई ऐसे सूक्ष्म संकेत देता है, जिन्हें समय रहते पहचानना बेहद जरूरी है।
जानिए कैसे होती है बीमारी की शुरुआत
कैंसर कोई छुआछूत या हवा से फैलने वाली बीमारी नहीं है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मुताबिक, जब शरीर की कोशिकाएं (Cells) असामान्य रूप से अनियंत्रित होकर बढ़ने लगती हैं, तब कैंसर जन्म लेता है। ये अनियंत्रित कोशिकाएं धीरे-धीरे आसपास के स्वस्थ हिस्सों (Tissues) को नुकसान पहुँचाने लगती हैं और कई बार रक्त या अन्य माध्यमों से शरीर के दूसरे अंगों तक फैल जाती हैं। कैंसर के 100 से भी अधिक प्रकार हैं, जो सिर से लेकर पांव तक शरीर के किसी भी हिस्से को प्रभावित कर सकते हैं।
2024 के आंकड़े- सिर्फ बुजुर्ग ही नहीं, बच्चे भी चपेट में
WHO की रिपोर्ट के अनुसार, 2024 में दुनियाभर में कैंसर से लगभग 1 करोड़ लोगों की मौत हुई। आंकड़े यह भी बताते हैं कि कैंसर केवल ढलती उम्र की बीमारी नहीं है-हर साल 0 से 19 साल के करीब 4 लाख बच्चों और किशोरों में भी इसके मामले दर्ज किए जाते हैं।
2024 में सबसे ज्यादा सामने आए नए मामले:
फेफड़ों का कैंसर : 26 लाख मामले
स्तन कैंसर : 24 लाख मामले
कोलन और रेक्टम कैंसर : 20 लाख मामले
प्रोस्टेट कैंसर : 15 लाख मामले
त्वचा का कैंसर : 11 लाख मामले
पेट का कैंसर: 10 लाख मामले
सबसे ज्यादा मौतों का कारण बने कैंसर:
फेफड़ों का कैंसर: 18.6 लाख मौतें
कोलन और रेक्टम कैंसर: 9.18 लाख मौतें
लिवर कैंसर: 7.32 लाख मौतें
स्तन कैंसर: 6.94 लाख मौतें
पेट का कैंसर: 6.42 लाख मौतें
गांठ के अलावा शरीर में दिखने वाले ये 10 मुख्य संकेत
हर गांठ कैंसर नहीं होती और हर कैंसर की शुरुआत गांठ से नहीं होती। शरीर के अलग-अलग हिस्सों में दिखने वाले ये लक्षण भी कैंसर की ओर इशारा कर सकते हैं:-
-स्तन या कांख में कड़ापन, निप्पल का आकार बदलना, असामान्य डिस्चार्ज या त्वचा पर सिकुड़न/गड्ढे पड़ना।
-पेशाब या मल में खून आना, बार-बार पेशाब का रुकना या जलन होना, और पेट की आदतों में अचानक बदलाव।
-बिना वजह हफ़्तों तक ठीक न होने वाली खांसी या आवाज में भारीपन।
-बिना किसी चोट के शरीर से ब्लीडिंग होना या त्वचा पर आसानी से नीले निशान (Bruising) बनना।
-खाना निगलने में तकलीफ, लगातार अपच, सीने में जलन, पेट दर्द या अचानक भूख खत्म हो जाना।
-शरीर पर नए तिल का बनना, पुराने तिल के रंग/आकार में बदलाव, लंबे समय तक न भरने वाला घाव, या त्वचा का पीला पड़ना (पीलिया)।
-जीभ या गाल के अंदर सफेद या लाल धब्बे, मुंह में सुन्नपन या लगातार दर्द।
-बिना किसी डाइट या एक्सरसाइज के शरीर का वजन तेजी से कम या ज्यादा होना।
-पर्याप्त आराम के बाद भी दूर न होने वाली सुस्ती/थकान, बार-बार बुखार आना या रात में अत्यधिक पसीना आना।
- बार-बार तेज सिरदर्द, दौरे पड़ना, धुंधला दिखाई देना या चेहरे के एक तरफ कमजोरी महसूस होना।
डॉक्टर की सलाह कब लें?
अगर इनमें से कोई भी लक्षण लंबे समय तक बना रहे, समय के साथ बढ़ता जाए, या बिना किसी स्पष्ट कारण के दिखाई दे, तो घबराने की जगह तुरंत विशेषज्ञ डॉक्टर से जांच करवाएं।
ध्यान दें अगर ये लक्षण किसी सामान्य और साधारण बीमारी के भी हो सकते हैं, इसलिए खुद से कोई नतीजा निकालने के बजाय चिकित्सकीय परामर्श ही सही रास्ता है। समय पर पहचान ही कैंसर के सफल इलाज की सबसे बड़ी कुंजी है।
Disclaimer: इस खबर को सामान्य जानकारी के तौर पर लिखा गया है, किसी भी घरेलू नुस्खे, डाइट या मेडिकल सलाह को अपनाने से पहले हमेशा अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से परामर्श लें।