Edited By Niyati Bhandari,Updated: 19 Oct, 2026 03:57 PM
Ashes from Ravan Dahan: विजयादशमी पर रावण दहन के बाद राख या लकड़ी घर लाने को लेकर क्या हैं धार्मिक मान्यताएं? जानें, क्या घर में राख या लकड़ी रखना शुभ है या अशुभ। राख या लकड़ी घर आ जाने पर किन बातों का ध्यान रखना आवश्यक है।
Ashes from Ravan Dahan: विजयादशमी यानी दशहरे का पर्व अधर्म पर धर्म और बुराई पर अच्छाई की विजय के प्रतीक के रूप में धूमधाम से मनाया जाता है। इस अवसर पर देशभर में रावण दहन का आयोजन होता है, जिसे देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग जुटते हैं। दहन के बाद कई लोग पुतले की बची हुई राख या लकड़ी को अपने साथ घर ले आते हैं, लेकिन इस राख या लकड़ी को घर में रखना शुभ माना जाता है या अशुभ, इसे लेकर अक्सर लोग असमंजस में रहते हैं।
दशहरे पर रावण दहन की राख या लकड़ी रखने की धार्मिक मान्यता: धार्मिक परंपराओं में रावण को अहंकार, अधर्म और नकारात्मकता का प्रतीक माना गया है। इसी कारण कई मान्यताओं में रावण दहन की राख या लकड़ी को घर लाकर रखने से परहेज करने की सलाह दी जाती है।
रावण दहन के बाद जैसे ही पुतले की नाभि पर बाण चलाकर उसे आग लगाई जाती है, उस जलते पुतले की लकड़ियां लेने के लिए लोगों की भीड़ उमड पड़ती है। ऐसी लोगों में भ्रांति है कि रावण के जले पुतले की लकड़ी घर में रखने से भय से मुक्ति मिलती है। ऐसा करना बिल्कुल भी शास्त्र संवत नहीं है। जो लोग ऐसा करते हैं उन्हें ब्रह्म दोष और पितृदोष का प्रभाव भी पड़ता है। रावण एक अत्याचारी पापी व आसुरी शक्तियों का आचरण करने वाला व्यक्ति था परंतु यह भी सत्य है कि वह जन्म से ब्राह्मण परम ज्ञानी परम शक्तिशाली व शिव का अनन्य भक्त था। उसके शक्ति, ज्ञान, वीरता, राजनीति ज्ञान का कोई सानी नहीं था।

रावण के पुतले की जली लकड़ी घर में रखना पितृ दोष का भी कारण बनती है। लोग लकड़ी को रावण की अस्थियों के रूप में मानकर अपने घर में जाते हैं, जिससे कि घर में किसी प्रकार का भय न रहे। किंतु ऐसा करना रावण के अवशेष को घर में स्थान देकर पूरा साल उसकी नकारात्मक ऊर्जा अपने घर में प्रवेश करवाने जैसा रहता है।
देह जलने के बाद उसकी राख को विसर्जित करने का प्रावधान है, जिससे कि उस व्यक्ति के जितने भी अवशेष बचे हैं, वह पंच भूतों में विलीन होकर सकारात्मकता की ओर बढ़ें परंतु यदि ध्यान से सोचिए आप अपने किसी प्रियजन की अस्थियां घर में रख लें तो उसका क्या प्रभाव आपके जीवन पर पड़ेगा। तो ऐसा करना बिल्कुल भी उचित तरीका नहीं है।

वैज्ञानिक प्रमाण का अभाव: इस बात का कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है कि राख या लकड़ी घर में रखने से कोई अनहोनी या दुर्भाग्य आता है या परिवार की सुख-शांति प्रभावित होती है। इसे अलग-अलग क्षेत्रों की लोक-परंपराओं और व्यक्तिगत विश्वास के रूप में देखा जाना चाहिए।

पूजा स्थल में रखने से बचें: मान्यताओं के अनुसार, रावण दहन की राख या लकड़ी को घर या पूजा स्थान में संभालकर नहीं रखना चाहिए। दशहरे का मूल संदेश नकारात्मक विचारों का त्याग करना है, इसलिए लोग राख को दहन स्थल पर ही छोड़ देना उचित समझते हैं। इस विषय पर कोई एक सर्वमान्य धार्मिक नियम नहीं है, अतः भयभीत होने की आवश्यकता नहीं है।
भारतीय संस्कृति पुरातन काल से ही शौर्य की उपासक रही है। व्यक्ति और समाज के रक्त में वीरता प्रकट हो इसीलिए दशहरा का पर्व मनाया जाता है। साधारण लोग यही मानते हैं कि इस दिन भगवान श्री राम ने लंकापति रावण का वध किया था। यानी सत्य का दामन पकड़े भगवान श्री राम ने असत्य और पापकर्मा का वध कर विजय प्राप्त की थी।
वाल्मीकि रामायण के अनुसार रावण एक वीर, धर्मात्मा, ज्ञानी, नीति तथा राजनीति शास्त्र का ज्ञाता, ज्योतिषाचार्य, रणनीति में निपुण, कुशल सेनापति और वास्तु कला का मर्मज्ञ होने के साथ-साथ ब्रह्मज्ञानी और बहुत सी आलौकिक विधाओं का ज्ञाता था। वह इंद्रजाल, तंत्र, सम्मोहन और अनेक मायावी विधाओं में भी निपुण था परंतु इसकी एक गलती ने उसके परिवार सहित उसका विनाश कर डाला। रावण के अहं व उसकी आसुरी प्रवृत्ति उसके विनाश का कारण बनी। ब्रह्मा जी का वंशज तथा पुलस्त्य जैसे महामुनि का वंशज अपने अहं के कारण दुर्गति को प्राप्त हुआ।
