मेरा फोन मुझे मेरी पत्नी से बेहतर जानता है...!

Edited By Updated: 28 Aug, 2026 05:30 AM

my phone knows me better than my wife

‘‘काश!  तुम कल शाम बाहर न गए होते।’’ मेरी पत्नी ने कहा।

‘‘काश!  तुम कल शाम बाहर न गए होते।’’ मेरी पत्नी ने कहा। मैंने उसकी ओर उस निर्दोष भाव से देखा, जिसे पतियों ने सदियों से परिपक्व किया है। ‘‘कल शाम?’’ मैंने तीन कीमती सैकेंड खरीदते हुए पूछा। ‘‘हां,’’ उसने कहा। ‘‘कल शाम। तुम कहां थे?’’ ‘‘मैं एक नई किताब के बारे में सोच रहा था।’’ मैंने जवाब दिया। ‘‘कहां?’’ इससे पहले कि मैं कोई सम्मानजनक उत्तर गढ़ पाता, मेरे फोन ने खुद ही बता दिया। ‘‘आपने शाम 7.12 बजे से रात 9.03 बजे तक रॉयल गार्डन रैस्टोरैंट का दौरा किया।’’ इसने अपने लोकेशन इतिहास के माध्यम से घोषणा की।

मेरी पत्नी ने मुझे देखा। मैंने अपने फोन को देखा। फोन खुद से बहुत खुश लग रहा था। ‘‘मैं समझा सकता हूं।’’ मैंने कहा। मेरे फोन ने तुरंत रैस्टोरैंट की तस्वीरें, बिल, मेरे द्वारा लिया गया रास्ता और वहां मेरे अगले भोजन पर 20 प्रतिशत की छूट देने वाला एक विज्ञापन प्रदर्शित कर दिया। मेरी पत्नी ने अपनी बांहें समेट लीं। ‘‘तुम्हारे साथ कौन था?’’ सौभाग्य से, मेरा फोन इसका उत्तर नहीं दे सका।

फिर फेशियल रिकग्निशन ने मेज के चारों ओर बैठे 3 दोस्तों की पहचान की, जिनमें से एक थोड़ा लाल दिख रहा था, मानो उसने थोड़ी ज्यादा पी ली हो। अब शादी में कोई राज नहीं रहे। इसलिए नहीं कि पति अधिक ईमानदार हो गए हैं, बल्कि इसलिए कि फोन सरकारी गवाह बन गए हैं। मेरा फोन मेरे बारे में सब कुछ जानता है। यह जानता है कि मैं कहां जाता हूं, क्या खरीदता हूं, क्या पढ़ता हूं और मैं लोगों के स्विमिंग पूल में गिरने के वीडियो कितनी देर तक घूरता हूं। यह जानता है कि मैं कब उठता हूं क्योंकि मैं अपने चश्मे तक पहुंचने से पहले उस तक पहुंचता हूं। यह जानता है कि मैं कब सोता हूं क्योंकि रात में यह आखिरी चेहरा होता है, जिसे मैं देखता हूं। कभी-कभी यह मेरे जानने से पहले ही जान जाता है कि मुझे क्या चाहिए। कल, मैंने अपनी पत्नी से फुसफुसाकर कहा, ‘‘शायद हमें एक नया सोफा खरीदना चाहिए।’’

कुछ ही मिनटों के भीतर, मेरे फोन ने मुझे 40 सोफे, 12 फर्नीचर की दुकानें और एक आदमी को यह समझाते हुए दिखाया कि मेरा वर्तमान सोफा मेरी रीढ़ की हड्डी को क्यों नष्ट कर रहा था। मैंने सोफे की खोज नहीं की थी। मैंने तो बस उसके बारे में बात की थी। मैं अब अपने फोन के पास धीरे से बोलता हूं। मुझे डर है कि अगर मैं कहूं, ‘‘मैं थका हुआ महसूस कर रहा हूं,’’ तो यह मुझे किसी अस्पताल में भर्ती करा देगा। हम आर्टिफिशियल इंटैलिजैंस के दुनिया पर कब्जा करने से डरते हैं, लेकिन हम इसका मुख्य जासूस अपनी जेब में रखते हैं। यह हमारे संदेश पढ़ता है, हमारे वाक्यों को पूरा करता है, हमारी वर्तनी सुधारता है और हमें उन जन्मदिनों की याद दिलाता है, जिन्हें हम अन्यथा भूल जाते।मेरी पत्नी कभी-कभी पूछती है, ‘‘क्या तुम्हें याद है, जो मैंने तुम्हें आज सुबह बताया था?’’ मुझे याद नहीं रहता। लेकिन मेरे फोन को याद है कि मैंने 9 साल पहले क्या खोजा था।

यही त्रासदी है। हमारी मशीनें ज्यादा याद रख रही हैं जबकि हम कम याद रख रहे हैं। हम अपने फोन का बैटरी प्रतिशत जानते हैं लेकिन अपनी बगल में बैठे व्यक्ति को परेशान करने वाली चिंताओं को नहीं जानते। शायद हमें कभी-कभी फोन को नीचे रखकर चारों ओर देखना चाहिए। वहां कोई बोलने, मुस्कुराने या हमारा हाथ थामने का इंतजार कर रहा हो सकता है। और हमारे फोन के विपरीत, हो सकता है कि उन्हें वह सब कुछ याद न रहे, जो हमने गलत किया था।
लेकिन उन्हें यह जरूर याद रहेगा कि हम उनके साथ वहां थे...! -दूर की कौड़ी राबर्ट क्लीमैंट्स

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