‘बच्चों का शारीरिक उत्पीड़न करते’ चंद अध्यापक व अध्यापिकाएं!

Edited By Updated: 21 Jul, 2026 03:05 AM

some teachers and teachers physically harass children

जीवन में माता-पिता के बाद अध्यापक का ही सर्वोच्च स्थान माना गया है। अध्यापक ही बच्चों को सही शिक्षा देकर ज्ञानवान बनाते हैं, परंतु आज चंद अध्यापक-अध्यापिकाएं अपनी मर्यादा को भूल कर बच्चों पर अमानवीय अत्याचार कर रहे हैं जो पिछले 4 महीनों की निम्न...

जीवन में माता-पिता के बाद अध्यापक का ही सर्वोच्च स्थान माना गया है। अध्यापक ही बच्चों को सही शिक्षा देकर ज्ञानवान बनाते हैं, परंतु आज चंद अध्यापक-अध्यापिकाएं अपनी मर्यादा को भूल कर बच्चों पर अमानवीय अत्याचार कर रहे हैं जो पिछले 4 महीनों की निम्न घटनाओं से स्पष्ट है :

* 14 मार्च को ‘शेडटीकेरे’ (कर्नाटक) स्थित सरकारी उच्च प्राथमिक विद्यालय में शिक्षक ‘प्रमोद सोनक्की’ ने 13 वर्षीय छात्र को बैंत से बुरी तरह पीटा जिससे उसके शरीर पर नीले निशान पड़ गए और उसे तेज बुखार आ गया।
* 15 मार्च को ‘नागपुर’ (महाराष्ट्र) के एक सरकारी प्राइमरी स्कूल की पांचवीं कक्षा की एक छात्रा को गणित का सवाल गलत हल करने पर उसकी शिक्षिका ने बेरहमी से पीट दिया जिससे उसके हाथ पर गहरी चोट लग गई।
* 30 जून को ‘मट्टानूर’ (केरल) स्थित ‘सरकारी प्राइमरी स्कूल’ में दूसरी कक्षा का एक छात्र अपनी कापी पर अध्यापक ‘विपिन’ द्वारा ब्लैकबोर्ड पर लिखे नोट्स धीरे-धीरे उतार रहा था जिससे नाराज होकर शिक्षक ने उस पर छड़ी से कई वार कर दिए जिससे उसकी पीठ से खून बहने लगा।

* 10 जुलाई को ‘वाल्मीकि नगर’ (पश्चिम चम्पारण, बिहार) स्थित एक रैजीडैंशियल स्कूल के 10 वर्षीय छात्र ‘कृष’ की किसी गलती की वजह से अध्यापक द्वारा पिटाई के परिणामस्वरूप मौत हो गई।
* 14 जुलाई को ‘पटना’ (बिहार) के एक सरकारी स्कूल की छात्रा अध्यापक के पूछने पर अपना रोल नम्बर गलत बता बैठी, जिस पर गुस्से में आकर शिक्षक ‘अमित कुमार’ ने उसे छड़ी से इतनी बेरहमी से पीटा कि उसकी पीठ लहू-लुहान हो गई और उस पर गहरे निशान पड़ गए।

* 15 जुलाई को ‘मलीहाबाद’ (उत्तर प्रदेश) स्थित ‘सीनियर सैकेंडरी स्कूल’ में होमवर्क पूरा न होने पर शिक्षक ‘हसीब’ ने चौथी कक्षा के एक छात्र को डंडे से बुरी तरह पीट डाला जिससे उसे गंभीर चोटें आईं।  
* 17 जुलाई को ‘मयूरभंज’ (ओडिशा) में ‘उदल’ स्थित एक सरकारी रैजीडैंशियल स्कूल के 4 छात्रों के बिना बताए रथ यात्रा देखने चले जाने पर गुस्से में आए अध्यापक ने लोहे के पाइप से उनकी बेरहमी से पिटाई कर डाली। इससे एक छात्र गंभीर रूप से घायल हो गया। 
* 18 जुलाई को ‘बेतिया’ (बिहार) के ‘सिरसिया मठिया’ स्थित ‘सरकारी सीनियर सैकेंडरी सकूल’ में एक शिक्षक ने छठी कक्षा के एक छात्र की इतनी बेरहमी से पिटाई की कि उसके शरीर पर गहरे घाव हो गए। 

* 18 जुलाई को ही ‘जौनपुर’ (उत्तर प्रदेश) के ‘बरसठी’ थाना क्षेत्र के ‘चमरहा’ स्थित ‘सरकारी प्राइमरी स्कूल’ में मिड डे मील के वितरण के समय 2 बच्चों में विवाद की शिकायत मिलने पर शिक्षक ‘मोहम्मद आरिफ’ नामक अध्यापक ने चौथी कक्षा में पढऩे वाले ‘प्रतीक यादव’ नामक 8 वर्षीय छात्र को इतनी बेरहमी से पीटा कि वह बेहोश हो गया। परिजनों ने पुलिस में लिखित शिकायत दर्ज कराई है।
* और अब 18 जुलाई को ही ‘लुधियाना’ (पंजाब) में ‘ब्रह्मïपुरी’ स्थित ‘सरकारी स्कूल’ में पढऩे वाले छात्र के माता-पिता ने अपने बच्चे के साथ मारपीट करने के आरोप में अध्यापिका ‘रिंकू रानी’ के विरुद्ध पुलिस में दर्ज शिकायत में कहा है कि अध्यापिका ने बच्चे को इतनी बेरहमी से पीटा कि वह सदमे में चला गया और उसकी तबीयत बिगड़ गई। 

भारत में नि:शुल्क और अनिवार्य बाल शिक्षा अधिनियम, 2009 की धारा 17 के तहत स्कूलों में बच्चों को शारीरिक दंड देना या मानसिक रूप से प्रताडि़त करना पूरी तरह प्रतिबंधित और दंडनीय अपराध है। इसके अलावा, ‘जुवेनाइल जस्टिस एक्ट’ के अंतर्गत भी बच्चों के साथ क्रूरता करने वाले शिक्षकों के लिए सीधे जेल और जुर्माने की सजा का प्रावधान है, अत: इस प्रक्रिया को तेज किया जाना चाहिए। यही नहीं, अध्यापकों को नौकरी देते समय उनका इंटरव्यू लेने के साथ-साथ उनका मनोवैज्ञानिक परीक्षण करने के अलावा नौकरी देने के बाद भी नियमित रूप से उनकी काऊंसलिंग की जानी चाहिए तथा छात्रों से दुव्र्यवहार करने वाले अध्यापकों को शिक्षाप्रद सजा दी जाए ताकि उनके द्वारा छात्र-छात्राओं के उत्पीडऩ का यह दुष्चक्र बंद हो।—विजय कुमार 

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