भारत के बंटवारे का जिम्मेदार कौन?

Edited By Updated: 15 Aug, 2026 07:00 AM

who is responsible for the partition of india

1947 में महान भारत का बंटवारा बिना किसी सुनियोजित और ठोस प्रशासनिक व्यवस्था के तथा अनावश्यक जल्दबाजी में कर दिया गया। नतीजतन इस अफरा-तफरी  में  दस  लाख हिन्दू,  सिख, मुस्लिम अपनी जानें गंवा बैठे।  21 लाख लोग लापता हो गए। लाखों महिलाओं की अस्मत लूटी...

1947 में महान भारत का बंटवारा बिना किसी सुनियोजित और ठोस प्रशासनिक व्यवस्था के तथा अनावश्यक जल्दबाजी में कर दिया गया। नतीजतन इस अफरा-तफरी  में  दस  लाख हिन्दू,  सिख, मुस्लिम अपनी जानें गंवा बैठे।  21 लाख लोग लापता हो गए। लाखों महिलाओं की अस्मत लूटी गई। दो करोड़ लोगों को अपनी पुरखों की जमीन-जायदाद को सदा के लिए  छोड़कर बेघर, बे-चिराग और खानाबदोशों की तरह भटकते हुए पाकिस्तान से भारत और भारत से पाकिस्तान जाना पड़ा। रास्तों में मजहबी जुनून के पागलपन के शिकार काफिलों पर हमले करते, लूटते और कइयों को मार देते। इस जुल्मो सितम का सबसे बड़ा सामना अखंड भारत की बेटियों को करना पड़ा। कई महिलाओं ने कुंओं में छलांगें लगाकर अपनी जान दे दी और कई लोगों ने अपनी पत्नी और बेटियों को अपने ही हाथ से मार डाला ताकि वो गैर-मर्द के हाथ न लगें। जो लोग रेल गाडिय़ों में बैठकर आ रहे थे उनको भी बड़ी बर्बरता के साथ डिब्बों में ही कत्ल कर दिया गया। अमृतसर का रेलवे स्टेशन इस खून-खराबे का चश्मदीद गवाह है।

विश्व के इतिहास में इस तरह की कू्ररता कभी देखने को नहीं मिली। जंगली समाज में भी इस तरह की कत्लो गारत शायद नहीं हुई  होगी, जितनी सभ्य समाज के लोगों ने कर दिखाई। भारत में सरकारें तो बदलती थीं पर लोग अपने-अपने स्थानों पर ही रहते थे इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ जब सरकार के बदलने से लोगों को अपना देश भी बदलना पड़ा। जब  हिन्दू, मुसलमान और सिख कई शताब्दियों से शांतिपूर्ण वातावरण में प्यार मोहब्बत और आपसी सहयोग से रह रहे थे आज भी रह रहे हैं तो फिर बंटवारे की जरूरत क्या थी? इस  हैरत अंगेज दुखदायी और अफसोस नाक मंजर के लिए समूची मानवता शर्मिंदा है आखिर  भारत के बंटवारे के लिए कौन जिम्मेदार है? ब्रिटिश हुकूमत, मुस्लिम लीग या कांग्रेस? भारत के राजनीतिक रूप से बुरी तरह विभाजित  होने के कारण दूसरे देशों से आक्रमणकारियों को  इस सोने की चिडिय़ा को लूटने और फिर लंबा शासन करने का मौका मिला।  संकीर्ण जातीय व्यवस्था ने सामाजिक एकता में बिखराव पैदा कर दिया।  

संघर्षमय जीवन की बजाय  पलायनवादी सोच बुरी तरह मानसिकता पर हावी हो गई। समाज की रक्षा के लिए केवल एक विशेष वर्ग को लडऩे का अधिकार था।और विदेशियों ने हमारी कमियों, कमजोरियों का खुलकर फायदा उठाया और  हम लंबे समय तक गुलामी की जंजीरों में जकड़े रहे।  हमारी कमजोरियों का फायदा उठाकर अंग्रेजों ने भारत पर कब्जा कर लिया।  उनके साथ  फ्रांसिसी और पुर्तगाली भी अलग-अलग इलाकों के  शासक बन बैठे। 1857 में प्रथम स्वतंत्रता युद्ध के बाद अंग्रेजों ने भारत पर शासन करने की नीति बदल ली और लोगों को एक सूत्र में पिरोने की बजाय बांटो और राज करो की नीति अपनानी शुरू कर दी। 

अंग्रेजों ने  कांग्रेस को कमजोर करने के लिए एक  नई साजिश रची जिसके दूरगामी दुष्प्रभाव हुए। 1906 में  अलीगढ़ मुस्लिम  स्कूल के अंग्रेज प्रिंसीपल विलियम आर्क बोल्ड  के  द्वारा  आगा खां के  नेतृत्व में कुछ मुस्लिम नेताओं को निमंत्रित किया गया और यहीं पर लार्ड मिंटो के नाम एक पत्र तैयार किया गया जिसमें मुस्लिम नेताओं ने ब्रिटिश हुकूमत को अपनी वफादारी का आश्वासन देते हुए कहा कि वह भविष्य में इस भावना को और बढ़ाएंगे और रिश्तों को मजबूत करेंगे और उन्हें अलग विशिष्ट राजनीतिक पहचान दी जाए और निचले स्तर से लेकर असैंबली तक उनके लिए अलग निर्वाचक मंडल बनाया जाए। यह पत्र शिमला में वायसराय को दिया गया और उसके आश्वासन के पश्चात  1906 में ढाका में मुस्लिम लीग की स्थापना हुई और  देश में मुसलमान मुस्लिम लीग के सदस्य बनने लगे।

मुस्लिम लीग ने द्वि-राष्ट्र सिद्धांत का खुलकर लोगों में प्रचार किया कि हिंदू और मुसलमान दो सम्प्रदाय नहीं बल्कि राष्ट्र है इस सिद्धांत को ब्रिटिश  पार्लियामैंट के सांसद लार्ड एकटन ने 19वीं शताब्दी के तीसरे दशक में प्रतिपादित किया था। भारत में इस सिद्धांत को सबसे पहले सर सैयद अहमद खां ने 1887 में मेरठ के जलसे में पेश किया था जिसका धीरे-धीरे प्रचार होने लगा।  इस सिद्धांत  का  सबसे ज्यादा दुरुपयोग मोहम्मद अली जिन्ना  और अल्लामा इकबाल ने किया, जिससे समूचे समाज में साम्प्रदायिकता का विष फैलने लगा और बंटवारे का एक कारण भी बना।  कांग्रेस एक तरफ  देश की आजादी की लड़ाई लड़ रही थी दूसरा  सर्वधर्म समभाव के लिए संघर्षरत थी। तीसरा अंग्रेजों के कू्रर कानूनों को खत्म करने के लिए संघर्ष कर रही थी, चौथा मुस्लिम लीग की साम्प्रदायिकता को रोकने की कोशिश कर रही थी। पांचवां सभी लोगों को एक सूत्र में रखने की कोशिश में तल्लीन थी परंतु  दूसरी तरफ  मोहम्मद अली जिन्ना भारत के समूचे मुसलमानों के प्रतिनिधित्व का अधिकार मुस्लिम लीग के लिए मांग रहे थे। जो सामाजिक और राजनीतिक हित में नहीं था। 

इस कशमकश के दौरान भारत  के महान सपूत, स्वतंत्रता सेनानी और आर्य समाज के   प्रसिद्ध नेता लाला जगत नारायण ने छुआछूत को दूर करने के लिए लाहौर  में  एक बड़ा प्रीति भोज का आयोजन करके समाज सुधार की एक नई क्रांति को जन्म दिया। दूसरी तरफ देश को तोडऩे के लिए जिन्ना  अंग्रेजों से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से मदद ले रहे थे। आखिर अंग्रेजों की बंटवारे की चाल चल गई और जिन्ना और मुस्लिम लीग ने लोगों के इक_े रहने के सपनों पर पानी फेर दिया। कांग्रेस आखिरी दम तक बंटवारे के विरुद्ध थी। हकीकत में देश  के बंटवारे के लिए अंग्रेज और मुस्लिम लीग जिम्मेदार हैं।-प्रो. दरबारी लाल(पूर्व डिप्टी स्पीकर पंजाब) 

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