Edited By jyoti choudhary,Updated: 04 Jul, 2026 11:51 AM

एल्युमीनियम एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एएआई) ने सरकार से एल्युमीनियम उत्पादों पर मूल सीमा शुल्क (बीसीडी) बढ़ाने की मांग की है। संगठन ने चेतावनी दी है कि सस्ते आयात और वैश्विक संरक्षणवाद के बढ़ते दबाव से घरेलू निवेश तथा सरकारी राजस्व पर गंभीर
नई दिल्लीः एल्युमीनियम एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एएआई) ने सरकार से एल्युमीनियम उत्पादों पर मूल सीमा शुल्क (बीसीडी) बढ़ाने की मांग की है। संगठन ने चेतावनी दी है कि सस्ते आयात और वैश्विक संरक्षणवाद के बढ़ते दबाव से घरेलू निवेश तथा सरकारी राजस्व पर गंभीर असर पड़ सकता है। एएआई ने प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) को लिखे पत्र में कहा कि भारतीय एल्युमीनियम उद्योग फिलहाल एक तरफ आयात में तेजी से वृद्धि और दूसरी तरफ निर्यात बाजारों तक पहुंच में कमी जैसी दो समस्याओं से एक साथ जूझ रहा है।
संगठन ने आयात में आई तेज़ी को रोकने के लिए बीडीसी बढ़ाने समेत कई ज़रूरी कदम उठाने की मांग की है। एएआई के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-2026 में एल्युमीनियम आयात रिकॉर्ड स्तर 34.8 लाख टन प्रति वर्ष तक पहुंच गया, जिससे देश से 88,400 करोड़ रुपये से अधिक विदेशी मुद्रा बाहर गई। संगठन के अनुसार, भारतीय एल्युमीनियम उद्योग देश की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान देता है और हर साल लगभग 30,000 करोड़ रुपए का राजस्व देता है। यह क्षेत्र करीब आठ लाख नौकरियों और लगभग 4,000 एमएसएमई को समर्थन प्रदान करता है।
एएआई ने चेतावनी दी कि बढ़ते आयात से प्रमुख उत्पादकों के तीन लाख करोड़ से अधिक के निवेश पर खतरा मंडरा रहा है। ये निवेश आने वाले वर्षों में भारत की प्राथमिक एल्युमीनियम उत्पादन क्षमता को 90 लाख टन प्रति वर्ष तक दोगुना करने और एक लाख से अधिक नई नौकरियां पैदा करने की क्षमता रखते हैं।