Edited By jyoti choudhary,Updated: 27 Aug, 2026 05:51 PM

एचडीएफसी बैंक सुभाष चंद्रा के रीपेमेंट प्लान को मंजूरी देने वाले NCLT के आदेश को चुनौती देने के लिए NCLAT में अपील करने पर विचार कर रहा है। बैंक ने बताया कि उसने इस समझौते का विरोध किया था और प्रस्ताव के खिलाफ मतदान भी किया था। NCLT
नई दिल्लीः एचडीएफसी बैंक सुभाष चंद्रा के रीपेमेंट प्लान को मंजूरी देने वाले NCLT के आदेश को चुनौती देने के लिए NCLAT में अपील करने पर विचार कर रहा है। बैंक ने बताया कि उसने इस समझौते का विरोध किया था और प्रस्ताव के खिलाफ मतदान भी किया था। NCLT ने जिस प्लान को मंजूरी दी है, उसमें करीब 22,006.57 करोड़ रुपए के मंजूर दावों के मुकाबले कर्जदाताओं को सिर्फ 6.25 करोड़ रुपए देने का प्रस्ताव है।
कर्ज देने वालों को 99.97% का नुकसान
रीपेमेंट प्लान के तहत कर्जदाताओं को कुल 6.25 करोड़ रुपए मिलेंगे, जबकि मंजूर दावों की राशि करीब 22,006.57 करोड़ रुपए है यानी मूल दावों के मुकाबले रिकवरी सिर्फ करीब 0.028 फीसदी होगी। इस तरह कर्जदाताओं को करीब 99.97 फीसदी का नुकसान उठाना पड़ेगा।
HDFC बैंक का दावा कुल राशि का 3.2%
एचडीएफसी बैंक के मुकाबिक, इस मामले में उसका मंजूर दावा कुल बताई गई राशि का सिर्फ 3.2 फीसदी था। बैंक के मुताबिक यह कर्ज सुविधा उसके पास एचडीएफसी लिमिटेड के साथ विलय के बाद मिली थी। यह सुविधा पहले एचडीएफसी लिमिटेड ने जारी की थी और इसके लिए पहले ही प्रोविजन किया जा चुका था।
समझौते के खिलाफ था बैंक
एचडीएफसी बैंक के प्रवक्ता ने कहा कि बैंक ने रीपेमेंट प्लान का विरोध किया था और इसके खिलाफ वोट भी किया। हालांकि, बहुमत के आधार पर प्रस्ताव को मंजूरी मिल गई। अब बैंक NCLAT में अपील करने के विकल्प पर विचार कर रहा है।
कई अन्य वित्तीय संस्थानों ने भी इस प्लान का विरोध किया है। इन संस्थानों ने बेहद कम रिकवरी, दावों की जांच और वोटिंग प्रक्रिया में सुभाष चंद्रा से कथित तौर पर जुड़े संस्थानों की भागीदारी को लेकर सवाल उठाए हैं।
NCLT में भी फैसले को लेकर मतभेद
रीपेमेंट प्लान पर NCLT के दो सदस्यों के बीच मतभेद सामने आया था। इसके बाद असहमति वाले मुद्दों पर निर्णय के लिए तीसरे सदस्य नीलेश शर्मा को नियुक्त किया गया। उन्होंने 25 अगस्त को प्लान को मंजूरी देने के पक्ष में फैसला दिया। अब मामले को मूल बेंच के सामने रखा जाएगा। इसके बाद बहुमत की राय को लागू करने वाला औपचारिक आदेश जारी किया जाएगा।
₹170 करोड़ के कर्ज से शुरू हुई कार्रवाई
सुभाष चंद्रा के खिलाफ दिवालिया प्रक्रिया की शुरुआत विवेक इंफ्राकॉन को दिए गए करीब 170 करोड़ रुपए के कर्ज से हुई थी। इस कर्ज में सुभाष चंद्रा व्यक्तिगत गारंटर थे। कर्ज के डूबने के बाद इंडियाबुल्स हाउसिंग फाइनेंस , जिसे अब Sammaan Capital के नाम से जाना जाता है, ने 2022 में NCLT का रुख किया था। NCLT ने इस याचिका को 2024 में स्वीकार किया था।