Edited By Tanuja,Updated: 27 Aug, 2026 01:32 PM

नेपाल में विनाशकारी फ्लैश फ्लड से 160 से ज्यादा लोगों की मौत हुई है और करीब 1,500 लोग लापता हैं। इनमें लगभग 800 विदेशी पर्यटक बताए जा रहे हैं। 5,000 से ज्यादा सैनिक-पुलिस बचाव में जुटे हैं। भारत समेत कई देशों ने राहत सामग्री, आर्थिक मदद और बचाव दल...
Kathmandu: नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ ने बड़े मानवीय संकट का रूप ले लिया है। फ्लैश फ्लड में 160 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि करीब 1,500 लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। लापता लोगों में बड़ी संख्या विदेशी पर्यटकों और तीर्थयात्रियों की है। राहत और बचाव अभियान के लिए हेलीकॉप्टरों के साथ सेना और पुलिस की बड़ी टुकड़ी मैदान में उतर चुकी है। आपदा के सबसे चिंताजनक पहलुओं में से एक बड़ी संख्या में विदेशी नागरिकों का लापता होना है। रिपोर्ट के मुताबिक, करीब 800 विदेशी पर्यटक अभी तक लापता बताए जा रहे हैं। इनमें कैलाश मानसरोवर की यात्रा पर जाने वाले तीर्थयात्री भी शामिल हैं। चीन के तिब्बत से लगी नेपाल की सीमा के आसपास का इलाका इस प्राकृतिक आपदा से सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ है।
लापता विदेशी नागरिकों में सबसे ज्यादा भारतीय
पर्यटन अधिकारियों के मुताबिक, नेपाल में कुल 826 लोग लापता हैं। इनमें करीब 600 विदेशी नागरिक शामिल हैं। लापता पर्यटक दो दर्जन से अधिक देशों के बताए जा रहे हैं। विदेशी नागरिकों में सबसे ज्यादा संख्या भारतीयों की है: भारत के करीब 300, अमेरिका के 63, ऑस्ट्रेलिया के 34, ब्रिटेन के 33 और कनाडा के 25 पर्यटक शामिल हैें। इन आंकड़ों से अंदाजा लगाया जा सकता है कि आपदा का असर नेपाल आने वाले विदेशी पर्यटकों और तीर्थयात्रियों पर कितना व्यापक रहा है।
इनमें अलग-अलग तीर्थ और टूर समूहों में शामिल लोग हैं। एक पर्यटन एजेंसी के मुताबिक, लापता ऑस्ट्रेलियाई नागरिकों में 15 लोग कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए जा रहे थे। ये सभी भारतीय मूल के ऑस्ट्रेलियाई नागरिक बताए गए हैं। इनमें सबसे कम उम्र का सदस्य 11 साल का बच्चा है।
5000 से ज्यादा जवानों ने संभाला मोर्चा
नेपाल की सेना के मुताबिक, 5,000 से अधिक सैनिक और पुलिसकर्मी बचाव अभियान में शामिल हैं। गुरुवार को अभियान के दौरान 125 लोगों को बचाया गया, जिनमें 20 विदेशी नागरिक भी शामिल हैं। सबसे ज्यादा प्रभावित जिलों में हेलीकॉप्टरों के जरिए टेंट, भोजन और दूसरी जरूरी राहत सामग्री पहुंचाई जा रही है। भारत की ओर से भेजी गई राहत सामग्री भी प्रभावित इलाकों तक पहुंचाई जा रही है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर राहत अभियान शुरू
भारत ने 10 मीट्रिक टन राहत सामग्री भेजी है, जिसमें अस्थायी आश्रय, कंबल, हाइजीन किट, सोलर लैंप और दवाएं शामिल हैं।
अमेरिका ने आपदा प्रतिक्रिया विशेषज्ञ भेजने और 5 लाख डॉलर की सहायता देने की घोषणा की है।
चीन ने आपातकालीन सामग्री और आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने की बात कही है।
यूरोपीय संघ ने अतिरिक्त सहायता जुटाने की तैयारी जताई है।
दक्षिण कोरिया ने पुलिस, आपात सेवा और विदेश मंत्रालय के अधिकारियों की टीम नेपाल भेजने का फैसला किया है।
इंटरनेशनल फेडरेशन ऑफ रेड क्रॉस एंड रेड क्रिसेंट सोसाइटीज ने नेपाल रेड क्रॉस के लिए 10 लाख स्विस फ्रैंक की आपात सहायता जारी की है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने दवाओं और बहुउद्देश्यीय टेंट समेत जरूरी मेडिकल सामान भेजा है।
चमत्कारिक रूप से बचे
बाढ़ के बाद कई इलाकों में सड़क और पुलों के क्षतिग्रस्त होने से जमीनी राहत अभियान बेहद मुश्किल हो गया है। ऐसे में हेलीकॉप्टरों की मदद से लोगों को सुरक्षित निकालने और राहत सामग्री पहुंचाने का काम किया जा रहा है। रेस्क्यू टीमें अभी भी उन इलाकों में फंसे लोगों की तलाश कर रही हैं, जहां बाढ़ का पानी और मलबा भारी नुकसान छोड़ गया है। भयानक तबाही के बीच कुछ लोगों के चमत्कारिक रूप से बचने की कहानियां भी सामने आ रही हैं। एक जीवित बचे व्यक्ति ने बताया कि बाढ़ का पानी अचानक उनके शहर में घुस आया और देखते ही देखते हालात बेकाबू हो गए। कई लोगों को अपने परिवार के सदस्यों को बचाने का मौका तक नहीं मिला। आपदा के बाद अब नेपाल के सामने सबसे बड़ी चुनौती लापता लोगों को ढूंढना और दुर्गम इलाकों तक राहत पहुंचाना है।