कन्फर्म टिकट के बावजूद नहीं मिली सीट, अब रेलवे को देना होगा 50,000 रुपए मुआवजा

Edited By Updated: 08 Jul, 2026 12:51 PM

no seat despite confirmed ticket railways ordered to pay 50 000

ट्रेन में कन्फर्म टिकट होने के बावजूद सीट न मिलना कई यात्रियों के लिए बड़ी परेशानी बन जाता है। केरल में ऐसा ही एक मामला सामने आया, जहां एक यात्री को कन्फर्म टिकट होने के बावजूद पूरी रात भीड़ के बीच खड़े होकर सफर करना पड़ा। इस मामले में उपभोक्ता आयोग...

बिजनेस डेस्कः ट्रेन में कन्फर्म टिकट होने के बावजूद सीट न मिलना कई यात्रियों के लिए बड़ी परेशानी बन जाता है। केरल में ऐसा ही एक मामला सामने आया, जहां एक यात्री को कन्फर्म टिकट होने के बावजूद पूरी रात भीड़ के बीच खड़े होकर सफर करना पड़ा। इस मामले में उपभोक्ता आयोग ने भारतीय रेलवे को सेवा में लापरवाही का दोषी मानते हुए यात्री को 50,000 रुपए मुआवजा देने का आदेश दिया है।

कंज्यूमर आयोग ने रेलवे को ठहराया जिम्मेदार

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, केरल के उपभोक्ता आयोग ने दक्षिणी रेलवे, दक्षिण पश्चिमी रेलवे और तिरुवनंतपुरम के एडिशनल डिविजनल रेलवे मैनेजर (ADRM) को संयुक्त रूप से मुआवजा देने का निर्देश दिया है। आयोग ने मानसिक प्रताड़ना के लिए 50,000 रुपए और मुकदमे के खर्च के रूप में 3,000 रुपए देने का आदेश भी दिया। 

क्या था पूरा मामला?

शिकायतकर्ता ने बेंगलुरु से कोचुवेली (केरल) की यात्रा के लिए तत्काल कोटे से एक कन्फर्म टिकट बुक किया था। जब वह ट्रेन में चढ़ा, तो उसने देखा कि उसका आरक्षित (Reserved) कोच पूरी तरह से जनरल/अनारक्षित यात्रियों से ठसाठस भरा हुआ था।

यात्री ने रेलवे के कस्टमर केयर से संपर्क किया लेकिन अधिकारियों ने पूजा/नवरात्रि की छुट्टियों की भीड़ का हवाला देकर कोई मदद नहीं की और उसे सहयोग करने को कहा। इसके बाद यात्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर भी शिकायत दर्ज कराई और कोच की तस्वीरें शेयर कीं लेकिन किसी भी अधिकारी ने उसकी सुध नहीं ली। भीड़ इतनी ज्यादा थी कि चलने का रास्ता भी भरा हुआ था, जिससे वहां खड़े होना भी दूभर था और यात्री पूरी रात सो नहीं सका।

रेलवे की दलील आयोग ने नहीं मानी

सुनवाई के दौरान रेलवे ने कहा कि त्योहारों के कारण असाधारण भीड़ थी और शिकायत मिलने के बाद टीटीई ने रेलवे सुरक्षा बल (RPF) की मदद से अगले स्टेशन पर अनारक्षित यात्रियों को कोच से बाहर कर दिया था। हालांकि आयोग ने कहा कि रेलवे अपने दावे के समर्थन में कोई ठोस सबूत पेश नहीं कर सका। तस्वीरों और सोशल मीडिया शिकायतों के आधार पर आयोग ने रेलवे को सेवा में कमी का दोषी माना और एक महीने के भीतर मुआवजा देने का आदेश दिया। 
 

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