Edited By jyoti choudhary,Updated: 02 Jul, 2026 11:15 AM

कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) ने अपने करोड़ों एक्टिव सब्सक्राइबर्स के लिए प्रोविडेंट फंड नियमों में बड़ा बदलाव किया है, जिसका असर आपकी टेक-होम सैलरी पर दिख सकता है। नए नियम के अनुसार, 15,000 रुपए की वैधानिक वेतन सीमा तक 12% पीएफ योगदान अनिवार्य...
बिजनेस डेस्कः कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) ने अपने करोड़ों एक्टिव सब्सक्राइबर्स के लिए प्रोविडेंट फंड नियमों में बड़ा बदलाव किया है, जिसका असर आपकी टेक-होम सैलरी पर दिख सकता है। नए नियम के अनुसार, 15,000 रुपए की वैधानिक वेतन सीमा तक 12% पीएफ योगदान अनिवार्य रहेगा लेकिन इससे अधिक वेतन पर पीएफ कटवाना अब पूरी तरह कर्मचारी की इच्छा पर निर्भर होगा।
नए नियमों के तहत यदि किसी कर्मचारी की बेसिक सैलरी 15,000 रुपए या उससे अधिक है, तो केवल 15,000 रुपए तक के वेतन पर 12% यानी 1,800 रुपए का पीएफ योगदान अनिवार्य होगा। इससे ज्यादा का कंट्रीब्यूशन स्वैच्छिक माना जाएगा। बुधवार को नोटिफाई की गई एम्प्लॉइज प्रोविडेंट फंड्स स्कीम, 2026 के प्रावधानों के अनुसार, "कोई कर्मचारी कानूनी वेतन सीमा से ज्यादा वेतन पर कानूनी दर या उससे ज्यादा किसी भी दर पर स्वैच्छिक आधार पर अतिरिक्त योगदान करने का विकल्प चुन सकता है।
उदाहरण के लिए, यदि किसी कर्मचारी की बेसिक सैलरी 50,000 रुपए है, तो पहले कई संस्थानों में पूरी सैलरी पर पीएफ कटता था। अब कंपनी के लिए केवल 15,000 रुपए की सीमा तक 1,800 रुपए का योगदान अनिवार्य होगा। कर्मचारी चाहे तो शेष वेतन पर भी स्वैच्छिक पीएफ योगदान जारी रख सकता है, या फिर उसे अपनी टेक-होम सैलरी का हिस्सा बना सकता है।
इस बदलाव से उन कर्मचारियों की इन-हैंड सैलरी बढ़ सकती है, जो अतिरिक्त पीएफ योगदान नहीं कराना चाहते। वहीं, कंपनियों पर भी अधिक वेतन वाले कर्मचारियों के लिए अतिरिक्त अनिवार्य पीएफ योगदान का बोझ नहीं रहेगा।