सत्यजीत रे से शाहरुख खान तक: इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल ऑफ दिल्ली में T.R.I.S. का भव्य सिनेमा आर्काइव

Edited By Updated: 23 Mar, 2026 03:48 PM

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भारतीय और विश्व सिनेमा के महान कलाकारों, फिल्मों और उनके अद्वितीय इतिहास को एक ही मंच पर देखने का दुर्लभ अवसर इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल ऑफ दिल्ली (IFFD) में मिला, जहां टुली रिसर्च सेंटर फॉर इंडिया स्टडीज़ (T.R.I.S.) द्वारा एक विशेष प्रदर्शनी श्रृंखला...

नई दिल्ली। भारतीय और विश्व सिनेमा के महान कलाकारों, फिल्मों और उनके अद्वितीय इतिहास को एक ही मंच पर देखने का दुर्लभ अवसर इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल ऑफ दिल्ली (IFFD) में मिला, जहां टुली रिसर्च सेंटर फॉर इंडिया स्टडीज़ (T.R.I.S.) द्वारा एक विशेष प्रदर्शनी श्रृंखला का आयोजन किया गया।

इस भव्य प्रदर्शनी का क्यूरेशन प्रसिद्ध कला अभिलेखागार विशेषज्ञ नेविल तुली द्वारा किया गया है, जिसमें सिनेमा के विभिन्न युगों को दर्शाने वाले दुर्लभ पोस्टर, मेमोराबिलिया, फिल्म आर्ट और ऐतिहासिक संग्रह को प्रदर्शित किया गया है। इस प्रदर्शनी में सत्यजीत रे की सादगीपूर्ण प्रतिभा से लेकर राज कपूर, दिलीप कुमार और देव आनंद जैसे दिग्गजों की लोकप्रियता, धर्मेंद्र और शर्मिला टैगोर की अदाकारी, तथा शाहरुख खान, सलमान खान और आमिर खान की आधुनिक स्टारडम तक—सिनेमा के कई युगों को एक ही छत के नीचे प्रस्तुत किया गया है।

प्रदर्शनी का एक प्रमुख आकर्षण “द गोल्डन एज ऑफ हॉलीवुड (1910–1960)” है, जिसमें साइलेंट फिल्मों से लेकर ग्लोबल स्टारडम के उदय तक के सफर को दर्शाया गया है। इसके साथ ही “हाइलाइट्स ऑफ इंडियन सिनेमैटोग्राफी (1913–1973)” में भारतीय सिनेमा के महान सिनेमैटोग्राफर्स के योगदान को सम्मान दिया गया है।

“द हार्ट ऑफ सिनेमा” शीर्षक प्रदर्शनी में पुराने दौर के सॉन्ग-सिनॉप्सिस बुकलेट्स को प्रदर्शित किया गया है, जो उस समय दर्शकों के लिए मार्गदर्शक और प्रचार माध्यम दोनों का काम करते थे। इसके अलावा “बॉम्बे सिनेमा के ऐतिहासिक फिल्म आर्टवर्क (1940–80)” में शोले, गाइड, पाकीज़ा और दीवार जैसी क्लासिक फिल्मों के मूल पोस्टर और आर्टवर्क प्रदर्शित किए गए हैं। सत्यजीत रे पर आधारित एक विशेष प्रदर्शनी में फोटोग्राफर नेमाई घोष द्वारा खींची गई दुर्लभ तस्वीरों के माध्यम से उनके रचनात्मक जीवन की झलक दिखाई गई है। अंतरराष्ट्रीय सिनेमा के प्रभाव को दर्शाने के लिए “विंटेज पोलिश और जापानी पोस्टर्स (1950–70)” भी शामिल किए गए हैं, जो वैश्विक फिल्म प्रचार की अनूठी शैली को प्रस्तुत करते हैं।

“मुगल-ए-आजम” पर आधारित एक विशेष ट्रिब्यूट प्रदर्शनी भी दर्शकों के लिए आकर्षण का केंद्र रही, जिसमें इस ऐतिहासिक फिल्म से जुड़े कई दुर्लभ संग्रह प्रदर्शित किए गए। एक अन्य खास प्रदर्शनी “ट्रिनिटी टू ट्रिनिटी” में भारतीय सिनेमा के अलग-अलग युगों के तीन-ोतीन सितारों की विरासत को दर्शाया गया है, जिसमें देव-राज-दिलीप से लेकर सलमान-आमिर-शाहरुख तक की यात्रा को दिखाया गया है। इसके साथ ही धर्मेंद्र, शक्ति सामंता और शर्मिला टैगोर जैसे महान कलाकारों को समर्पित विशेष प्रदर्शनियां भी आयोजित की गईं।

इन सभी प्रदर्शनों में पोस्टर, तस्वीरें, बुकलेट्स, पंपलेट्स और फिल्म जुबली ट्रॉफियों का विशाल संग्रह शामिल है, जो यह दर्शाता है कि सिनेमा केवल स्क्रीन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह हमारी संस्कृति और समाज का अहम हिस्सा है। T.R.I.S. एक स्वतंत्र ट्रस्ट है, जो समकालीन भारत अध्ययन को बढ़ावा देने के लिए कार्य कर रहा है। इसका डिजिटल प्लेटफॉर्म शोध और ज्ञान के लिए ओपन एक्सेस उपलब्ध कराता है।

इस अवसर पर नेविल तुली ने कहा कि सिनेमा सिर्फ मनोरंजन का माध्यम नहीं है, बल्कि यह हमारे समय की यादों, कला और विचारों का महत्वपूर्ण स्रोत है। इन प्रदर्शनों के माध्यम से सिनेमा को एक शैक्षणिक संसाधन के रूप में पुनः स्थापित करने का प्रयास किया जा रहा है।

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