Edited By Tanuja,Updated: 23 Mar, 2026 01:52 PM

ईरान में एक वायरल वीडियो में IRGC जवान मिसाइल पर स्पेन के पीएम पेड्रो सांचेज की तस्वीर चिपकाते दिखे। यह कदम अमेरिका-इजराइल की आलोचना करने पर “समर्थन” जताने का तरीका माना जा रहा है। इससे जंग के बीच राजनीतिक संदेश और वैश्विक कूटनीतिक तनाव और बढ़ गया...
International Desk: पश्चिम एशिया में जारी भीषण युद्ध के बीच एक हैरान करने वाली घटना सामने आई है। ईरान में सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स का एक जवान बैलिस्टिक मिसाइल पर पेड्रो सांचेज की तस्वीर का स्टिकर लगाता नजर आ रहा है।यह घटना सिर्फ एक तस्वीर नहीं, बल्कि जंग के बीच चल रहे “मैसेज वार” का हिस्सा मानी जा रही है। दरअसल, पेड्रो सांचेज उन गिने-चुने पश्चिमी नेताओं में शामिल हैं जिन्होंने अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान पर किए जा रहे हमलों की खुलकर आलोचना की थी। उन्होंने इस युद्ध को गलत बताया था।
ईरान में उनके इस बयान को सकारात्मक रूप में लिया गया। वहां के लोगों और सैनिकों ने इसे अपने पक्ष में समर्थन के रूप में देखा। इसी के चलते IRGC के जवानों ने एक अनोखे तरीके से प्रतिक्रिया दी और सांचेज की तस्वीर वाले स्टिकर मिसाइलों पर चिपकाने शुरू कर दिए। यह तस्वीर कई संकेत देती है। पहली बात, ईरान वैश्विक स्तर पर अपने समर्थकों की पहचान कर रहा है और जो भी देश या नेता उसके पक्ष में बोलता है, उसे वह प्रतीकात्मक रूप से “दोस्त” के रूप में पेश करता है। दूसरी बात, यह दिखाता है कि युद्ध के माहौल में भी सैनिकों के बीच एक अलग तरह का मनोवैज्ञानिक और प्रतीकात्मक खेल चल रहा है।
तीसरी और अहम बात यह है कि यह स्थिति खुद पेड्रो सांचेज के लिए असहज हो सकती है। उन्होंने युद्ध की आलोचना की थी, लेकिन अब उनकी तस्वीर मिसाइल जैसे हथियार पर दिखाई दे रही है, जो एक अलग राजनीतिक संदेश देता है। अगर मौजूदा हालात की बात करें तो अमेरिका-इज़राइल और ईरान के बीच चल रहा युद्ध अब चौथे सप्ताह में पहुंच चुका है। दोनों पक्षों के बीच लगातार एयर स्ट्राइक और मिसाइल हमले जारी हैं। इस बीच होर्मुज जलडमरूमध्य अभी भी बंद है, जो वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग 20% संभालता है। इसके बंद होने से दुनिया भर में ईंधन की कीमतों में तेजी देखी जा रही है और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ रहा है।कुल मिलाकर, यह घटना सिर्फ एक वायरल वीडियो नहीं, बल्कि यह दिखाती है कि आधुनिक युद्ध केवल हथियारों से नहीं, बल्कि प्रतीकों, संदेशों और मनोवैज्ञानिक रणनीतियों से भी लड़ा जा रहा है।