Edited By Tanuja,Updated: 23 Mar, 2026 04:00 PM

पश्चिम एशिया में जारी अमेरिका-इज़राइल और ईरान युद्ध के बीच भारतीय LPG टैंकर होर्मुज जलडमरूमध्य पार करने की कोशिश कर रहे हैं। ईरान के नियंत्रण, जहाजों की जांच और युद्ध के खतरे के कारण समुद्री रास्ता जोखिम भरा बना हुआ है, जिससे भारत की ऊर्जा आपूर्ति...
International Desk: पश्चिम एशिया में जारी अमेरिका, इज़राइल और ईरान के बीच युद्ध का असर अब समुद्र तक साफ दिखाई दे रहा है। इसी बीच दो भारतीय LPG टैंकर Pine Gas और Jag Vasant फारस की खाड़ी से निकलकर होर्मुज जलडमरूमध्य पार करने के लिए आगे बढ़ चुके हैं। ये जहाज ईरान के लारक और केशम द्वीपों के पास से गुजर रहे हैं और किसी भी समय इस संवेदनशील रास्ते को पार कर सकते हैं। यह सफर इसलिए बेहद महत्वपूर्ण और खतरनाक माना जा रहा है क्योंकि होर्मुज जलडमरूमध्य इस समय युद्ध का सबसे बड़ा केंद्र बन चुका है। दुनिया का करीब 20% तेल और गैस इसी रास्ते से गुजरता है, लेकिन मौजूदा संघर्ष के कारण यह मार्ग लगभग बाधित हो चुका है।
जहाजों को गुजरने से पहले कड़ी जांच से गुजरना पड़ रहा है और कई जगहों पर हमलों का खतरा बना हुआ है। युद्ध की शुरुआत 28 फरवरी 2026 को हुई थी, जब अमेरिका और इजराइल ने मिलकर ईरान के ठिकानों पर हमले किए। इन हमलों में ईरान के सैन्य और परमाणु ढांचे को निशाना बनाया गया। इसके जवाब में ईरान ने इजराइल पर मिसाइल हमले किए और खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी ठिकानों को टारगेट किया। इसके साथ ही ईरान ने समुद्री रास्तों पर दबाव बनाना शुरू कर दिया, जिससे होर्मुज जलडमरूमध्य जंग का अहम मोर्चा बन गया। इस तनाव के कारण भारत के कई जहाज इस क्षेत्र में फंस गए। शुरुआत में 28 भारतीय जहाज यहां मौजूद थे, जिनमें से अब भी 22 जहाज पश्चिमी हिस्से में फंसे हुए हैं।
इन जहाजों पर 600 से ज्यादा भारतीय नाविक सवार हैं, जो लगातार जोखिम में काम कर रहे हैं। इन जहाजों में LPG, कच्चा तेल, गैस और अन्य जरूरी सामान लदे हुए हैं। हालांकि कुछ जहाज सुरक्षित निकलने में सफल रहे हैं। MT Shivalik और MT Nanda Devi नाम के LPG टैंकर भारत पहुंच चुके हैं, जो बड़ी मात्रा में गैस लेकर आए थे। इसके अलावा Jag Laadki और Jag Prakash जैसे जहाज भी सुरक्षित मार्ग पार कर चुके हैं। इससे उम्मीद बनी है कि बाकी जहाज भी धीरे-धीरे निकल पाएंगे। लेकिन स्थिति अभी भी पूरी तरह सुरक्षित नहीं है। रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान ने इस क्षेत्र में कड़ा नियंत्रण कर रखा है। हर जहाज की जांच की जा रही है और कुछ मामलों में भारी शुल्क लेकर ही गुजरने की अनुमति दी जा रही है। यह दिखाता है कि ईरान इस समुद्री रास्ते को एक रणनीतिक हथियार की तरह इस्तेमाल कर रहा है।
इस समय फारस की खाड़ी में करीब 500 टैंकर जहाज मौजूद हैं, जो या तो इंतजार कर रहे हैं या सुरक्षित रास्ते की तलाश में हैं। इसमें तेल, गैस और केमिकल टैंकर शामिल हैं। इससे वैश्विक सप्लाई चेन पर बड़ा असर पड़ रहा है। भारत के लिए यह स्थिति इसलिए चिंता का विषय है क्योंकि देश अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है। अगर होर्मुज का रास्ता लंबे समय तक बाधित रहता है, तो LPG, पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ सकती हैं और आम लोगों पर इसका सीधा असर पड़ सकता है।