Edited By Niyati Bhandari,Updated: 10 Apr, 2026 07:22 AM

Aaj Ka Panchang: 10 अप्रैल 2026, शुक्रवार का दिन हिन्दू पंचांग के अनुसार विशेष महत्व रखता है। इस दिन वैशाख मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि रात्रि 11:16 बजे तक रहेगी, जिसके बाद नवमी तिथि प्रारंभ होगी। अष्टमी साधना, उपासना और आत्मचिंतन के लिए उपयुक्त...
Aaj Ka Panchang: 10 अप्रैल 2026, शुक्रवार का दिन हिन्दू पंचांग के अनुसार विशेष महत्व रखता है। इस दिन वैशाख मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि रात्रि 11:16 बजे तक रहेगी, जिसके बाद नवमी तिथि प्रारंभ होगी। अष्टमी साधना, उपासना और आत्मचिंतन के लिए उपयुक्त मानी जाती है, जबकि नवमी धर्मकर्म और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक है।

संवत एवं पंचांग विवरण
यह दिन विक्रमी संवत 2083 के चैत्र मास का 28वां दिन है। राष्ट्रीय शक संवत 1948 के अनुसार चैत्र मास की 20वीं तिथि है। हिजरी संवत 1447 के शव्वाल महीने की 21वीं तारीख भी इसी दिन पड़ती है, जो विभिन्न कालगणनाओं का सुंदर समन्वय दर्शाती है।
सूर्योदय एवं सूर्यास्त
जालंधर समयानुसार सूर्योदय प्रातः 6:10 बजे और सूर्यास्त सायं 6:49 बजे होगा। यह समय दैनिक कार्यों और धार्मिक अनुष्ठानों के निर्धारण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

नक्षत्र एवं योग
आज दिन की शुरुआत पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र से होगी, जो दोपहर 11:28 बजे तक रहेगा, इसके बाद उत्तराषाढ़ा नक्षत्र प्रारंभ होगा। पूर्वाषाढ़ा विजय और ऊर्जा का प्रतीक है, जबकि उत्तराषाढ़ा स्थिरता और नेतृत्व का द्योतक है। इस दिन शिव योग सायं 6:31 बजे तक रहेगा, जिसके बाद सिद्ध योग आरंभ होगा। शिव योग को अत्यंत शुभ और फलदायी माना जाता है, वहीं सिद्ध योग में कार्यों की सफलता सुनिश्चित होती है।
चंद्रमा की स्थिति
चंद्रमा धनु राशि में सायं 6:04 बजे तक रहेगा और इसके बाद मकर राशि में प्रवेश करेगा। यह परिवर्तन मानसिक स्थिति में बदलाव लाता है। धनु में आशावाद और मकर में गंभीरता एवं अनुशासन बढ़ता है।
दिशा शूल एवं राहु काल
इस दिन दिशा शूल पश्चिम और नैऋत्य दिशा में रहेगा, अतः इन दिशाओं में यात्रा से बचना चाहिए। राहु काल प्रातः 10:30 बजे से दोपहर 12:00 बजे तक रहेगा, जो शुभ कार्यों के लिए अशुभ माना गया है।

ग्रहों की स्थिति
सूर्य, मंगल और शनि मीन राशि में स्थित हैं, जो आध्यात्मिकता को बढ़ाते हैं। बुध और राहु कुंभ में बुद्धि और नवीनता का संचार करते हैं। गुरु मिथुन में ज्ञान और संवाद को प्रबल करता है। शुक्र मेष में ऊर्जा और आकर्षण देता है, जबकि केतु सिंह में अहंकार त्याग का संकेत देता है।
समग्र फल
यह दिन आत्मविश्लेषण, संयम और आध्यात्मिक उन्नति के लिए अत्यंत अनुकूल है। उचित साधना और विवेकपूर्ण निर्णय इस दिन विशेष फलदायी सिद्ध हो सकते हैं।
