Edited By Sarita Thapa,Updated: 12 Apr, 2026 04:13 PM

महान वैज्ञानिक अल्बर्ट आइंस्टीन हर जगह अपने सिद्धांतों पर भाषण देने के लिए बुलाए जाते थे। उनका भाषण इतना प्रसिद्ध था कि जहां भी वह भाषण देते, लोग उत्सुकता से सुनते। आइंस्टीन का एक ड्राइवर था, जो उनकी गाड़ी चलाता और हर सभा में पीछे बैठकर भाषण सुनता।
Albert Einstein Story : महान वैज्ञानिक अल्बर्ट आइंस्टीन हर जगह अपने सिद्धांतों पर भाषण देने के लिए बुलाए जाते थे। उनका भाषण इतना प्रसिद्ध था कि जहां भी वह भाषण देते, लोग उत्सुकता से सुनते। आइंस्टीन का एक ड्राइवर था, जो उनकी गाड़ी चलाता और हर सभा में पीछे बैठकर भाषण सुनता। एक दिन उसने आइंस्टीन से कहा, "सर, आप जानते हैं। मैंने आपका पूरा भाषण याद कर लिया है। अब अगर आप चाहें, तो मैं भी मंच पर जाकर बोल सकता हूं।
आइंस्टीन मुस्कुराए। पहले तो उन्हें विश्वास नहीं हुआ, लेकिन फिर उन्होंने कहा, "ठीक है, अगली बार नई जगह पर मेरा भाषण होना है, जहां मुझे कोई नहीं पहचानता इसलिए हम अदला-बदली करेंगे। तुम मंच पर जाओगे और मैं ड्राइवर की टोपी पहनकर पीछे बैठूंगा।"
अगले दिन सभा में ऐसा ही हुआ। आइंस्टीन ने ड्राइवर की वर्दी पहन ली और ड्राइवर मंच पर चढ़ गया। जैसे ही उसने बोलना शुरू किया, श्रोताओं की तालियां गूंज उठीं। उसने हूबहू वैसा ही भाषण दिया जैसा आइंस्टीन दिया करते थे।

तभी सभा के बाद एक प्रोफैसर खड़ा हुआ और उसने एक कठिन सवाल पूछ लिया। आइंस्टीन घबरा गए कि अब तो राज खुल जाएगा। मगर ड्राइवर ने बिना पलक झपकाए मुस्कुराकर उत्तर दिया, "अरे, यह सवाल तो इतना आसान है कि इसका उत्तर मेरा ड्राइवर भी दे सकता है। जरा उससे पूछिए।"
इसके बाद उसने इशारा उस ओर किया जहां असली आइंस्टीन बैठे थे। आइंस्टीन भी यह देखकर हैरान रह गए कि उनका ड्राइवर कितनी बुद्धिमानी से मुश्किल स्थिति को संभाल गया। प्रसंग का सार यह है कि जब आप विद्वानों, ईमानदार और सकारात्मक लोगों के साथ रहते हैं, तो उनकी बातें व उनका दृष्टिकोण आप में उतरने लगता है।

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