Nirjala Ekadashi 2026 Date: एक व्रत और 24 का पुण्य! जानें कब है साल की सबसे कठिन निर्जला एकादशी, शुभ मुहूर्त और भीमसेनी एकादशी की रोचक कथा

Edited By Updated: 23 May, 2026 07:35 AM

nirjala ekadashi 2026 date

Nirjala Ekadashi 2026: निर्जला एकादशी 2026 का व्रत 25 जून को रखा जाएगा। जानें साल की सबसे बड़ी एकादशी का शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, कथा, महत्व, पारण का समय और क्यों भीम ने रखा था यह कठिन व्रत।

Nirjala Ekadashi 2026: हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का विशेष महत्व है, लेकिन ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी, जिसे निर्जला एकादशी कहा जाता है, सभी 24 एकादशियों में सर्वश्रेष्ठ और फलदायी मानी गई है। इसे भीमसेनी एकादशी या पांडव एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। मान्यता है कि इस एक व्रत को रखने से साल की सभी एकादशियों का पुण्य मिल जाता है और जीवन के समस्त पाप नष्ट हो जाते हैं।

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निर्जला एकादशी 2026 तिथि और शुभ मुहूर्त
वर्ष 2026 में निर्जला एकादशी की तिथि को लेकर पंचांग के अनुसार गणना इस प्रकार है:
एकादशी तिथि प्रारंभ: 24 जून 2026 को शाम 06:12 बजे से।
एकादशी तिथि समापन: 25 जून 2026 को रात 08:09 बजे तक।
उदया तिथि के अनुसार व्रत: गुरुवार, 25 जून 2026 को रखा जाएगा।
व्रत पारण का समय: 26 जून 2026 को सुबह 05:25 से 08:13 के बीच।

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भीमसेनी एकादशी की रोचक कथा
महर्षि वेद व्यास पांचों पांडव पुत्रों युधिष्ठिर, अर्जुन, भीम, नकुल और सहदेव को पुरुषार्थ, धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष देने वाले एकादशी व्रत का संकल्प करा रहे थे।

तब भीम ने महर्षि से बोला कि “हे पितामह आप एक माह में दो बार आने वाली एकादशियों के उपवास की बात कर रहे है। यहां मैं तो एक दिन में कई बार भोजन करता हूं। भोजन के बिना मैं एक समय भी नहीं रह सकता हूं। मेरे पेट में अग्नि का वास है, जो ज्यादा अन्न खाने से ही शांत होती है। यदि मैं कोशिश करूं तो वर्ष में एक एकादशी का व्रत कर सकता हूं। अतः आप मुझे कोई एक ऐसा व्रत बताएं, जिसके करने से मुझे भी स्वर्ग प्राप्त हो सके।”

तब महर्षि वेद व्यास बोले, हे महाबली भीम! “तुम पूरे वर्ष में आने वाले एकादशियों में व्रत न रख कर सिर्फ ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को निर्जल हो कर व्रत रखो तो तुमको सभी एकादशी का फल मिलेगा।” 

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निर्जला एकादशी व्रत का महत्व और धार्मिक लाभ
इस एक दिन निर्जल व्रत रखने से मनुष्य पापों से मुक्त हो जाता है, मृत्यु के समय भयानक यमदूत नहीं दिखाई देते। भगवान श्री हरि के दूत स्वर्ग से आकर मृत्यु को प्राप्त व्यक्ति को पुष्कर विमान पर बैठाकर स्वर्ग ले जाते हैं। भीम इस व्रत को रखने को तैयार हो गए, इस वजह से इसको पांडव एकादशी या भीमसेन एकादशी भी कहां जाता है।

निर्जला एकादशी पूजा विधि
निर्जला एकादशी के दिन सूर्य उदय से पहले उठना चाहिए और प्रातः काल स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करना चाहिए और भगवान विष्णु की पीले चन्दन, पीले फल फूल से पूजा करनी चाहिए और भगवान को पीली मिठाई भी अर्पित करनी चाहिए। फिर एक आसन पर बैठ कर ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः मंत्र का 108 बार जाप करना चाहिए। इस दिन तुलसी और बिल्व पत्र भूल कर भी तोड़ना नहीं चाहिए। एकादशी के दिन चावल नहीं खाने चाहिए | इस से घर में क्लेश होता है। जिस घर में अशांति होती है उस घर में देवी- देवता कृपा नहीं करते हैं। पूजा करने के पश्चात जरूरतमंद लोगों को फल, अन्न, छतरी, जूता, पंखा और शरबत आदि दान करना चाहिए। इस दिन जल भर कर कलश का दान भी किया जाता है। व्रत से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु दीर्घ आयु और मोक्ष का वरदान देते हैं।

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