Edited By Niyati Bhandari,Updated: 17 Apr, 2026 10:56 AM

Arunaya Pehowa: जानिए, आनंद रामायण के अनुसार श्रीराम के हरियाणा प्रवास और अरूणाय (पिहोवा) में संगमेश्वर महादेव मंदिर की स्थापना की रोचक कथा। यहां श्रीराम और भील राजा गुही का मिलन हुआ था।
Arunaya Pehowa: भारतदेश में दो प्रकार की रामायण को महत्व दिया गया है। उत्तर रामायण जो कि उत्तर भारत में प्रचलित है, और दूसरी है आंनद रामायण जो कि दक्षिण भारत में प्रचलित है, दोनों ही रामायण में कुछ वृतांत को लेकर मतभेद भी पाये जाते हैं। इसीलिये उत्तर भारत में उत्तर रामायण को ज्यादा महत्व दिया जाता है और बाकी जगहों पर आंनद रामायण को ज्यादा महत्व दिया जाता है।
आंनद रामायण के अनुसार श्रीराम चंद्र जी को 14 वर्ष का वनवास होने के पश्चात श्री राम जी, सीता माता व लक्ष्मण जी के साथ अरावली की पहाड़ियों से होते हुए आज के हरियाणा राज्य के पिहोवा क्षेत्र (कुरुक्षेत्र) में पधारे। जो कि प्राचीन समय में भीलों के राज्य की राजधानी थी। वहां पर उनकी मित्रता भीलों के राजा गुही से हुई और गुही व श्रीराम जी के ईष्ट देव भगवान शंकर होने के कारण यहां पर दोनों ने एक शिवालय की स्थापना की जिसका नाम पड़ा संगमेश्वर।
यह नाम गुही और श्रीराम जी के संग (मिलन) होने और दोनों के ईष्ट भगवान शंकर जी होने के कारण संगमेश्वर धाम पड़ा। आज के समय पर इस स्थान पर अरूणाय नामक प्रसिद्ध मंदिर है, जिसमें संगमेश्वर शिवलिंग स्थापित है। जो कि भगवान शिव को समर्पित एक दिव्य और सिद्ध स्थान है। उक्त स्थान का अरूणाय नाम प्रसिद्ध होने का कारण इसके नाम में ही छिपा है। अरूण का अर्थ होता है सूर्य और इस प्रकार अरूणाय अर्थात जहां स्वयं सूर्य का आगमन हुआ हो। श्रीराम चंद्र जी सूर्यवंशी कुल से थे और स्वयं सूर्य के समान तप तेज से परिपूर्ण श्रीहरि के अवतार के रूप में उक्त स्थान पर पधारे थे, जो कि अपने आप में प्रमाण है कि श्रीराम जी का आगमन इस धरती पर हुआ था। इसीलिये उक्त स्थान को अरूणाय कहकर संबोधित किया गया है। इसके पश्चात श्रीराम जी ने जयंत नगरी के लिये प्रस्थान किया।
Sanjay Dara Singh
AstroGem Scientist
LLB., Graduate Gemologist GIA (Gemological Institute of America), Astrology, Numerology and Vastu (SSM).