Bada Mangal 2026 Last Mangalwar : आखिरी बड़े मंगल पर ऐसे करें हनुमान जी की पूजा और पाएं मनोकामना पूर्ति

Edited By Updated: 22 Jun, 2026 04:17 PM

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सनातन परंपरा में ज्येष्ठ के महीने में पड़ने वाले मंगलवार का विशेष महत्व है, जिन्हें बड़ा मंगल या बुढ़वा मंगल कहा जाता है। साल 2026 में जेठ के महीने में अद्भुत संयोग देखने को मिला है, जहाँ भक्तों को 4 या 5 नहीं बल्कि पूरे 8 बड़े मंगल का आशीर्वाद मिला...

Bada Mangal 2026 Last Mangalwar Date : सनातन परंपरा में ज्येष्ठ के महीने में पड़ने वाले मंगलवार का विशेष महत्व है, जिन्हें बड़ा मंगल या बुढ़वा मंगल कहा जाता है। साल 2026 में जेठ के महीने में अद्भुत संयोग देखने को मिला है, जहाँ भक्तों को 4 या 5 नहीं बल्कि पूरे 8 बड़े मंगल का आशीर्वाद मिला है। कल यानी 23 जून 2026 को इस साल का आठवां और आखिरी बड़ा मंगल है। मान्यता है कि आखिरी बड़े मंगल पर बजरंगबली की आराधना करने से पूरे महीने की पूजा का पुण्यफल एक साथ मिल जाता है। आइए जानते हैं इस अंतिम बड़े मंगल की महिमा, शुभ मुहूर्त और पुण्यलाभ पाने के अचूक उपाय।

आखिरी बड़े मंगल का धार्मिक महत्व
पौराणिक कथाओं के अनुसार, ज्येष्ठ के महीने में ही त्रेतायुग में भगवान हनुमान की मुलाकात प्रभु श्री राम से हुई थी। इसके अलावा, एक अन्य मान्यता के अनुसार इसी महीने भीम का घमंड तोड़ने के लिए हनुमान जी ने एक वृद्ध वानर का रूप धारण किया था, इसलिए इसे 'बुढ़वा मंगल' भी कहते हैं। आखिरी बड़े मंगल पर पूजा करने से जीवन के सभी बड़े संकट, कर्ज और कुंडली के मंगल दोषों से मुक्ति मिलती है।

कैसे करें पूजा जिससे मिले पूरा पुण्यलाभ?

सुबह का संकल्प और स्नान
कल सुबह सूर्योदय से पहले उठकर स्नान आदि से निवृत्त हो जाएं। यदि संभव हो तो लाल रंग के वस्त्र धारण करें। इसके बाद घर के मंदिर में या हनुमान मंदिर जाकर व्रत का संकल्प लें।

हनुमान जी का दिव्य श्रृंगार
हनुमान जी की प्रतिमा के सामने चमेली के तेल का दीपक जलाएं। बजरंगबली को सिंदूर और चमेली का तेल अर्पित करें। ऐसा करने से ग्रह दोष शांत होते हैं।

पसंदीदा भोग लगाएं
आखिरी बड़े मंगल पर हनुमान जी को बेसन के लड्डू, बूंदी या फिर विशेष रूप से तुलसी दल के साथ हलवे का भोग लगाएं। याद रखें कि हनुमान जी को तुलसी बेहद प्रिय है, उनके भोग में तुलसी जरूर शामिल करें।

पाठ और आरती
आसन पर बैठकर हनुमान चालीसा, बजरंग बाण या फिर सुंदरकांड का पाठ करें। पाठ पूरा होने के बाद आरती करें और अपनी मनोकामना बाबा के सामने कहें।

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