भानु सप्तमी के दिन जरूर करें इन मंत्रों का जप, मिलेगा सेहत को लाभ

Edited By Jyoti, Updated: 22 May, 2022 11:54 AM

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वैशाख मास के कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि के दिन सूर्यदेव की उपासना करने का विधान है। कहा जाता इस दिन को जातक के लिए सूर्य को प्रसन्न करने का सर्वश्रेष्ठ

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वैशाख मास के कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि के दिन सूर्यदेव की उपासना करने का विधान है। कहा जाता इस दिन को जातक के लिए सूर्य को प्रसन्न करने का सर्वश्रेष्ठ अवसर होता है। तो वहीं ज्योतिष विशेषज्ञ बताते हैं कि सूर्य की पूजा से कुंडली में दोषों का शमन होने लगता है। इसके अलावा इस दिन सूर्यदेव को जल अर्पित करें और आदित्य स्तोत्र और सूर्य मंत्र का जाप करना भी मंगलकारी साबित हो सकता है, ऐसा करने से जातक स्वस्थ और निरोगी रहता है।

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तो आइए भानु सप्तमी के इस खास अवसर पर आपको बताते हैं कि ग्रहों के राजा सूर्य देव से जुड़े ऐसे मंत्र जिनका जप करने से जातक को कई तरह के लाभ प्राप्त होते हैं। इतना ही नहीं कहा जाता है जो व्यक्ति इन मंत्रों का जप करना उसे अपने जीवन के भीष्ण रोगों से नहीं, बल्कि कई अन्य तरह की परेशानियां से भी निजात मिलती है।

1. ॐ ह्रीं ह्रीं सूर्याय नमः।

2. ॐ ह्रीं ह्रीं सूर्याय सहस्रकिरणराय मनोवांछित फलम् देहि देहि स्वाहा।।

3. ॐ ऐहि सूर्य सहस्त्रांशों तेजो राशे जगत्पते, अनुकंपयेमां भक्त्या, गृहाणार्घय दिवाकर:।

4. ॐ ह्रीं घृणिः सूर्य आदित्यः क्लीं ॐ।

5. ऊं घृणिं सूर्य्य: आदित्य:।


इसके अलावा इस दिन सूर्य देव की पूजा के बाद इनकी इनमें से एक आरती का गुणगान जरूर करें-

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* ॐ जय सूर्य भगवान, जय हो दिनकर भगवान।
जगत् के नेत्रस्वरूपा, तुम हो त्रिगुण स्वरूपा।
धरत सब ही तव ध्यान, ॐ जय सूर्य भगवान।।
।।ॐ जय सूर्य भगवान...।।

सारथी अरुण हैं प्रभु तुम, श्वेत कमलधारी। तुम चार भुजाधारी।।
अश्व हैं सात तुम्हारे, कोटि किरण पसारे। तुम हो देव महान।।
।।ॐ जय सूर्य भगवान...।।

ऊषाकाल में जब तुम, उदयाचल आते। सब तब दर्शन पाते।।
फैलाते उजियारा, जागता तब जग सारा। करे सब तब गुणगान।।
।।ॐ जय सूर्य भगवान...।।

संध्या में भुवनेश्वर अस्ताचल जाते। गोधन तब घर आते।।
गोधूलि बेला में, हर घर हर आंगन में। हो तव महिमा गान।।
।।ॐ जय सूर्य भगवान...।।

देव-दनुज नर-नारी, ऋषि-मुनिवर भजते। आदित्य हृदय जपते।।
स्तोत्र ये मंगलकारी, इसकी है रचना न्यारी। दे नव जीवनदान।।
।।ॐ जय सूर्य भगवान...।।

तुम हो त्रिकाल रचयिता, तुम जग के आधार। महिमा तब अपरम्पार।।
प्राणों का सिंचन करके भक्तों को अपने देते। बल, बुद्धि और ज्ञान।।
।।ॐ जय सूर्य भगवान...।।

भूचर जलचर खेचर, सबके हों प्राण तुम्हीं। सब जीवों के प्राण तुम्हीं।।
वेद-पुराण बखाने, धर्म सभी तुम्हें माने। तुम ही सर्वशक्तिमान।।
।।ॐ जय सूर्य भगवान...।।

पूजन करतीं दिशाएं, पूजे दश दिक्पाल। तुम भुवनों के प्रतिपाल।।
ऋतुएं तुम्हारी दासी, तुम शाश्वत अविनाशी। शुभकारी अंशुमान।।
।।ॐ जय सूर्य भगवान...।।

ॐ जय सूर्य भगवान, जय हो दिनकर भगवान।
जगत् के नेत्रस्वरूपा, तुम हो त्रिगुण स्वरूपा।स्वरूपा।।
धरत सब ही तव ध्यान, ॐ जय सूर्य भगवान।।

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* जय जय जय रविदेव, जय जय जय रविदेव।
जय जय जय रविदेव, जय जय जय रविदेव॥

रजनीपति मदहारी, शतदल जीवनदाता।
षटपद मन मुदकारी, हे दिनमणि दाता॥

जग के हे रविदेव, जय जय जय रविदेव।
जय जय जय रविदेव, जय जय जय रविदेव॥

नभमंडल के वासी, ज्योति प्रकाशक देवा।
निज जन हित सुखरासी, तेरी हम सबें सेवा॥

करते हैं रविदेव, जय जय जय रविदेव।
जय जय जय रविदेव, जय जय जय रविदेव॥

कनक बदन मन मोहित, रुचिर प्रभा प्यारी।
निज मंडल से मंडित, अजर अमर छविधारी॥

हे सुरवर रविदेव, जय जय जय रविदेव।
जय जय जय रविदेव, जय जय जय रविदेव॥

 

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