Bihari Ji Charan Darshan on Akshaya Tritiya: आज होंगे वृंदावन के ठाकुर बांके बिहारी के चरण दर्शन

Edited By Updated: 30 Apr, 2025 09:20 AM

bihari ji charan darshan on akshaya tritiya

Bihari Ji Charan Darshan on Akshaya Tritiya 2025: आज अक्षय तृतीया के शुभ अवसर पर वृंदावन के ठाकुर बांके बिहारी अपने भक्तों को चरण दर्शन देंगे। साल में केवल एकमात्र अक्षय तृतीया के दिन ही ठाकुर बांके बिहारी महाराज भक्तों को स्वर्ण और रजत पाजेब धारण...

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Bihari Ji Charan Darshan on Akshaya Tritiya 2025: आज अक्षय तृतीया के शुभ अवसर पर वृंदावन के ठाकुर बांके बिहारी अपने भक्तों को चरण दर्शन देंगे। साल में केवल एकमात्र अक्षय तृतीया के दिन ही ठाकुर बांके बिहारी महाराज भक्तों को स्वर्ण और रजत पाजेब धारण कर चरण दर्शन देते हैं। उनके चरणों के समक्ष सवा किलो चंदन का गोला रखने का विधान है। बिहारी जी सुंदर वस्त्र धारण कर जगमोहन में विराजेंगे।

श्री ठाकुर बांके बिहारी मंदिर के सेवाधिकारी रोजू गोस्वामी जी ने पंजाब केसरी के संवाददाता विक्की शर्मा को बताया आज बिहारी जी को गर्मी में ठंडक देने के लिए चंदन और गुलाब जल, इत्र आदि सुगंधित और ठंडी वस्तुओं से श्रीअंग पर लेपन किया जाएगा। इसके अतिरिक्त सत्तू के लड्डू और शरबत निवेदित किए जाएंगे।

आज 30 अप्रैल को अक्षय तृतीया पर ठाकुर बांके बिहारी मंदिर प्रात: 8 बजे से रात 10 बजे तक खुलेगा और भक्तों को अपने प्यारे के खास दर्शन करने का पुण्य लाभ प्राप्त होगा। सामान्‍य दिनों में बांके बिहारी जी के चरण उनकी पोशाक में छिपे रहते हैं। वह किसी को भी दिखाई नहीं देते। साल में केवल अक्षय तृतीया पर उनके चरणों को निहारने का किसी विरले व्यक्ति को ही सौभाग्‍य मिलता है। इस दिन ठाकुर जी को विशेष पोशाक और श्रृंगार के साथ देखने का आनंद ही अलग होता है। 

वृंदावन के अन्य मंदिरों जिसमें मुख्य रूप से सप्त देवालय आते हैं ठाकुर राधा दामोदर, राधा रमन मंदिर, राधा गोपीनाथ, राधा गोविंद, राधा मदन मोहन, राधा गोकुलानंद, राधा श्याम सुंदर मंदिर में सेवा अधिकारियों के द्वारा ठाकुर जी को लगाए जाने वाले चंदन को घिसने का काम आरंभ कर दिया गया है। वृंदावन में चंदन श्रृंगार के ये अद्भुत दर्शनों की झांकी साल में केवल एक बार ही होती है। 

नई गाइडलाइन के अनुसार अक्षय तृतीया के दिन बांके बिहारी मंदिर में बच्‍चों, दिव्यांग और बुजुर्गों को मंदिर में न आने की सलाह दी गई है। एकल मार्ग रूट का पालन करें ताकि श्रद्धालुओं की भीड़ को नियंत्रित किया जा सके। पब्लिक एड्रेस सिस्टम से की जा रही एनाउसमेंट या सूचना को ध्यान से सुनें और उसके अनुसार ही चलें।

 

 

 

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