Edited By Sarita Thapa,Updated: 04 Oct, 2026 10:18 AM

शादियों में बढ़ती फिजूलखर्ची और सामाजिक कुरीतियों पर अंकुश लगाने के लिए पलवल में ब्राह्मण समाज ने हाल ही में हुई महा पंचायत में अहम फैसले लिए हैं। महा पंचायत में दहेज लेने-देने पर पूरी तरह रोक लगाने, मृत्युभोज बंद करने और विवाह समारोहों में होने...
पलवल (इंट): शादियों में बढ़ती फिजूलखर्ची और सामाजिक कुरीतियों पर अंकुश लगाने के लिए पलवल में ब्राह्मण समाज ने हाल ही में हुई महा पंचायत में अहम फैसले लिए हैं। महा पंचायत में दहेज लेने-देने पर पूरी तरह रोक लगाने, मृत्युभोज बंद करने और विवाह समारोहों में होने वाले अनावश्यक खर्च को सीमित करने का निर्णय लिया गया। इन फैसलों को धरातल पर लागू कराने के लिए गांव और सैक्टर स्तर पर समितियां गठित की जाएंगी।
सगाई से भात तक खर्च की सीमा तय
ब्राह्मण सभा के जिला अध्यक्ष विनोद शर्मा ने बताया कि महा पंचायत में शादी-विवाह के अलग-अलग आयोजनों में लेन-देन और लोगों की संख्या निर्धारित की गई है। सगाई में केवल एक रुपया और पांच जोड़ी कपड़े देने का फैसला हुआ। सगाई और गोद भराई में अधिकतम 5 लोग शामिल होंगे। लगन में केवल एक व्यक्ति जाएगा और एक रुपया दिया जाएगा। भात के न्यौते के लिए 11 महिलाएं और भात लेकर 11 पुरुष ही आएंगे। भात में एक तोला सोना, कपड़े और खर्च के लिए 2100 रुपए देने की अनुमति होगी।
दहेज पर रोक, 51 बाराती ही जाएंगे
महा पंचायत में दहेज प्रथा को समाप्त करने के लिए लेने-देने पर पूरी तरह रोक लगाने का फैसला किया गया। शादी में अधिकतम 51 बाराती शामिल होंगे। दोनों पक्षों की ओर से शाकाहारी भोजन की व्यवस्था रहेगी। लड़के और लड़की दोनों पक्षों के लोगों के लिए नशे पर पाबंदी रहेगी।
विवाह समारोह में डी.जे. और तेज संगीत बजाने पर भी रोक लगाने का निर्णय लिया गया। लड़की पक्ष की ओर से अधिकतम दो तोले सोने के गहने, 100 ग्राम चांदी, 11 जोड़ी कपड़े, संदूक या अलमारी और बैड ही दिए जा सकेंगे। समाज ने स्पष्ट किया कि इन सीमाओं का उद्देश्य परिवारों पर शादी के खर्च का बोझ कम करना और दिखावे की प्रवृत्ति को रोकना है।
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