पतंजलि विश्वविद्यालय हरिद्वार में ‘जनजातीय कार्य मंत्रालय के पदाधिकारियों का ‘चिंतन शिविर’ सम्पन्न

Edited By Updated: 02 May, 2026 08:27 AM

chintan shivir haridwar

जनजातीय कार्य मंत्रालय, भारत सरकार के पदाधिकारियों का 2 दिवसीय ‘चिंतन शिविर’ 30 अप्रैल से 1 मई, पतंजलि विश्वविद्यालय, हरिद्वार में सम्पन्न हुआ।

हरिद्वार (ब्यूरो): जनजातीय कार्य मंत्रालय, भारत सरकार के पदाधिकारियों का 2 दिवसीय ‘चिंतन शिविर’ 30 अप्रैल से 1 मई, पतंजलि विश्वविद्यालय, हरिद्वार में सम्पन्न हुआ। शिविर का आयोजन मंत्रालय द्वारा जनजातीय समुदायों के समग्र विकास के उद्देश्य से किया गया, जिसमें भारत सरकार का जनजातीय कार्य मंत्रालय एक नोडल मंत्रालय के अंतर्गत किया गया, जो देश में विभिन्न वर्गों के सामाजिक-आर्थिक विकास, स्वास्थ्य, शिक्षा, संस्कृति के संरक्षण हेतु नीतियां बनाने व लागू करने के लिए जिम्मेदार है। 

चिंतन शिविर में भारत के विभिन्न राज्यों के प्रधान सचिव, मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों, विशेषज्ञों और अन्य प्रतिनिधियों ने भाग लिया।  भारत सरकार के प्रतिनिधि मनीष त्रिपाठी ने जनजातीय विकास, अर्थव्यवस्था और सतत् आजीविका के क्षेत्र में जमीनी स्तर पर किए गए कार्यों को सांझा किया। ज्योतिषी व वास्तु विशेषज्ञ डॉ. जय मदान ने वास्तु के माध्यम से जीवन में संतुलन और सकारात्मकता बनाए रखने के उपाय बताए। 

उन्होंने वैदिक ग्रंथ ऋग्वेद में वर्णित पवित्र पेय ‘सोम’ का उल्लेख करते हुए बताया कि यह सोमलता से निर्मित औषधीय रस था, जिसे यज्ञों में देवताओं को अर्पित किया जाता था। ‘चंद्रमा का अमृत’ शरीर को शीतलता और आंतरिक प्रसन्नता प्रदान करने का प्रतीक माना गया है। उन्होंने आध्यात्मिक योग को तन, मन और आत्मा का समन्वय बताया, जो साधक को परमात्मा से जोड़ता है। ध्यान एवं चिंतन करने से जीवन में आनंद की अनुभूति होती है। इसके साथ ही, उन्होंने अपनी संतानों को केवल जैविक नहीं अपितु भविष्य की पीढ़ी के रूप में भी परिभाषित किया गया।

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