Jyeshtha Maah 2026: आज से शुरू हो रहा है पुण्य का महाकुंभ, 8 बड़े मंगल और अधिकमास का बन रहा है दुर्लभ संयोग

Edited By Updated: 02 May, 2026 08:23 AM

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Jyeshtha Maah 2026: ज्येष्ठ माह 2026 में 2 मई से शुरू हो रहा है। इस बार अधिकमास के कारण 8 बड़े मंगल पड़ेंगे। जानें इस महीने क्या करें और क्या न करें ताकि मिले भगवान विष्णु और हनुमान जी की विशेष कृपा।

Jyeshtha Maah 2026: हिंदू पंचांग के अनुसार, साल का सबसे गर्म और आध्यात्मिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण 'ज्येष्ठ माह' इस वर्ष 2 मई 2026 से प्रारंभ होने जा रहा है। इस महीने का समापन 29 जून 2026 को होगा। ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार, इस वर्ष ज्येष्ठ माह में अधिकमास का अद्भुत संयोग बन रहा है, जिससे यह महीना दो माह तक चलेगा। क्यों खास है इस बार का ज्येष्ठ? इस महीने का नाम ज्येष्ठ नक्षत्र के कारण पड़ा है, क्योंकि पूर्णिमा के दिन चंद्रमा ज्येष्ठ नक्षत्र में होता है। इस माह के स्वामी मंगल देव हैं। इस वर्ष अधिकमास होने की वजह से भक्तों को हनुमान जी की भक्ति के लिए 8 बड़े मंगल (बुढ़वा मंगल) का अवसर प्राप्त होगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी महीने शनि देव का जन्म हुआ था और प्रभु श्री राम की मुलाकात हनुमान जी से हुई थी।

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ज्येष्ठ महीने के मंगलवार की महिमा अपंरपार है, फिर चाहे वो चार बार आए या पांच बार। भारत के बहुत सारे इलाकों में इसे बड़ा मंगलवार भी कहा जाता है। इस रोज हनुमान जी के पूजन का खास महत्व माना गया है। एक महीने तक ज्येष्ठ के हर मंगलवार कुछ सरल से उपाय करने पर सारा साल शुभ परिणाम प्राप्त होते हैं। मंगल ग्रह से संबंधित हर समस्या का निदान हो जाता है। कुंडली में मंगल मारक, नीच या अस्त जैसा भी बुरा प्रभाव दे रहा हो केवल एक महीने तक उपाय कर लेने से कठिन और असाध्य समस्या का समाधान हो जाता है।

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सुबह सूर्योदय से पहले स्नान कर हनुमान जी के मंदिर जाकर उन्हें तुलसी के पत्तों की माला पहनाएं। हलवा-पूरी अथवा किसी अन्य मिष्ठान का भोग लगाएं। उनके स्वरूप के सामने आसन बिछाकर बैठ जाएं, फिर श्री हनुमान चालीसा, बजरंग बाण और श्री सुन्दरकाण्ड का पाठ करें।

जल, मीठा शर्बत, कच्ची लस्सी आदि का दान करें।

पानी वाले फल जैसे खरबूजा, तरबूज, खीरे आदि का दान करें।

आज के दिन मीठा बांटने का बहुत महत्व है, खासतौर पर लड्डू और केसरी रंग की मिठाई।

शनि के कोप से मुक्ति पाने के लिए मंगलवार की रात तुलसी, पीपल, हनुमान और शनि मंदिर में सरसों के तेल का दीपक जलाएं।

इसके अतिरिक्त काली दाल, काले वस्त्र, काले तिल, काला छाता व काली चप्पल का दान करें।

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