Edited By Tanuja,Updated: 02 May, 2026 03:58 PM
पूर्व कमांडो Lucky Bisht के दावों ने बलूचिस्तान को लेकर नई बहस छेड़ दी है। उन्होंने इसे “आज़ादी के करीब” बताया । Balochistan में दशकों पुराना संघर्ष जारी है और हालात बेहद जटिल बने हुए हैं।
International Desk: पूर्व रॉ एजेंट Lucky Bisht के एक सोशल मीडिया पोस्ट ने दक्षिण एशिया की राजनीति में हलचल पैदा कर दी है। उन्होंने दावा किया कि Balochistan अब स्वतंत्र राष्ट्र बनने की दिशा में बढ़ चुका है और पाकिस्तान का वहां से नियंत्रण कमजोर हो गया है। पोस्ट में यह भी दावा किया गया है कि Baloch Liberation Army ने 10 दिनों में 27 हमले किए, जिनमें 45 से ज्यादा पाकिस्तानी सैनिक मारे गए। साथ ही कहा गया कि पाकिस्तानी सेना इतनी कमजोर हो चुकी है कि नियमित गश्त करने से भी डर रही है। लकी बिष्ट जो एक पूर्व भारतीय सैन्य अधिकारी, एनएसजी कमांडो और सुरक्षा विशेषज्ञ हैं, ने दावा किया कि US State Department ने लाहौर से अपने कर्मियों को हटा लिया है और ब्रिटेन ने पूरे बलूचिस्तान को “नो-गो ज़ोन” घोषित कर दिया।
बलूच लिबरेशन आर्मी ने महज 10 दिन के अंदर पाकिस्तानी सेना के ऊपर 27 बार सटीक हमला किया है।
ग्राउंड इंटेल रिपोर्ट स्पष्ट करती है कि पाकिस्तान के 45 से ज्यादा सोल्जर मारे गए हैं और कई गंभीर रूप से घायल हुए हैं। जमीनी हकीकत यह है कि पाकिस्तानी सेना अब बलूचिस्तान में पेट्रोलिंग करने…
— Lucky Bisht (@iamluckybisht) May 2, 2026
उन्होंने कहा कि CIA और MI6 की कथित रिपोर्ट ने पाकिस्तान के सेना प्रमुख Asim Munir और सरकार की चिंता बढ़ा दी है। पोस्ट में यह भी दावा किया गया कि Baloch Liberation Army ने हाल के दिनों में कई हमले किए और पाकिस्तानी सेना पर भारी दबाव है। उन्होंने बताया कि बलूचिस्तान-पाकिस्तान विवाद नया नहीं, बल्कि 7 दशक से चला आ रहा एक लंबा संघर्ष है।पिछले दशकों में कई बार विद्रोह हुए, जिनमें Baloch Liberation Army (BLA) जैसे संगठनों ने पाकिस्तानी सेना और सरकारी ठिकानों को निशाना बनाया। इसके जवाब में पाकिस्तान ने इसे सुरक्षा और आतंकवाद का मुद्दा बताते हुए सैन्य कार्रवाई की।
The world will soon witness Balochistan as a free and independent nation. 🌍🕊️ #Balochistanhttps://t.co/XPbXXSiAKg
— Lucky Bisht (@iamluckybisht) May 1, 2026
चीनी कंपनी ने समेटा बोरिया-बिस्तर
यह संघर्ष तब और जटिल हो गया जब चीन ने China Pakistan Economic Corridor के तहत बलूचिस्तान में भारी निवेश किया। खासकर ग्वादर पोर्ट रणनीतिक रूप से बेहद अहम है। लेकिन स्थानीय लोगों के विरोध और उग्रवादी हमलों के कारण कई बार चीनी परियोजनाएं भी निशाने पर आई हैं, जिससे सुरक्षा चिंताएं बढ़ी हैं। बलूचिस्तान में पाकिस्तान का कंट्रोल कम होने कारण ग्वादर में काम कर रही चीनी कंपनी Han Geng Trade Company ने पाकिस्तान में अपना प्लांट बंद करने का फैसला किया है। दावा है कि कंपनी ने बलूचिस्तान में बढ़ते संघर्ष को देखते हुए बोरिया बिस्तर समेट लिया है । कंपनी ने अपने आधिकारिक बयान में कहा कि वह अब सामान्य तरीके से काम जारी नहीं रख सकती। हालांकि कंपनी के अनुसार, उसने सभी अंतरराष्ट्रीय मानकों और नियमों का पालन किया, लेकिन इसके बावजूद उसे जरूरी सरकारी मंजूरी नहीं मिली और उसका निर्यात बार-बार रुकता रहा। इससे कंपनी को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा।
#Breakingnews
आज 1 मई को ग्वादर (बलूचिस्तान) में चीनी कंपनी (Hangeng) द्वारा अपनी फैक्ट्री हमेशा के लिए बंद करने का आधिकारिक ऐलान पाकिस्तान के खोखले दावों की पोल खोलता है।
यह महज़ एक व्यावसायिक विफलता नहीं है, बल्कि इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि बलूचिस्तान में पाकिस्तान का कोई… pic.twitter.com/buvcFUFezK
— Lucky Bisht (@iamluckybisht) May 1, 2026
लगाया ये बहाना
कंपनी ने यह भी बताया कि पिछले कुछ महीनों में उसे वेतन, बिजली, जुर्माना और अन्य खर्चों का बोझ उठाना पड़ा, जिससे स्थिति और खराब हो गई। उनका कहना है कि समस्या सिर्फ तकनीकी नहीं, बल्कि नीतियों और सिस्टम से जुड़ी है।ग्वादर, जो कि China Pakistan Economic Corridor का अहम हिस्सा है, वहां से इस तरह का कदम उठना निवेश माहौल के लिए चिंता की बात मानी जा रही है। कंपनी ने साफ कहा कि निवेश के लिए स्थिर और स्पष्ट नीतियां जरूरी हैं। कंपनी ने अन्य निवेशकों को भी चेतावनी दी कि पाकिस्तान में निवेश करने से पहले नीतिगत और प्रशासनिक जोखिमों को अच्छे से समझ लेना चाहिए। कंपनी ने अपने कर्मचारियों से माफी मांगते हुए कहा कि उन्होंने हर संभव कोशिश की, लेकिन हालात ऐसे हो गए कि काम जारी रखना संभव नहीं रहा।
#BreakingNews STRATEGIC SHIFT THE REPUBLIC OF BALOCHISTAN DETERMINATION
While the world remains fixated on the US-Iran escalation, a deathly silence has descended upon the corridors of Rawalpindi. We have credible intelligence that a joint assessment by the CIA and MI6 has… pic.twitter.com/EIZ0SAIkf6
— Lucky Bisht (@iamluckybisht) May 1, 2026
बलूचिस्तान संघर्ष की शुरुआत (1947 के बाद)
1947 में पाकिस्तान बनने के समय बलूचिस्तान की स्थिति अलग थी। कुछ बलूच नेताओं का दावा था कि वे स्वतंत्र रहना चाहते थे लेकिन1948 में पाकिस्तान ने इसे अपने नियंत्रण में ले लिया। यहीं से असंतोष और विद्रोह की शुरुआत हुई। बलूचिस्तान में कई बार सशस्त्र विद्रोह हुए ।
- 1948 – पहला विरोध
- 1958-59 – सैन्य कार्रवाई
- 1973-77 – बड़ा विद्रोह, हजारों लोग मारे गए
- 2000 के बाद – आधुनिक उग्रवाद और आतंकी हमले
संघर्ष के मुख्य कारण
बलूचिस्तान–पाकिस्तान संघर्ष एक जटिल मुद्दा है, जिसमें संसाधनों के बंटवारे, राजनीतिक अधिकारों की कमी और सैन्य कार्रवाई प्रमुख कारण हैं। अलगाववादी संगठन सक्रिय हैं, जबकि पाकिस्तान इसे सुरक्षा चुनौती मानता है। चीन की मौजूदगी ने इस संघर्ष को और संवेदनशील बना दिया है। Balochistan पाकिस्तान का सबसे बड़ा प्रांत है, जो प्राकृतिक संसाधनों (गैस, सोना, तांबा) से भरपूर है। इसके बावजूद यह क्षेत्र विकास के मामले में सबसे पिछड़ा माना जाता है। बलूच समुदाय का आरोप है कि उनके प्राकृतिक संसाधनों गैस, सोना और खनिज का फायदा उन्हें नहीं मिल रहा और राजनीतिक अधिकार भी सीमित हैं।स्था नीय लोगों का आरोप है कि वे गरीबी की दलदल में धंसते जा रहे हैं जबकि इनका फायदा पंजाब और केंद्र सरकार ले रही है। बलूच नेताओं का कहना है कि उन्हें सत्ता में बराबर हिस्सेदारी नहीं मिलती। उन्होंने जबरन गायब किए जाने (missing persons) का मुद्दा भी उठाया और सैन्य ऑपरेशन और दमन के आरोप लगाए