Edited By Sarita Thapa,Updated: 01 Aug, 2026 08:01 PM

सनातन धर्म में शिव जी के प्रिय माह सावन का बहुत खास महत्व है। इस पावन महीने में जब भगवान गणेश की आराधना का महापर्व यानी गजानन संकष्टी चतुर्थी आती है, तो इसका महत्व कई गुना बढ़ जाता है।
Gajanana Sankashti Chaturthi 2026 : सनातन धर्म में शिव जी के प्रिय माह सावन का बहुत खास महत्व है। इस पावन महीने में जब भगवान गणेश की आराधना का महापर्व यानी गजानन संकष्टी चतुर्थी आती है, तो इसका महत्व कई गुना बढ़ जाता है। साल 2026 में यह व्रत 2 अगस्त रविवार को रखा जा रहा है। माना जाता है कि इस दिन सच्चे मन से और पूरे विधि-विधान पूजा करने और व्रत रखने से शुभ फलों की प्राप्ति होती है और जीवन के हर क्षेत्र में मनचाही सफलता मिलेगी। इस दिन अनजाने में की गई कुछ गलतियां पुण्य फल को नष्ट भी कर सकती हैं। तो आइए जानते हैं इस दिन किस्मत चमकाने के लिए आपको क्या करना चाहिए और किन चीजों से सख्त परहेज करना चाहिए।
संकष्टी चतुर्थी पर क्या करें ?
दूर्वा अवश्य चढ़ाएं
भगवान गणेश को प्रसन्न करने के लिए उन्हें दूर्वा जरूर चढ़ाएं, क्योंकि गणेश जी को दूर्वा बहुत प्रिय है। इस दिन बप्पा को 21 दूर्वा की गांठें बप्पा के मंत्रों का उच्चारण करते हुए उन्हें अर्पित करें। ऐसा करने से जीवन में आ रही परेशानियों से छुटकारा मिलता है।
पीले या लाल रंग के वस्त्र पहनें
पूजा के समय काले या गहरे रंग के कपड़े पहनने से बचें। इस दिन पीले, लाल या नारंगी रंग के वस्त्र धारण करना अत्यंत शुभ और सकारात्मक ऊर्जा देने वाला माना जाता है।
मोदक या बूंदी के लड्डू का भोग
विघ्नहर्ता को खुश करने का सबसे आसान तरीका है उनका पसंदीदा भोग। इस दिन घर में बने मोदक या बेसन-बूंदी के लड्डू का भोग बप्पा को लगाएं।
चंद्रदेव को अर्घ्य देना न भूलें
संकष्टी चतुर्थी का व्रत तब तक अधूरा माना जाता है, जब तक रात को चंद्रमा को अर्घ्य न दिया जाए। रात में चांदी के लोटे में दूध, जल और अक्षत मिलाकर चंद्रमा को अर्घ्य जरूर दें।

संकष्टी चतुर्थी पर क्या न करें?
तुलसी दल न चढ़ाएं
पौराणिक कथाओं के अनुसार, गणेश जी की पूजा में तुलसी का प्रयोग पूरी तरह वर्जित है। भूलकर भी बप्पा को तुलसी की पत्तियां अर्पित न करें, इससे वे रुष्ट हो सकते हैं।
तामसिक भोजन से दूरी
इस दिन व्रत रखने वालों के साथ-साथ घर के बाकी सदस्यों को भी प्याज, लहसुन, मांस और मदिरा जैसी तामसिक चीजों का सेवन नहीं करना चाहिए। घर में पूरी तरह सात्विक माहौल रखें।
चंद्रमा को बिना देखे अर्घ्य न दें
कई बार लोग समय होने पर बिना चांद को देखे ही अर्घ्य दे देते हैं। ऐसा न करें, नजरों के सामने चंद्रमा के उदय होने पर ही अर्घ्य की विधि पूरी करें।
क्रोध और वाद-विवाद से बचें
व्रत का मतलब सिर्फ भूखे रहना नहीं, बल्कि मन को शुद्ध रखना भी है। इस दिन घर में शांति का माहौल रखें। किसी पर गुस्सा न करें और न ही किसी की चुगली या बुराई करें।

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