Edited By Sarita Thapa,Updated: 01 Aug, 2026 10:09 AM

हिंदू धर्म में गजानन संकष्टी का बहुत खास महत्व है। सावन का महीना शिव जी के लिए ही नहीं, बल्कि हर देवी-देवता की पूजा के लिए बहुत खास माना जाता है। किसी भी शुभ काम की शुरुआत करने से पहले देवों के देव महादेव के पुत्र गणेश जी की पूजा क जाती है।
Gajanana Sankashti Chaturthi 2026 : हिंदू धर्म में गजानन संकष्टी का बहुत खास महत्व है। सावन का महीना शिव जी के लिए ही नहीं, बल्कि हर देवी-देवता की पूजा के लिए बहुत खास माना जाता है। किसी भी शुभ काम की शुरुआत करने से पहले देवों के देव महादेव के पुत्र गणेश जी की पूजा क जाती है। हर महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को संकष्टी चतुर्थी मनाई जाती है, जिसे दुखों और संकटों को हरने वाली तिथि कहा जाता है। सावन के माह में संकष्टी चतुर्थी का महत्व कई गुना बढ़ जाता है, क्योंकि इस माह में शिव जी और गणेश जी की कृपा भक्तों के एक-साथ मिलती है। माना जाता है कि इस दिन सच्चे मन से गणेश जी की पूजा करने और व्रत रखने से जीवन में आने वाली सारी परेशानियों से छुटकारा मिलता है और मन की हर मुराद पूरी होती है। तो आइए जानते हैं सावन की गजानन संकष्टी के शुभ मुहूर्त और पूजा विधि के बारे में-
गजानन संकष्टी चतुर्थी 2026 तिथि
पंचांग के अनुसार, सावन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि 01 अगस्त 2026 को रात 11 बजकर 07 मिनट पर शुरू होगी और इस तिथि का समापन 02 अगस्त 2026 को रात 11 बजकर 15 मिनट पर होगा। उदया तिथि के अनुसार, गजानन संकष्टी चतुर्थी 2026 का व्रत 02 अगस्त यानी रविवार के दिन रखा जाएगा।
गजानन संकष्टी चतुर्थी 2026 पूजा शुभ मुहूर्त
गजानन संकष्टी चतुर्थी के दिन भगवान गणेश की पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 07 पर 24 मिनट पर शुरू होगा। पूजा का ये शुभ मुहूर्त दोपहर को 12 बजकर 27 मिनट तक रहेगा।

गजानन संकष्टी चतुर्थी पूजा विधि
गजानन संकष्टी चतुर्थी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करने के बाद और साफ-सुथरे वस्त्र धारण करें।
इसके बाद घर के मंदिर की सफाई करें और गंगाजल का छिड़काव करने के बाद व्रत का संकल्प लें।
फिर एक चौकी पर पीले रंग का वस्त्र बिछाकर गणेश जी की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें।
उसके बाद उन्हें पीले फूलों की माला चढ़ाएं और कुमकुम का तिलक लगाएं।
अब गणेश जी को मिठाई, मोदक आदि का भोग लगाएं और दुर्वा घास जरूर अर्पित करें।
उसके बाद गणेश जी का ध्यान करते हुए उनके मंत्रों और नामों का जाप करें।
अंत में उनके समक्ष घी का दीपक जलाएं और आरती करें।

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