Edited By Parveen Kumar,Updated: 01 Aug, 2026 11:46 PM

आध्यात्मिक गुरुओं ने जंतर-मंतर पर छात्रों के प्रदर्शन के दौरान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के खिलाफ अपशब्दों का इस्तेमाल करने वालों को माफ करने की उनकी अपील का स्वागत किया और देश के युवाओं से आग्रह किया कि वे "गलतफहमियों और भटकाव" से ऊपर उठकर अपनी...
नेशनल डेस्क : आध्यात्मिक गुरुओं ने जंतर-मंतर पर छात्रों के प्रदर्शन के दौरान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के खिलाफ अपशब्दों का इस्तेमाल करने वालों को माफ करने की उनकी अपील का स्वागत किया और देश के युवाओं से आग्रह किया कि वे "गलतफहमियों और भटकाव" से ऊपर उठकर अपनी ऊर्जा, प्रतिभा और निश्चय को राष्ट्र निर्माण के लिए समर्पित करें। मोदी ने शुक्रवार को एक बयान में कहा था कि जंतर-मंतर पर उनकी दिवंगत मां के लिए भी "गंदी गालियों" का इस्तेमाल किए जाने से उन्हें दुख पहुंचा है। उन्होंने इस बात पर दुख जताया कि "हमारी बेटियों" ने ऐसी भाषा का इस्तेमाल किया। साथ ही उन्होंने "भटके हुए बच्चों" को माफ करने की अपील की।
शुक्रवार देर रात 'इंस्टाग्राम' पर जारी वीडियो संदेश में मोदी ने कहा था कि वह समाज में फैली पीड़ा को समझ सकते हैं, लेकिन यह समय युवाओं को अपनाने और उन्हें सही रास्ते पर ले जाने का है। जूना अखाड़ा के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरि ने कहा कि सार्वजनिक मंचों पर प्रधानमंत्री और उनकी दिवंगत मां के खिलाफ इस्तेमाल की गई "अशोभनीय, असभ्य और अपमानजनक भाषा" पूरी तरह से "भारतीय संस्कृति, सभ्यता और सनातन दृष्टिकोण के विपरीत" है। उन्होंने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा कि ऐसी अमर्यादित भाषा से संत समाज और पूरा आध्यात्मिक जगत बहुत आहत है।
जूना अखाड़ा के आचार्य महामंडलेश्वर ने कहा कि प्रधानमंत्री ने कई कदम उठाकर शिक्षा व्यवस्था को मजबूत किया है, ताकि छात्रों के हितों की बेहतर सुरक्षा हो सके और उनके भविष्य के साथ कोई अन्याय न हो। उन्होंने कहा, "मैं ईश्वर से प्रार्थना करता हूं कि जिन लोगों ने दुर्भावनापूर्ण, दुख पहुंचाने वाली और अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल किया है, उन्हें भगवान बुद्धि, सुविचार और सही निर्णय लेने की क्षमता दें, ताकि वे भारत की महान सांस्कृतिक परंपराओं, गरिमा, नैतिक मूल्यों और लोकतांत्रिक आदर्शों का सम्मान करते हुए राष्ट्र निर्माण में सकारात्मक भूमिका निभा सकें।"
परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष स्वामी चिदानंद सरस्वती ने कहा कि प्रधानमंत्री ने अपशब्दों का जवाब गुस्से से नहीं दिया, बल्कि क्षमा, प्रेम और अपनापन दिखाकर भारतीय संस्कृति के शाश्वत मूल्यों — करुणा, सद्भाव और संवाद — का "उल्लेखनीय उदाहरण" पेश किया है। उन्होंने 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, "मैं युवाओं से अपील करता हूं कि वे गलतफहमियों और भटकाव से ऊपर उठें और अपनी ऊर्जा, प्रतिभा और निश्चय को राष्ट्र निर्माण के लिए समर्पित करें।"
बागेश्वर धाम के प्रमुख धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी और उनकी दिवंगत मां के खिलाफ अपशब्दों का इस्तेमाल करने वालों ने "बड़ा पाप" और "घिनौना काम" किया है। उन्होंने 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, "मां केवल एक शब्द नहीं, बल्कि एक भावना है। कुछ लोग इस शब्द के असली महत्व को भूल जाते हैं।" उन्होंने कहा, "श्री बागेश्वर धाम परिवार किसी की भी मां के प्रति व्यक्त किए गए ऐसे गंदे विचारों की निंदा करता है और भगवान बालाजी से प्रार्थना करता है कि इसमें शामिल सभी लोगों को सद्बुद्धि दें।" स्वामी रसिक महाराज, महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद गिरिजी महाराज, महामंडलेश्वर शंकरानंद सरस्वती और स्वामी वासुदेवानंद भारती समेत कई आध्यात्मिक गुरुओं ने भी प्रधानमंत्री के इस कदम की सराहना की और उनके तथा उनकी दिवंगत मां के खिलाफ गंदी भाषा के इस्तेमाल की निंदा की।