Edited By Niyati Bhandari,Updated: 30 Jul, 2026 08:35 AM

Sawan Katha 2026: सावन 2026 की शुरुआत हो चुकी है। जानिए, आखिर क्यों यह महीना महादेव को इतना प्रिय है और क्या है समुद्र मंथन से जुड़ी वह पावन कथा जिसके कारण शुरू हुई जलाभिषेक की परंपरा।
Sawan Katha 2026: देवादिदेव महादेव की उपासना का सबसे पावन महीना 'सावन' आज से शुरू हो गया है। आज यानी 30 जुलाई 2026 से शिवालयों में 'हर-हर महादेव' और 'बम-बम भोले' की गूंज सुनाई दे रही है। शिव भक्तों के लिए यह महीना किसी उत्सव से कम नहीं है, क्योंकि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सावन के दौरान सृष्टि का संपूर्ण कार्यभार स्वयं भोलेनाथ ही संभालते हैं। यह पवित्र मास अगले महीने 28 अगस्त को सावन पूर्णिमा के साथ समाप्त होगा।
महादेव को क्यों प्रिय है सावन?
अक्सर भक्तों के मन में यह सवाल उठता है कि आखिर साल के 12 महीनों में सावन ही महादेव को सबसे अधिक प्रिय क्यों है?

पौराणिक मान्यता के अनुसार श्रावण मास को देवों के देव महादेव भगवान शंकर का प्रिय महीना माना जाता है। इस संबंध में पौराणिक कथा है कि जब सनत कुमारों ने महादेव से उन्हें श्रावण महीना प्रिय होने का कारण पूछा तो महादेव भगवान शिव ने बताया कि जब देवी सती ने अपने पिता दक्ष के घर में योगशक्ति से शरीर त्याग किया था, उससे पहले देवी सती ने महादेव को हर जन्म में पति के रूप में पाने का प्रण किया था। अपने दूसरे जन्म में देवी सती ने पार्वती के नाम से हिमाचल और रानी मैना के घर में पुत्री के रूप में जन्म लिया। पार्वती ने युवावस्था के श्रावण महीने में निराहार रहकर कठोर व्रत किया और उन्हें प्रसन्न कर विवाह किया, जिसके बाद ही महादेव के लिए यह विशेष हो गया।
श्रावण के महीने में भगवान शंकर की विशेष रूप से पूजा की जाती है। इस दौरान पूजन की शुरूआत महादेव के अभिषेक के साथ की जाती है। अभिषेक में महादेव को जल, दूध, दही, घी, शक्कर, शहद, गंगाजल, गन्ने के रस आदि से स्नान कराया जाता है। अभिषेक के बाद बेलपत्र, शमीपत्र, दूब, कुशा, कमल, नीलकमल, आक मदार, जवाफूल कनेर, राई फूल आदि से शिवजी को प्रसन्न किया जाता है। इसके साथ ही भोग के रूप में धतूरा, भांग और श्रीफल महादेव को चढ़ाया जाता है।

महादेव का अभिषेक
महादेव का अभिषेक करने के पीछे एक पौराणिक कथा का उल्लेख है कि समुद्र मंथन के समय हलाहल विष निकला था। उस विष का पान महादेव ने किया था। इससे वह मूर्च्छित हो गए थे। उनकी दशा देखकर सभी देवी-देवता भयभीत हो गए थे। भोलेनाथ को होश में लाने के लिए निकट में जो चीजें उपलब्ध थीं, देवता उनसे महादेव को स्नान कराने लगे, इसके बाद से ही जल से लेकर तमाम उन चीजों से महादेव का अभिषेक किया जाता है।
