Edited By Sarita Thapa,Updated: 01 Oct, 2026 01:46 PM

एक बार गौतम बुद्ध एक गांव में ठहरे हुए थे। लोग अपनी परेशानियों को लेकर उनके पास जाते और उनका हल लेकर खुशी-खुशी वहां से लौटते। उसी गांव में सड़क के किनारे एक भिखारी बैठा करता था। उसे लगा कि क्यों न वह भी अपनी समस्या को बुद्ध के सामने रखे।
Gautam Buddha Teachings on Wealth : एक बार गौतम बुद्ध एक गांव में ठहरे हुए थे। लोग अपनी परेशानियों को लेकर उनके पास जाते और उनका हल लेकर खुशी-खुशी वहां से लौटते। उसी गांव में सड़क के किनारे एक भिखारी बैठा करता था। उसे लगा कि क्यों न वह भी अपनी समस्या को बुद्ध के सामने रखे। मन में यह विचार लिए एक दिन वह भी महात्मा बुद्ध के पास पहुंचा।
लोग उन्हें अपनी समस्याएं बता रहे थे और वह मुस्कुराते हुए सबकी समस्याएं हल कर रहे थे। जब भिखारी की बारी आई तो उसने कहा, ‘‘भगवन्, इस गांव में लगभग सभी लोग खुश और समृद्ध हैं। फिर मैं ही क्यों गरीब हूं?’’
इस पर बुद्ध मुस्कुराते हुए बोले, ‘‘तुम गरीब इसलिए हो क्योंकि तुमने आज तक किसी को कुछ दिया ही नहीं।’’
आश्चर्यचकित गरीब बोला, ‘‘मेरे पास भला दूसरों को देने के लिए क्या है?

मेरा तो स्वयं का गुजारा बहुत मुश्किल से हो पाता है। लोगों से भीख मांग कर अपना पेट भरता हूं। मैं लोगों को क्या दे सकता हूं?’’
भगवान बुद्ध कुछ देर शांत रहे, फिर बोले, ‘‘तुम बड़े अज्ञानी हो। औरों के साथ बांटने के लिए ईश्वर ने तुम्हें इतना कुछ दिया है और तुम्हें खबर ही नहीं। थोड़ा सोचो तो तुम्हें पता चलेगा कि ईश्वर ने कैसी बड़ी-बड़ी चीजें तुम्हें दी हैं जो तुम आसानी से दूसरों को दे सकते हो। सबसे पहले तो मुस्कुराहट दी है, जिससे तुम लोगों में आशा का संचार कर सकते हो।
मुंह से दो मीठे शब्द बोल सकते हो। दोनों हाथ से सबकी मदद कर सकते हो। ईश्वर ने जिसको ये तीन चीजें दी हैं वह कभी गरीब हो ही नहीं सकता। निर्धनता का विचार व्यक्ति के मन में होता है। यह तो एक भ्रम है, इसे निकाल दो।’’ यह सुनकर उस भिखारी का चेहरा चमक उठा।

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