Geeta mahotsav: लकड़ी को तराशकर तैयार किए श्री राम मंदिर व गोल्डन टैम्पल के स्वरूप

Edited By Niyati Bhandari,Updated: 24 Nov, 2022 10:53 AM

geeta mahotsav

सेल्फ हेल्प ग्रुप के शिल्पकार लकड़ी को तराशकर एक ऐसा स्वरूप दे रहे हैं कि इसको देखकर हर कोई आश्चर्यचकित हो रहा है।  इस शिल्पकला को पहली बार अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव में एक विशेष मंच दिया गया है। इस मंच पर शिल्पकारों ने

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कुरुक्षेत्र (पंकेस): सेल्फ हेल्प ग्रुप के शिल्पकार लकड़ी को तराशकर एक ऐसा स्वरूप दे रहे हैं कि इसको देखकर हर कोई आश्चर्यचकित हो रहा है।  इस शिल्पकला को पहली बार अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव में एक विशेष मंच दिया गया है। इस मंच पर शिल्पकारों ने अयोध्या में बनने वाले श्री राम मंदिर, अमृतसर के गोल्डन टेंपल और भगवान श्रीकृष्ण अर्जुन-रथ के लकड़ी से तराशकर हू-ब-हू स्वरूप तैयार किए हैं। 

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अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव-2022 दौरान श्री राम मंदिर के स्टाल पर इसे देखने वालों की भारी भीड़ लगी है। कैथल निवासी दीपक जांगड़ा ने बताया की अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव के उनके स्टाल पर ज्यादातर लोगों को भीड़ सिर्फ श्री राम मंदिर को खरीदने वालों की है। इसके अलावा उनके स्टाल पर गोल्डन टैम्पल, बद्रीनाथ मंदिर, केदारनाथ मंदिर भी मौजूद है, मगर सबसे ज्यादा डिमांड श्री राम मंदिर की हो रही है। 

जंगम जोगी परंपरा को जिंदा रख रहे युवा कलाकार
युवा पीढ़ी अगर परम्परा को जिंदा रखने के लिए आगे आए तो यह गौरव की बात है। ऐसा ही उदाहरण अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव में कालका से पहुंची जंगम जोगी की पार्टी पेश कर रही है। इस पार्टी में शामिल 6 कलाकारों में से 3 युवा कलाकार हैं जो पेशे से पेंटर हैं लेकिन अपनी पुश्तैनी परम्परा को जिंदा रखने के लिए जंगम जोगी के भजन गुनगुना रहे हैं। इन सभी जंगम जोगी कलाकारों ने मुख्यमंत्री मनोहर लाल का धन्यवाद किया कि अंतरराष्ट्रीय गीता जैसे महोत्सव आयोजित किए जा रहे हैं जिससे उन जैसे कलाकारों को एक मंच मिल रहा है।

कालका से जंगम जोगी की पार्टी लेकर कुरुक्षेत्र आए कृष्ण कुमार का कहना है कि आज के युवा पढ़ाई-लिखाई करने के बाद नौकरी या अपना काम शुरू कर देते हैं। चुनिंदा ही ऐसे होते हैं, जो अपनी पुश्तैनी परम्परा को बनाए रखने के लिए प्रयास करते हैं और जंगम जोगी के भजन गाना शुरू करते हैं। इन्हीं में से मनीष (22), अभिषेक (24) और अरुण (26) जंगम जोगी हैं। कृष्ण ने बताया कि वे भगवान शिव की स्तुति करते हैं। इसमें उनकी कथा सुनाई जाती है जिसमें शिव विवाह से लेकर उनके अमरनाथ तक जाने की पूरी कहानी गीतो के माध्यम से प्रस्तुत होती है। 

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