Edited By Sarita Thapa,Updated: 03 Sep, 2026 05:32 PM

जन्माष्टमी के व्रत भगवान श्रीकृष्ण के प्रति अटूट श्रद्धा और भक्ति का प्रतीत है। हालांकि, यदि घर में कोई सदस्य फ्लू, तेज बुखार या मौसमी बीमारी से जूझ रहा है, तो व्रत रखने के तरीकों में थोड़ा बदलाव करना बहुत जरूरी हो जाता है।
Krishna Janmashtami 2026 : जन्माष्टमी के व्रत भगवान श्रीकृष्ण के प्रति अटूट श्रद्धा और भक्ति का प्रतीत है। हालांकि, यदि घर में कोई सदस्य फ्लू, तेज बुखार या मौसमी बीमारी से जूझ रहा है, तो व्रत रखने के तरीकों में थोड़ा बदलाव करना बहुत जरूरी हो जाता है। हिंदू धर्म में कहा गया है कि मानव शरीर ही सभी धर्म और व्रतों का पालन करने का सबसे पहला साधन है। सेहत को नुक्सान पहुंचाकर व्रत रखना शास्त्र सम्मत नहीं माना जाता है। यदि आपको या परिवार के किसी सदस्य को जन्माष्टमी के व्रत के दौरान फ्लू-बुखार है, तो स्वास्थ्य का ध्यान रखते हुए भक्ति भाव से जन्माष्टमी व्रत इस प्रकार रखा जा सकता है।
निर्जला या सख्त व्रत रखने से बचें
यदि जन्माष्टमी के व्रत वाले दिन किसी सदस्य या आपको बुखार और फ्लू हो जाता है, तो इसके कारण शरीर को हाइड्रेशन की सबसे अधिक जरूरत होती है। ऐसे में बिना पानी पिए निर्जला व्रत रखने की गलती बिल्कुल नहीं करना चाहिए।
दवाओं के समय का रखें ध्यान
फ्लू की अन्य दवाएं खाली पेट लेने से पेट में जलन, एसिडिटी और कमजोरी हो सकती है। यदि आप फलाहार कर रहे हैं, तो फल, दूध या साबूदाने की खिचड़ी लेने के बाद ही समय पर अपनी दवाएं लें।

तरल पदार्थों का अधिक सेवन करें
डिहाइड्रेशन से बुखार और शरीर का दर्द बढ़ सकता है। व्रत के दौरान नारियल पानी, तुलसी का काढ़ा, शिकंजी, छाछ, या ताजे फलों का जूस लेते रहें। तुलसी का काढ़ा फ्लू के लक्षणों को कम करने और इम्यून सिस्टम को मजबूत करने में मदद करेगा।
पूजा स्थल की स्वच्छता और दूरी का ध्यान रखें
फ्लू एक संक्रामक बीमारी है, जो हवा और संपर्क से घर के अन्य सदस्यों में फैल सकती है। यदि आप अस्वस्थ हैं, तो बालगोपाल को झूले में झुलाने या माखन-मिश्री का भोग तैयार करते समय मास्क पहनें और हाथों को अच्छी तरह सैनिटाइज करें। हो सके तो घर का कोई अन्य स्वस्थ सदस्य कान्हा जी का श्रृंगार और पूजा करे।

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