Edited By Sarita Thapa,Updated: 20 Oct, 2026 03:12 PM
स्वास्तिक भारत यात्रा के 11वें दिन मोरारी बापू जम्मू पहुंचे। यहां उन्होंने रघुनाथ मंदिर में माथा टेककर दर्शन किए। इस दौरान उन्होंने अमृतसर में देखे गए राष्ट्र गौरव, भारतीय जवानों के साहस और देश के प्रति उनके समर्पण का जिक्र किया।
Morari Bapu Kashmir Statement Jammu (परविंदर कुमार मिश्रा) : स्वास्तिक भारत यात्रा के 11वें दिन मोरारी बापू जम्मू पहुंचे। यहां उन्होंने रघुनाथ मंदिर में माथा टेककर दर्शन किए। इस दौरान उन्होंने अमृतसर में देखे गए राष्ट्र गौरव, भारतीय जवानों के साहस और देश के प्रति उनके समर्पण का जिक्र किया। व्यासपीठ से मोरारी बापू ने शांति, शक्ति, भक्ति और श्रद्धा के महत्व पर भी अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि साधु की शक्ति उसकी शांति में होती है और साधु अभिनय नहीं करता, बल्कि अपने अनुभव को बताता है।
भारतीय जवानों के साहस और समर्पण की सराहना
मोरारी बापू ने कहा कि कल हम अमृतसर में थे, जहां राष्ट्र के गौरव का दर्शन किया। वहां परेड देखकर बहुत अच्छा लगा। रोजाना बड़ी संख्या में लोग वहां दर्शन करने जाते हैं। भारत जिस तरह अपने जवानों को सम्मान देता है, वह अद्भुत है। परेड के दौरान सैनिकों का उत्साह बढ़ाने का अंदाज और देश की बेटियों का साहस देखने लायक था। वहां के इंचार्ज भी हमारे साथ रहे और लोगों ने व्यासपीठ को बहुत आदर दिया। उन्होंने कहा कि सैनिकों के पैरों की एक-एक छाप से भारत सुरक्षित है। जब तक देश के जवान खड़े हैं, तब तक भारत का कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता। यह साहस किसी ज्वार-भाटे से कम नहीं है। मोरारी बापू ने एक सैनिक का पत्र साझा करते हुए बताया कि उसने लिखा था कि वह सीमा पर रहता है और वहां उसे आनंद मिलता है। जब वह कथा सुनने आता है, तो उसे उतना ही आनंद मिलता है। बापू ने कहा कि वैसे तो मैं शांत रहता हूं, लेकिन जवानों को देखकर मेरे अंदर भी उत्साह आ जाता है।
लाहौर जाने की इच्छा पर भी रखी बात
मोरारी बापू ने कहा कि लाहौर भी चले जाएं। वहां जाएंगे तो उचित योग बनाकर जाएंगे और अपने साथ पोथी लेकर जाएंगे। उन्होंने जम्मू-कश्मीर का उल्लेख करते हुए कहा कि आज हम अखंड भारत के भू-भाग में हैं। उन्होंने साधु के स्वभाव की व्याख्या करते हुए कहा कि साधु शांत होता है। समुद्र की लहरें बाहर दिखाई देती हैं, लेकिन अंदर शांति रहती है। इसी तरह साधु भी बाहर से कभी-कभी नाराज दिखाई दे सकता है, लेकिन भीतर से शांत रहता है। उन्होंने भरत जी का उदाहरण देते हुए कहा कि भरत पूरी तरह शांत हैं। साधु होना बहुत कठिन है, क्योंकि साधु अभिनय नहीं करता, बल्कि अपने अनुभव को सामने रखता है।
शांति ही साधु की सबसे बड़ी शक्ति
मोरारी बापू ने कहा कि जिस व्यक्ति के सभी अंग अच्छे हों, उसकी उम्र, रूप और बल अच्छा हो, उसमें रजोगुण आने की संभावना रहती है। उन्होंने कामदेव का उदाहरण देते हुए कहा कि सुंदरता और बल के साथ रजोगुण का संबंध हो सकता है। इसके बाद उन्होंने भगवान विष्णु की महिमा का वर्णन किया और ‘शांताकारं भुजगशयनम्’ स्तुति की व्याख्या की। उन्होंने कहा कि भगवान के चरणों में लक्ष्मी हैं और उनमें बल सहित सभी गुण मौजूद हैं, फिर भी वे शांत हैं। इसी तरह साधु की सबसे बड़ी शक्ति शांति होती है। उन्होंने भरत जी के संदर्भ में कहा कि उनकी मुस्कान में शक्ति है और भरत में भक्ति है। जो लोग भक्ति से विमुख होते हैं, उनके लक्षणों का वर्णन शास्त्रों में भी किया गया है।
शांति, शक्ति, भक्ति और श्रद्धा का संदेश
मोरारी बापू ने शांति, शक्ति, भक्ति, श्रद्धा, विरक्ति और विमल विभूति के महत्व को समझाया। उन्होंने कहा कि साधु थकता नहीं है और उचित अवसर आने पर उसकी स्मृति देश और समाज के लिए उपयोगी साबित होती है। इसी दौरान उन्होंने अपने अंदाज में कहा कि सभी जानते हैं कि मोरारी बापू शराबी नहीं हैं, लेकिन अगर मानस पिलाए तो मैं क्या करूं।
‘मातृ देवो भव’ से स्वस्तिक का संबंध
मोरारी बापू ने ‘मातृ देवो भव, पितृ देवो भव, गुरुदेवो भव, अतिथि देवो भव’ का उल्लेख करते हुए इसे स्वस्तिक की भावना से जोड़ा। उन्होंने कहा कि आज हम कितने भाग्यशाली हैं कि मां वैष्णो देवी के चरणों में कथा कहने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है। उन्होंने जम्मू-कश्मीर के संदर्भ में अपना संदेश देते हुए कहा, “भोपाल हमारा है, जम्मू हमारा है, देश हमारा है, कश्मीर हमारा है।” उन्होंने कश्यप ऋषि का उल्लेख करते हुए कहा कि वे यहां आए थे और यह स्वस्तिक भारत की भावना से जुड़ा है।
यात्रा और जीवन को लेकर कही अहम बात
मोरारी बापू ने कहा कि यहां एक बात पक्की है कि कुछ भी पक्का नहीं है। उन्होंने स्वास्थ्य का उल्लेख करते हुए कहा कि जिसकी सेहत ठीक नहीं है, उसे केदारनाथ नहीं जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे व्यक्ति की यात्रा यहीं पूरी हो जाती है। जम्मू में व्यासपीठ से दिए गए अपने संदेश में मोरारी बापू ने राष्ट्र के प्रति सम्मान, जवानों के साहस, साधु के शांत स्वभाव, भक्ति और श्रद्धा के महत्व को सामने रखा। स्वास्तिक भारत यात्रा के दौरान रघुनाथ मंदिर में दर्शन के साथ उन्होंने मां वैष्णो देवी की धरती पर कथा कहने को अपना सौभाग्य बताया।
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