यहां रात का नज़ारा देखकर आप भी खो सकते हैं अपने होश

Edited By Jyoti,Updated: 26 Jan, 2019 01:21 PM

nidhivan history and interesting facts

वृंदावन के बारे में कौन नहीं जानता, वृंदावन और मथुरा दोनों ऐसे शहर हैं जिनको श्रीकृष्ण के नाम से जाना जाता है। बल्कि इनके बार में तो ये तक कहा जाता है कि इन दोनों शहरो को इन्हों यानि श्रीकृष्ण की वजह से पहचान मिली है। इस शहर में होने वाली हर गतिविधि...

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वृंदावन के बारे में कौन नहीं जानता, वृंदावन और मथुरा दोनों ऐसे शहर हैं जिनको श्रीकृष्ण के नाम से जाना जाता है। बल्कि इनके बार में तो ये तक कहा जाता है कि इन दोनों शहरो को इन्हों यानि श्रीकृष्ण की वजह से पहचान मिली है। इस शहर में होने वाली हर गतिविधि को इनसे जोड़ा जाता है। आज हम वृंदावन से जुड़ा एक ऐसा ही किस्सा बताने जा रहे हैं, जिसके बारे में जानकर हर कोई दंग रह जाता है।
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वैसे तो जैसे हमने कहा कि वृंदावन और मथुरा में हर चीज़ कान्हा से जोड़ा जाता है तो फिर यहां के मंदिर तो प्रमुख होंगे। बता दें कि वृंदावन का एक ऐसा ही मंदिर है जिसका इतिहास बेहद दिलचस्प है। लेकिन आज हम आपको साथ यहां के किसी मंदिर नहीं बल्कि वृंदावन में स्थित निधिवन के बारे में बात करने जा रहे हैं। जो लोग तो कभी वृंदावन गए होगें उन्होंने तो इसके बारे में ज़रूर सुना होगा। एत मान्यता के अनुसार यहां आज भी हर रात श्रीकृष्ण गोपियों संग रास रचाते है।

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शाम की आरती के बाद इस मंदिर के सारे कपाट बंद कर दिए जाते हैं। कपाट बंद होने के बाद यहां आना-जाना मना है। मंदिर के पूजारी भी यहां नहीं रूकते। शाम के बाद इंसान तो क्या पक्षी भी यहां पर नहीं फड़कते। मंदिर के आस-पास जिन घरों के खिड़किया दरवाजे निधिवन की तरफ है वो भी शाम के समय बंद कर दिए जाते हैं और कोई भी घर की छत पर भी नहीं चढ़ता। गलती से भी लोग इस तरफ नहीं देखते क्योंकि माना जाता हैं जिस किसी ने भी इस तरफ देखना चाहा तो वो या अंधा हो जाता है या उसके साथ कुछ बुरा हो जाता है।
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लोक मान्यताओं के अनुसार रात को यहां पायल के घुंघरू और बांसुरी की आवाजे भी सुनाई देती हैं। निधिवन में 16000 पेड़ हैं जिन्हें कृष्ण की गोपिया माना जाता हैं। कहा जाता है कि जब कान्हा राधा संग रास रचाते हैं तो ये पेड़ गोपियों का रूप धारण कर लेते हैं और फिर श्री कृष्ण के साथ रास लीला करती हैं। सुबह होते ही गोपियां दोबारा पेड़ के रूप में वापिस आ जाती हैं।
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इन पेड़ों की अजीब बात यह है कि जहां आमतौर पर पेड़ उपर की और बढ़ते हैं वहीं यहां स्थित पेड़ों की टहनियां नीचे की ओर झुकी हुई है। कहा जाता है कि ये नीचे झुक कर ब्रज भूमि को नमन करती हैं और इसी में समा जाना चाहती है। निधिवन के अंदर ही एक रंगमहल है, पौराणिक कथाओं के अनुसार यहां पर रोज़ रात को राधा-कृष्ण आते हैं। रंग महल में भगवान के लिए बिस्तर सजाया जाता है। पलंग के साथ पानी का लोटा और पान रखा जाता है। राधा रानी के लिए श्रृंगार का सामान रखा जाता है। महल में दातुन, प्रसाद रखा जाता है। जब सुबह मंदिर के कपाट खोले जाते हैं तो देखा जाता है कि सारा सामान इधर-उधर बिखरा मिलता है। बंद डब्बे में प्रसाद का खाया हुआ मिलता है। ये सब देख सभी हैरान रह जाते हैं और भक्तों के लिए ये किसी करिश्में से कम नहीं लगता। भक्तों की माने तो भगवान आज भी यहां मौज़ुद है और रोज रात यहां आते हैं। जो लोग इस बात को अंधविश्वास मानते हैं और जिन लोगों ने छुपकर निधिवन का सच जानने व रास देखना चाहा, माना जाता है वो इंसान पागल हो जाता है, कोई अंधा गूंगा बन जाता है तो कई लोग मोक्ष को प्राप्त करते हैं।
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