20 सितंबर से शुरू होगा पितृ पक्ष, जानिए श्राद्ध की तिथियां

Edited By Jyoti,Updated: 24 Aug, 2021 11:48 AM

pitru paksha 2021

हिंदू धर्म में पितृ पक्ष का  विशेष महत्व बताया गया है। हमारे जो पूर्वज अपनी देह का त्याग कर चले जाते हैं , पितृ पक्ष में उनकी आत्मा की शांत के लिए तर्पण किया जाता है। इसे श्राद्ध भी कहा जाता है

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हिंदू धर्म में पितृ पक्ष का  विशेष महत्व बताया गया है। हमारे जो पूर्वज अपनी देह का त्याग कर चले जाते हैं , पितृ पक्ष में उनकी आत्मा की शांत के लिए तर्पण किया जाता है। इसे श्राद्ध भी कहा जाता है। श्राद्ध का अर्थ श्रद्धा पूर्वक भी होता है। यानी पूरी श्रद्धा से किया जाने वाला कार्य। वायु पुराण और वराह पुराण में श्राद्ध कर्म के बारे में विस्तार से बताया गया है। पितृ पक्ष के महत्व के बारे में पुराणों में वर्णन मिलता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार पितृ पक्ष में पितरों का तर्पण करने से पितृ दोष दूर होता है। जन्म कुंडली में पितृ दोष होने से व्यक्ति को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है। ज्योतिष शास्त्र में पितृ दोष को अशुभ फल देने वाला दोष माना गया है। जिन लोगों की कुंडली में यह दोष पाया जाता है, उन्हें हर कार्य में बाधा का सामना पड़ता है। मान सम्मान में भी कभी बनी रहती है। जमा पूंजी नष्ट हो जाती है, रोग आदि भी घेर लेते हैं।

पितृ पक्ष यानी श्राद्ध पक्ष को हिंदू धर्म में अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है। पितृ पक्ष में पितरों को याद कर उनके प्रति आभार व्यक्त किया जाता है। पितृ पक्ष में विधि पूर्वक पितरों का श्राद्ध और तर्पण करने से जीवन में आने वाली परेशानियां दूर होती हैं। पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है। पितृ पक्ष में किए जाने वाले श्राद्ध से पितृ प्रसन्न होते हैं और उनकी आत्मा को शांति मिलती है। मान्यता है कि पितृ पक्ष में मृत्युलोक के देवता यमराज आत्मा को मुक्त कर देते हैं, ताकि वे अपने परिजनों के यहां जाकर तर्पण ग्रहण कर सकें। पितृ पक्ष में पितरों को याद किया जाता है।

पंचांग  के  20 सितंबर  सोमवार को भाद्रपद मास की शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि से पितर पक्ष की शुरुआत हो रही है  और पितृ पक्ष का समापन 6 अक्टूबर बुधवार को आश्विन मास की कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि को होगा। इस दिन को आश्विन अमावस्या, बड़मावस और दर्श अमावस्या भी कहा जाता है। विशेष बात ये है कि इस वर्ष 2021 में 26 सितंबर को श्राद्ध की तिथि नहीं है।

अब जानते हैं इस वर्ष के पितृ पक्ष में श्राद्ध की तिथियां- 
20 सितंबर सोमवार को पूर्णिमा श्राद्ध है।

21 सितंबर मंगलवार: को  प्रतिपदा श्राद्ध है।

22 सितंबर बुधवार को द्वितीया श्राद्ध है।

23 सितंबर बृहस्पतिवार को तृतीया श्राद्ध है।

24 सितंबर शुक्रवार को चतुर्थी श्राद्ध,

25 सितंबर शनिवार को पंचमी श्राद्ध,

27 सितंबर सोमवार को षष्ठी श्राद्ध,

28 सितंबर मंगलवार को सप्तमी श्राद्ध,

29 सितंबर  बुधवार को अष्टमी श्राद्ध,

30 सितंबर बृहस्पतिवार को नवमी श्राद्ध

1 अक्तूबर शुक्रवार को दशमी श्राद्ध

2 अक्तूबर शनिवार को एकादशी श्राद्ध

3 अक्तूबर रविवार को द्वादशी, सन्यासियों का श्राद्ध, मघा श्राद्ध

4 अक्तूबर सोमवार को त्रयोदशी श्राद्ध

5 अक्तूबर मंगलवार को चतुर्दशी श्राद्ध व

6 अक्तूबर बुधवार को अमावस्या श्राद्ध होगा।

यानी  6 अक्टूबर को आश्विन मास की कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि पितृ पक्ष का समापन होगा। इस वर्ष 26 सितंबर को श्राद्ध की तिथि नहीं है।

गुरमीत बेदी 
gurmitbedi@gmail.com

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