Edited By Niyati Bhandari,Updated: 19 Jun, 2026 07:48 AM

Skanda Sashti 2026: साल 2026 में ज्येष्ठ माह की स्कंद षष्ठी का व्रत 19 जून को रखा जाएगा। भगवान कार्तिकेय की कृपा पाने के लिए जानें सही पूजा विधि, महत्व और पौराणिक कथा। ज्येष्ठ स्कंद षष्ठी पर भगवान कार्तिकेय की पूजा से मिलेगा संतान सुख, जानें पूरी...
Skanda Sashti 2026: हिंदू धर्म में षष्ठी तिथि का विशेष महत्व है, जो विशेष रूप से भगवान शिव के ज्येष्ठ पुत्र और देवताओं के सेनापति भगवान कार्तिकेय को समर्पित है। हर माह के शुक्ल पक्ष की षष्ठी को स्कंद षष्ठी का व्रत रखा जाता है। साल 2026 में ज्येष्ठ मास की स्कंद षष्ठी का व्रत 19 जून, शुक्रवार को रखा जाएगा। मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से पूजन करने वाले भक्तों को न केवल बेहतर स्वास्थ्य मिलता है, बल्कि उनके आत्मविश्वास में भी वृद्धि होती है। संतान सुख की इच्छा रखने वालों की गोद बहुत जल्दी भरती है।
क्यों मनाया जाता है स्कंद षष्ठी का व्रत, जानें महत्व: भगवान कार्तिकेय के दर्शन मात्र से ब्रह्महत्या जैसे पापों से मुक्ति मिलती है। महादेव के तेज से उत्पन्न स्कंद की छह कृतिकाओं ने रक्षा की थी। स्कंद की उत्पत्ति अमावास्या को अग्नि से हुई थी, वे चैत्र माह शुक्ल पक्ष की षष्ठी को प्रत्यक्ष हुए थे। कार्तिकेय देवताओं के द्वारा सेनानायक बनाए गए थे व तारकासुर का वध किया था। अत: उनकी पूजा, दीपों, वस्त्रों, अलंकरणों व खिलौनों के रूप में की जाती है। कृत्यरत्नाकर, ब्रह्म पुराण व हेमाद्रि आदि शास्त्रों में भगवान स्कंद की व्यख्या को समझाया है। भगवान कार्तिकेय युद्ध, शक्ति व ऊर्जा के प्रतीक माने जाते हैं। शास्त्रों में शिव पार्वती सहित कार्तिकेय की पूजा संतान के स्वास्थ्य के लिए सभी शुक्ल षष्ठी पर करने का विधान है। मान्यतानुसार विवाद को निपटाने व कलह से मुक्ति हेतु स्कंद षष्ठी पर कार्तिकेय की आराधना निश्चित सफलता देती है।

Jyeshtha Month Skanda Sashti puja vidhi स्कंद षष्ठी पूजा विधि: शिवालय जाकर भगवान कार्तिकेय का विधिवत पूजन करें। गौघृत में साबुत धनिया के बीज डालकर दीप करें, तगर से धूप करें, पीले कनेर के फूल चढ़ाएं, सिंदूर चढ़ाएं, मौसमी का फलाहार चढ़ाएं व मिश्री का भोग लगाएं व इलायची व मिश्री में बने मिष्ठान का भोग लगाएं। इस विशेष मंत्र को 108 बार जपें। इसके बाद फल किसी गरीब को बांट दें।

Skanda Sashti mantra स्कंद षष्ठी मंत्र-
ॐ स्कन्दाय खड्गधराय नमः॥
ॐ शारवाना-भावाया नम:
ज्ञानशक्तिधरा स्कंदा वल्लीईकल्याणा सुंदरा
देवसेना मन: कांता कार्तिकेया नामोस्तुते
सुब्रहमणयाया नम:
स्कंद षष्ठी की पूजा अथवा व्रत करने वालों को सलाह: स्कंद षष्ठी के दिन भगवान कार्तिकेय के साथ-साथ शिव-पार्वती की पूजा अवश्य करें, क्योंकि उनके आशीर्वाद के बिना यह पूजा अधूरी मानी जाती है।
