गणेश चतुर्थी के बाद क्यों किया जाता है बप्पा का विसर्जन? जानें सदियों पुरानी परंपरा

Edited By Updated: 22 Sep, 2026 09:01 AM

why ganesh visarjan is done

हर साल भाद्रपद माह की शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को हम बड़ी धूमधाम से बप्पा को अपने घर लाते हैं। 10 दिनों तक उनकी सेवा की जाती है, मोदक का भोग लगाया जाता है और चारों तरफ 'गणपति बप्पा मोरया' की गूंज होती है।

Why Ganesh Visarjan Is Done : हर साल भाद्रपद माह की शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को हम बड़ी धूमधाम से बप्पा को अपने घर लाते हैं। 10 दिनों तक उनकी सेवा की जाती है, मोदक का भोग लगाया जाता है और चारों तरफ 'गणपति बप्पा मोरया' की गूंज होती है। लेकिन अनंत चतुर्दशी के दिन जब बप्पा को विदा करने का समय आता है, तो हर भक्त की आंखें नम हो जाती हैं। मन में एक सवाल जरूर उठता है-जिस बप्पा को हम इतने प्यार से घर लाते हैं, उन्हें 10 दिन बाद जल में विसर्जित क्यों कर दिया जाता है। तो आइए जानते हैं इसके पीछे की परंपरा के बारे में-

Why Ganesh Visarjan Is Done

महाभारत और वेदव्यास जी से जुड़ी पौराणिक कथा
गणपति विसर्जन से जुड़ी सबसे प्रसिद्ध पौराणिक कथा महाभारत के लेखन से जुड़ी है। मान्यता है कि जब महर्षि वेदव्यास जी को महाभारत महाकाव्य की रचना करनी थी, तो उन्होंने इसके लेखन के लिए भगवान श्री गणेश का चयन किया। गणेश जी ने एक शर्त रखी कि वेदव्यास जी बिना रुके लगातार बोलते रहेंगे और वे लिखते रहेंगे। वेदव्यास जी ने कथा सुनाना शुरू किया और गणेश जी दिन-रात बिना रुके लिखते रहे। शरीर का तापमान बढ़ जाना: लगातार 10 दिनों तक बिना रुके लिखने के कारण बप्पा के शरीर का तापमान बहुत अधिक बढ़ गया।

गणेश जी के शरीर को ठंडक पहुंचाने के लिए वेदव्यास जी ने उनके शरीर पर सोंधी मिट्टी का लेप किया। 10वें दिन यानी अनंत चतुर्दशी को जब महाभारत का लेखन पूरा हुआ, तब वेदव्यास जी ने देखा कि गणेश जी का शरीर पूरी तरह अकड़ गया था और बहुत गर्म था। उनके शरीर को ठंडक देने के लिए वेदव्यास जी उन्हें पास की एक झील में ले गए और जल में डुबकी लगवाई। मिट्टी का लेप जल में घुल गया और बप्पा को शीतलता मिली। तभी से यह परंपरा शुरू हुई कि 10 दिन तक घर में सेवा करने के बाद 10वें दिन गणेश जी का जल में विसर्जन किया जाता है।

Why Ganesh Visarjan Is Done

 निराकार से साकार और फिर निराकार का सफर
हिंदू धर्म और दर्शन में विसर्जन का एक बहुत गहरा आध्यात्मिक संदेश है- जो इस संसार में आया है, उसे एक दिन अपने मूल रूप में वापस जाना है। गणेश चतुर्थी के दिन हम मिट्टी की मूर्ति स्थापित करके भगवान को साकार रूप देते हैं। 10 दिनों तक उनकी भक्ति करने के बाद, हम उन्हें जल में विसर्जित करते हैं। जल ही सृष्टि का मूल तत्व है। जब मिट्टी की मूर्ति जल में विलीन हो जाती है, तो बप्पा फिर से अपने निराकार रूप में लौट जाते हैं। यह परंपरा हमें सिखाती है कि यह शरीर और संसार नश्वर है, और अंत में सब कुछ ईश्वर में ही समा जाना है।

Why Ganesh Visarjan Is Done

शास्त्रों की बात, जानें धर्म के साथ
 

Related Story

Trending Topics

img title
img title

Be on the top of everything happening around the world.

Try Premium Service.

Subscribe Now!