Exclusive Interview: 'मिर्जापुर' की दुनिया नहीं रुकेगी, प्रशंसकों को आगे भी मिलेगा सरप्राइज: गुरमीत सिंह

Edited By Updated: 12 Sep, 2026 01:52 PM

mirzapur director gurmeet singh exclusive interview with punjab kesari

डायरेक्टर गुरमीत सिंह ने पंजाब केसरी, नवोदय टाइम्स, जगबाणी और हिंद समाचार से खास बातचीत की। पेश हैं मुख्य अंश...

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। गुरमीत सिंह द्वारा डायरेक्टेड फिल्म मिर्जापुर द मूवी ने रिलीज होते ही बॉक्स ऑफिस पर धमाल मचा दिया है। दर्शकों को फिल्म बेहद पसंद आ रही है और लोग काफी तारीफ भी कर रहे हैं। फिल्म की कहानी शुरूआत से लेकर अंत तक बांधे रखती है। हर सीन को बेहद सहज तरीके से दिखाया गया है। इन सबके अलावा फिल्म की स्टारकास्ट भी काफी दमदार है। इस फिल्म के बारे में डायरेक्टर गुरमीत सिंह ने पंजाब केसरी, नवोदय टाइम्स, जगबाणी और हिंद समाचार से खास बातचीत की। पेश हैं मुख्य अंश...

सवाल: ‘मिर्जापुर’ के ओटीटी यूनिवर्स को बड़े पर्दे पर लाने का विचार कैसे आया?

गुरमीत सिंह: यह विचार काफी संयोग से आया था। जब ‘मिर्जापुर’ का पहला सीजन बना था और रिलीज भी नहीं हुआ था, तब मुंबई में मामी फिल्म फेस्टिवल में इसकी स्क्रीनिंग हुई थी। थिएटर में करीब 400-500 लोग मौजूद थे और स्क्रीनिंग हाउसफुल थी। लोगों का जिस तरह का उत्साह देखने को मिला, उससे हमें लगा कि ‘मिर्जापुर’ को एक साथ बैठकर देखने का भी अपना मजा हो सकता है। लोग सीटी बजा रहे थे, चिल्ला रहे थे और हर सीन पर जबरदस्त प्रतिक्रिया दे रहे थे। तभी से कहीं न कहीं यह विचार था कि इसे बड़े पर्दे पर भी लाया जा सकता है। बाद में जब शो दर्शकों के बीच बेहद लोकप्रिय हुआ और पॉप कल्चर का हिस्सा बन गया, तो हमारे निर्माता रितेश सिधवानी भी लगातार फिल्म बनाने की बात करते रहे। 2024 में पुनीत कृष्णा के पास एक कहानी का विचार आया कि इसे एक अलग और स्वतंत्र फिल्म के तौर पर पेश किया जा सकता है। यह विचार सभी को पसंद आया और फिर कलाकारों से बात हुई। सब उत्साहित थे और इसी तरह ‘मिर्जापुर: द मूवी’ का सफर शुरू हुआ।

सवाल: रवि किशन को फिल्म में एक नए किरदार के लिए चुनने का फैसला कैसे हुआ?

गुरमीत सिंह: पुनीत कृष्णा की लेखनी की खासियत है कि उनके किरदार बहुत विस्तार से लिखे होते हैं और पर्दे पर बिल्कुल जीवंत लगते हैं। हमें ऐसा किरदार चाहिए था जो पहले से मौजूद किरदारों के सामने मजबूती से खड़ा हो सके। उसमें हास्य, खौफ, देसीपन, ड्रामा और दमदार व्यक्तित्व सब कुछ होना जरूरी था। कई नामों पर चर्चा हुई और हमारी कास्टिंग टीम ने रवि किशन जी का नाम सुझाया। हम उनसे मिलने गए और वह मुलाकात 20 मिनट से भी कम समय की रही होगी। उन्होंने कहानी सुनी और तुरंत इसके लिए तैयार हो गए। हम बहुत खुशकिस्मत हैं कि उन्होंने हां कहा क्योंकि इस किरदार के लिए उनसे बेहतर चुनाव शायद नहीं हो सकता था।

सवाल: मोहित मलिक को ‘मिर्जापुर’ में शामिल करने का विचार कैसे आया?

गुरमीत सिंह: मैं मोहित को पिछले चार-पांच साल से किसी न किसी प्रोजेक्ट में कास्ट करना चाहता था, लेकिन हर बार उनकी दूसरी व्यस्तताओं की वजह से बात नहीं बन पाती थी। इस फिल्म से करीब एक साल पहले उन्होंने खुद संपर्क किया और कहा कि अगर ‘मिर्जापुर’ की फिल्म बन रही है तो वह उसका हिस्सा बनना चाहते हैं। उस समय कहानी लिखी जा रही थी और हमें यह भी पता नहीं था कि नए किरदार किस तरह सामने आएंगे। मैंने उनसे कहा कि जब किरदार तैयार होगा तो मैं उन्हें जरूर बुलाऊंगा। खास बात यह है कि उन्होंने बिना किरदार के बारे में जाने अपने बाल और दाढ़ी बढ़ानी शुरू कर दी और अपनी शारीरिक तैयारी भी की। बाद में जब उन्होंने किरदार के लिए परीक्षण दिया तो लगा कि वह बिल्कुल सही हैं। फिल्म में उनके किरदार के संवाद बहुत कम हैं, लेकिन उन्होंने अपनी खामोशी और भावनाओं के जरिए किरदार को बहुत मजबूती से निभाया। उनमें एक खास तरह की उपस्थिति और सितारों जैसी चमक है इसलिए वह बिरजू लोहार की भूमिका के लिए बिल्कुल सही थे।

सवाल: रसिका दुग्गल के किरदार के संवाद और क्लाइमेक्स को लेकर आपकी क्या सोच थी?

गुरमीत सिंह: इसका सबसे ज्यादा श्रेय पुनीत कृष्णा को जाता है। हमने मिलकर कई चीजों पर काम किया और कहानी के मोड़ तय किए लेकिन पुनीत की खासियत है कि वह बहुत गहरी बात भी बेहद सरल शब्दों में कह सकते हैं। उनके संवादों में कविता जैसी खूबसूरती होती है लेकिन वे आम दर्शकों से आसानी से जुड़ जाते हैं। रसिका दुग्गल ने भी उन संवादों को जिस तरह निभाया वह शानदार था। खासकर क्लाइमेक्स में चारों कलाकारों ने मिलकर भावनाओं को बहुत विश्वसनीय बनाया। रसिका एक बेहतरीन अभिनेत्री हैं और उन्होंने एक बार फिर खुद को साबित किया है।

सवाल: फिल्म के संगीत में ढांडा नियोलीवाला के साथ जुड़ने का विचार कैसे आया?

गुरमीत सिंह: ‘मिर्जापुर’ के साथ कई चीजें सही समय पर जुड़ती चली गईं। यूनिवर्सल और एक्सेल म्यूजिक के सहयोग से हमें ढांडा नियोलीवाला के साथ काम करने का मौका मिला। उन्होंने फिल्म देखी और वह खुद ‘मिर्जापुर’ के प्रशंसक हैं इसलिए इस जुड़ाव को लेकर काफी उत्साहित थे। हमने फिल्म में एक खास जगह उनके संगीत के लिए चुनी और उन्होंने शानदार काम किया। उन्होंने हमारे लिए ‘दो नंबरी’ नाम का एक गीत भी लिखा जिसे फिल्म के साथ-साथ प्रचार के लिए भी इस्तेमाल किया गया। उनके लिखे गीतों में बहुत बारीकी और अपना अलग अंदाज है। इस पूरे सहयोग के लिए मैं पूरी टीम का आभारी हूं। इसके अलावा ढांडा नियोलीवाला बहुत ही कमाल के इंसान हैं। 

सवाल: फिल्म रिलीज होने के बाद दर्शकों की प्रतिक्रिया कैसी मिल रही है?

गुरमीत सिंह: अभी फिल्म को रिलीज हुए सिर्फ दो दिन हुए हैं इसलिए हम फिलहाल दर्शकों के प्यार को महसूस कर रहे हैं और बहुत खुश हैं कि लोगों को फिल्म पसंद आ रही है। जिस तरह लोग हमें संदेश भेज रहे हैं, संवादों पर प्रतिक्रिया दे रहे हैं और सिनेमाघरों में सीटी और तालियां बजा रहे हैं वह बहुत खास है। खास बात यह है कि दर्शक हर किरदार के लिए प्रतिक्रिया दे रहे हैं। हमारे लिए फिलहाल आंकड़ों से ज्यादा जरूरी यह है कि लोगों को फिल्म पसंद आ रही है या नहीं और वे इसे कितना प्यार दे रहे हैं। ‘मिर्जापुर’ के प्रशंसकों ने इस फिल्म को भी जिस तरह अपनाया है उसके लिए हम उनका दिल से धन्यवाद करते हैं।

सवाल: क्या ‘मिर्जापुर’ का अगला सीजन या फिल्म आगे भी देखने को मिलेगी?

गुरमीत सिंह: ‘मिर्जापुर’ की दुनिया आगे भी लौटती रहेगी। फिलहाल मैं इतना ही कह सकता हूं कि यह सफर जारी रहेगा और प्रशंसकों को आगे भी उत्साहित करता रहेगा। यह किस रूप में वापस आएगा, उस पर अभी बात करना सही नहीं होगा। मुझे लगता है कि थोड़ी उत्सुकता बनी रहने देना भी जरूरी है। अभी दर्शक चर्चा करें कि उन्हें अगला सीजन चाहिए या अगली फिल्म यह भी इस सफर का मजेदार हिस्सा है।

 

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