प्रभास की ‘बाहुबली’ में शिव भक्ति: आस्था, एक्शन और रिकॉर्डतोड़ सफलता की ऐतिहासिक गाथा

Edited By Updated: 15 Feb, 2026 06:00 PM

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जैसे ही महाशिवरात्रि 2026 का पावन पर्व उदित होता है, विश्वभर के भक्त ‘हर हर महादेव’ का जयघोष करते हुए भगवान शिव की शाश्वत संहार और पुनर्निर्माण की शक्ति का स्मरण करते हैं। यह पवित्र रात्रि हमें एस. एस. राजामौली की ‘बाहुबली’ गाथा की ओर भी लौटने का...

नई दिल्ली। जैसे ही महाशिवरात्रि 2026 का पावन पर्व उदित होता है, विश्वभर के भक्त ‘हर हर महादेव’ का जयघोष करते हुए भगवान शिव की शाश्वत संहार और पुनर्निर्माण की शक्ति का स्मरण करते हैं। यह पवित्र रात्रि हमें एस. एस. राजामौली की ‘बाहुबली’ गाथा की ओर भी लौटने का निमंत्रण देती है, जहाँ प्रभास ने एक अद्वितीय अखिल-भारतीय नायक के रूप में दिव्य क्रोध और अटूट श्रद्धा से परिपूर्ण महान योद्धा-राजा का रूप धारण किया। उनका अभिनय केवल परदे तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उसने पौराणिकता और भव्यता का ऐसा संगम प्रस्तुत किया जिसने क्षेत्रीय सिनेमा को अखिल-भारतीय परिघटना में परिवर्तित कर दिया।

कल्पना कीजिए युवा शिवुडु (प्रभास) ऊँची और दुर्गम चट्टानों पर चढ़ते हुए विशाल शिवलिंग को उठाने का संकल्प लेता है। वर्ष 2026 में प्रदर्शित ‘बाहुबली: द बिगिनिंग’ का वह रोमांचकारी दृश्य केवल दृश्य-वैभव नहीं था; उसने भगवान शिव की अडिग शक्ति का सजीव चित्रण किया, मानो उनके तांडव की सृष्टि-संतुलनकारी लय को मूर्त रूप दे दिया हो। शरीर पर विभूति का लेप, नेत्रों में प्रज्वलित आस्था प्रभास ने एक सच्चे भक्त की अटूट भावना को साकार कर दिया। ये दृश्य केवल मनोरंजन नहीं थे, बल्कि आध्यात्मिक गहराई से परिपूर्ण थे, जिनकी प्रतिध्वनि मंदिरों से लेकर चलचित्र गृहों तक सुनाई दी।

इसके पश्चात् ‘बाहुबली’ के दूसरे भाग ने इस श्रद्धा को और भी व्यापक बना दिया। शिव की इच्छा के प्रति बाहुबली का अंतिम समर्पण अशांति के बीच एकता का प्रतीक बना, जैसे भगवान शिव सम्पूर्ण ब्रह्मांड को एक सूत्र में बाँधते हैं। भूमिका की प्रामाणिकता के लिए प्रभास का कठोर शारीरिक रूपांतरण और अथक परिश्रम प्रत्येक गर्जना में आत्मिक तीव्रता भर देता है। आश्चर्य नहीं कि इन चलचित्रों ने अभूतपूर्व कीर्तिमान स्थापित किए और प्रभास को ‘रेबल स्टार’ से आगे बढ़ाकर अखिल-भारतीय सिनेमा का अद्वितीय नायक बना दिया।

इस महाशिवरात्रि पर, जब हम उपवास और ध्यान के माध्यम से शिव-तत्व का स्मरण करते हैं, आइए उस श्रद्धांजलि को प्रणाम करें जिसने ‘बाहुबली’ के माध्यम से वीरता की परिभाषा को नया आयाम दिया। प्रभास ने केवल अभिनय नहीं किया, उन्होंने भक्ति को जिया, यह सिद्ध करते हुए कि एक कलाकार की दृष्टि संस्कृतियों को जोड़ सकती है, आस्था को प्रज्वलित कर सकती है और उन्हें युगों-युगों तक स्मरणीय बना सकती है।

 

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