Edited By Mansa Devi,Updated: 13 Mar, 2026 10:49 AM

लिवर हमारे शरीर का एक बेहद महत्वपूर्ण अंग है। यह शरीर से विषैले पदार्थों को बाहर निकालने, पाचन में मदद करने और पोषक तत्वों को प्रोसेस करने का काम करता है।
नेशनल डेस्क: लिवर हमारे शरीर का एक बेहद महत्वपूर्ण अंग है। यह शरीर से विषैले पदार्थों को बाहर निकालने, पाचन में मदद करने और पोषक तत्वों को प्रोसेस करने का काम करता है। जब लिवर किसी कारण से सही तरीके से काम करना बंद कर देता है, तो इसे लिवर फेलियर कहा जाता है। यह स्थिति गंभीर हो सकती है और समय पर इलाज न मिलने पर जानलेवा भी बन सकती है।
लिवर फेलियर के कारण
लिवर फेलियर अक्सर किसी अन्य बीमारी या स्वास्थ्य समस्या के कारण होता है। लंबे समय तक शराब का सेवन, हेपेटाइटिस बी या सी संक्रमण, फैटी लिवर, मोटापा, हाई ब्लड प्रेशर, हाई कोलेस्ट्रॉल और डायबिटीज जैसी स्थितियां लिवर को नुकसान पहुंचा सकती हैं। यदि यह नुकसान लंबे समय तक बना रहे, तो लिवर में स्थायी क्षति हो सकती है, जिसे सिरोसिस कहा जाता है। सिरोसिस धीरे-धीरे लिवर फेलियर में बदल सकता है और कई मामलों में मरीज को लिवर ट्रांसप्लांट तक की आवश्यकता पड़ सकती है। हालांकि, शुरुआती चरण में सही इलाज और जीवनशैली में बदलाव से लिवर को सुरक्षित रखा जा सकता है।
आंखों में दिखने वाले लक्षण
शुरुआती चरण में लिवर की समस्या के लक्षण अक्सर स्पष्ट नहीं होते। कई लोग लंबे समय तक कोई खास परेशानी महसूस नहीं करते। लेकिन जैसे-जैसे बीमारी बढ़ती है, कुछ संकेत नजर आने लगते हैं। आंखों पर इसका असर तब दिखाई देने लगता है जब लिवर की स्थिति गंभीर हो जाती है।
सबसे आम लक्षण पीली आंखें (पीलिया) हैं। यह तब होता है जब शरीर में बिलीरुबिन नामक पिगमेंट जमा होने लगता है। सामान्य रूप से लिवर इस पिगमेंट को शरीर से बाहर निकाल देता है, लेकिन लिवर खराब होने पर यह प्रक्रिया प्रभावित हो जाती है।
इसके अलावा लंबे समय तक लिवर की बीमारी होने पर शरीर में विटामिन ए की कमी हो सकती है। इससे आंखों में सूखापन, रात में देखने में दिक्कत और कॉर्निया से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं। कुछ लोगों की पलकों के आसपास पीले रंग की छोटी गांठें भी बन सकती हैं, जिन्हें जैंथेलाज़्मा कहा जाता है।
लिवर कैंसर और आंखों के संकेत
विशेषज्ञों की रिपोर्ट के अनुसार, पीलिया लिवर कैंसर के आखिरी चरण में दिखाई देने वाला अहम लक्षण हो सकता है। जब लिवर में ट्यूमर बढ़ने लगते हैं, तो वे बाइल डक्ट पर दबाव डालते हैं। इसके कारण बिलीरुबिन बढ़ जाता है, जिससे आंखें और त्वचा पीली पड़ सकती हैं। इसके साथ ही गहरे रंग का यूरिन, खुजली और त्वचा पर अन्य परेशानियां भी देखने को मिल सकती हैं। इसलिए अगर आंखों में रंग बदलना या लगातार पीलापन दिखाई देने लगे, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। शुरुआती जांच और सही इलाज लिवर की गंभीर समस्याओं से बचाव में मदद कर सकते हैं।