रात के समय पैरों में होती है झनझनाहट और बेचैनी महसूस तो न समझें इसे मामूली, हो सकता है इस बीमारी का संकेत!

Edited By Updated: 01 Mar, 2026 11:13 AM

dont mistake tingling in your feet for minor symptoms it could be a illness

अक्सर दिनभर की भागदौड़ के बाद जब हम रात को बिस्तर पर सुकून की नींद लेने जाते हैं, तो अचानक पैरों में अजीब सी झनझनाहट, खिंचाव या कुछ रेंगने जैसा एहसास होने लगता है। कई लोग इसे सिर्फ थकान मानकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन चिकित्सा विज्ञान की भाषा में...

Tingling Sensation in Legs at Night Causes : अक्सर दिनभर की भागदौड़ के बाद जब हम रात को बिस्तर पर सुकून की नींद लेने जाते हैं तो अचानक पैरों में अजीब सी झनझनाहट, खिंचाव या कुछ रेंगने जैसा एहसास होने लगता है। कई लोग इसे सिर्फ थकान मानकर नजरअंदाज कर देते हैं लेकिन चिकित्सा विज्ञान की भाषा में यह 'रेस्टलेस लेग्स सिंड्रोम' (Restless Legs Syndrome - RLS) नामक एक न्यूरोलॉजिकल समस्या का संकेत हो सकता है।

क्या है रेस्टलेस लेग्स सिंड्रोम (RLS)?

यह नसों से जुड़ी एक ऐसी स्थिति है जिसमें व्यक्ति को अपने पैरों को हिलाने की तीव्र और अनियंत्रित इच्छा होती है। यह समस्या अक्सर तब सिर उठाती है जब शरीर आराम की मुद्रा में होता है जैसे कि रात को सोते समय या लंबे समय तक बैठे रहने पर। पैर हिलाने या थोड़ा टहलने से इसमें अस्थायी राहत तो मिलती है लेकिन यह समस्या बार-बार लौटकर आती है और व्यक्ति की नींद की गुणवत्ता को पूरी तरह खराब कर देती है।

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क्यों होती है पैरों में यह बेचैनी?

विशेषज्ञों के अनुसार इस समस्या का मुख्य संबंध हमारे मस्तिष्क के रसायनों से है:

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इन 5 लक्षणों को कभी न करें इग्नोर

यदि आपको नीचे दिए गए संकेत महसूस हो रहे हैं तो सावधान हो जाएं:

  1. पैरों में चींटियां रेंगने, जलन या झनझनाहट जैसा महसूस होना।

  2. बैठते या लेटते ही लक्षणों का अचानक बढ़ जाना।

  3. पैरों को लगातार हिलाने की तीव्र इच्छा होना।

  4. रात के समय लक्षण इतने बढ़ जाना कि नींद खुल जाए।

  5. टहलने या स्ट्रेचिंग करने पर दर्द या बेचैनी में थोड़ी राहत मिलना।

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लापरवाही पड़ सकती है भारी

लगातार नींद पूरी न होने के कारण व्यक्ति दिनभर थकान, चिड़चिड़ापन और एकाग्रता की कमी महसूस करता है। लंबे समय तक इस समस्या को दबाने से मानसिक तनाव और शारीरिक कमजोरी बढ़ सकती है। डॉक्टरों का कहना है कि यदि यह समस्या हफ्ते में दो-तीन बार से ज्यादा हो रही है तो तुरंत किसी न्यूरोलॉजिस्ट या फिजिशियन से संपर्क करना चाहिए। सही समय पर आयरन चेकअप और जीवनशैली में बदलाव से इसे आसानी से नियंत्रित किया जा सकता है।

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