Edited By Radhika,Updated: 15 May, 2026 12:57 PM

आज के डिजिटल दौर में लोगों का स्क्रीन टाइम काफी बढ़ गया है। लगातार स्क्रीन देखने से आंखों में थकावट और सूजन की समस्या आम देखी जा रही है। हालांकि लोग इसे छोटी सी समस्या समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन यह 'ड्राई आई सिंड्रोम' का संकेत हो सकता है। यह...
Dry Eye Syndrome: आज के डिजिटल दौर में लोगों का स्क्रीन टाइम काफी बढ़ गया है। लगातार स्क्रीन देखने से आंखों में थकावट और सूजन की समस्या आम देखी जा रही है। हालांकि लोग इसे छोटी सी समस्या समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन यह 'ड्राई आई सिंड्रोम' का संकेत हो सकता है। यह स्थिति तब पैदा होती है जब आंखों में पर्याप्त नमी नहीं बन पाती या आंसुओं की गुणवत्ता खराब हो जाती है।
हमारी आंखों की सतह को सुरक्षित रखने के लिए आंसुओं की एक परत होती है, जो तेल, पानी और म्यूकस (Mucus) से बनी होती है। जब इन तीनों का संतुलन बिगड़ जाता है, तो आंसू जल्दी सूखने लगते हैं। इसके परिणामस्वरूप आंखों में सूखापन, चुभन, लालिमा और धुंधलापन जैसी समस्याएं होने लगती हैं।
समस्या बढ़ने के प्रमुख कारण
1. जब हम मोबाइल, लैपटॉप या टीवी देखते समय हम पलकें झपकाना भूल जाते हैं, जिससे आंखों की नमी उड़ जाती है।
2. 40 की उम्र के बाद आंसुओं का उत्पादन प्राकृतिक रूप से कम हो जाता है। महिलाओं में मेनोपॉज के दौरान होने वाले हार्मोनल बदलाव भी इसकी बड़ी वजह हैं।
3. AC की सीधी हवा, बढ़ता प्रदूषण और शुष्क वातावरण आंखों की कोमलता को नुकसान पहुँचाते हैं।
4. डायबिटीज, थायराइड और हाई ब्लड प्रेशर की कुछ दवाएं भी आंखों को ड्राई कर सकती हैं।
5. लंबे समय तक लेंस पहनने से आंखों की ऑक्सीजन और नमी कम हो जाती है।
बचाव के आसान और असरदार उपाय
- 20-20-20 का नियम अपनाएं: हर 20 मिनट के स्क्रीन वर्क के बाद 20 सेकंड के लिए 20 फीट दूर रखी किसी चीज को देखें। इससे आंखों की मांसपेशियों को आराम मिलता है।
- पलकें झपकाते रहें: काम के दौरान सचेत होकर पलकें झपकाएं, ताकि आंखों पर नमी की परत बनी रहे।
- हाइड्रेटेड रहें: दिनभर पर्याप्त पानी पिएं। शरीर में पानी की कमी का सीधा असर आंसुओं के उत्पादन पर पड़ता है।
- हवा के रुख से बचें: पंखे या एसी की हवा सीधे चेहरे पर न पड़ने दें। बाहर निकलते समय सनग्लासेस (चश्मा) पहनें।
- सोने से पहले डिजिटल डिटॉक्स: रात को सोने से कम से कम एक घंटा पहले मोबाइल का इस्तेमाल बंद कर दें।

विशेषज्ञ की सलाह कब लें?
अगर आंखों में लगातार दर्द, भारीपन या नजर में धुंधलापन बना रहे, तो इसे मामूली न समझें। लंबे समय तक ड्राई आई का इलाज न होने पर आंखों की कॉर्निया को नुकसान पहुँच सकता है। लुब्रिकेटिंग आई ड्रॉप्स और डॉक्टर की सलाह से आप इस समस्या को समय रहते नियंत्रित कर सकते हैं।