Edited By Pardeep,Updated: 25 Apr, 2026 12:17 AM

प्रथम विश्व युद्ध में अपनी वीरता का लोहा मनवाने वाले 33,000 भारतीय सैनिकों के साथ हुई एक ऐतिहासिक गलती को आखिरकार सुधार लिया गया है।
इंटरनेशनल डेस्कः प्रथम विश्व युद्ध में अपनी वीरता का लोहा मनवाने वाले 33,000 भारतीय सैनिकों के साथ हुई एक ऐतिहासिक गलती को आखिरकार सुधार लिया गया है। कॉमनवेल्थ वॉर ग्रेव कमीशन (CWGC) ने इराक स्थित बसरा स्मारक के लिए नए डिजिटल नाम पैनल लॉन्च किए हैं, जिनमें पहली बार इन गुमनाम भारतीय शहीदों के नामों को उनके रैंक और रेजिमेंट के साथ ससम्मान शामिल किया गया है,।
क्यों छिपे रहे थे अब तक नाम?
इतिहासकारों के अनुसार, मेसोपोटामिया (वर्तमान इराक) का अभियान प्रथम विश्व युद्ध के सबसे कठिन अभियानों में से एक था। इसमें हजारों भारतीय सैनिकों ने अपना सर्वोच्च बलिदान दिया, लेकिन बसरा स्मारक पर उनके नाम कभी नहीं लिखे गए। चौंकाने वाली बात यह है कि उस दौर में कई भारतीय सैनिकों को उनके नाम के बजाय केवल संख्याओं से याद किया जाता था। CWGC अब इन तमाम असमानताओं को दूर करने की दिशा में कदम बढ़ा रहा है।
डिजिटल माध्यम का चुनाव क्यों?
इराक की वर्तमान सुरक्षा स्थिति को देखते हुए स्मारक पर भौतिक रूप से बड़े बदलाव करना फिलहाल चुनौतीपूर्ण था। इसीलिए, CWGC ने डिजिटल पैनल का विकल्प चुना है, ताकि जब तक वहां जाकर स्थायी काम न हो जाए, तब तक इन वीरों की पहचान दुनिया के सामने रहे। इतिहासकार डॉ. जॉर्ज हे ने इसे एक महत्वपूर्ण क्षण बताते हुए कहा कि इन सैनिकों को अब वह सम्मान मिल रहा है, जिसके वे 100 साल पहले हकदार थे।
शहीदों का बलिदान अब नहीं भुलाया जाएगा
प्रसिद्ध लेखिका और CWGC की सदस्य श्रबानी बसु ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा, "यह एक पुरानी गलती को सुधारने जैसा है। आखिरकार इन 33,000 सैनिकों के नाम दिखाए जा रहे हैं। उनका बलिदान अब कभी नहीं भुलाया जाएगा"। इन डिजिटल पैनलों के जरिए अब दुनिया भर के लोग कहीं से भी इन शहीदों की कहानियां पढ़ और साझा कर सकते हैं।